जल जीवन मिशन 2.0: पेयजल संवाद के 10वें सम्मेलन में 5 जिलों ने साझा किए सफल मॉडल
सारांश
मुख्य बातें
जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल और स्वच्छता विभाग (डीडीडब्ल्यूएस) ने 14 जुलाई 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिला कलेक्टरों के पेयजल संवाद का 10वाँ संस्करण आयोजित किया। नई दिल्ली से संचालित इस राष्ट्रीय संवाद में देशभर के जिला कलेक्टर, राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के मिशन निदेशक और वरिष्ठ अधिकारी एकजुट हुए ताकि जल जीवन मिशन (जेजेएम) 2.0 के अंतर्गत सतत ग्रामीण पेयजल सेवा वितरण को और सुदृढ़ किया जा सके।
मुख्य घटनाक्रम
डीडीडब्ल्यूएस के सचिव अशोक केके मीणा ने संवाद की अध्यक्षता की। राष्ट्रीय जल जीवन मिशन (एनजेजेएम) के अतिरिक्त सचिव एवं मिशन निदेशक कमल किशोर सोआन सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। सम्मेलन में पाँच चयनित जिलों — किन्नौर (हिमाचल प्रदेश), हावेरी (कर्नाटक), दुमका (झारखंड), दक्षिण गोवा (गोवा) और उनाकोटी (त्रिपुरा) — के जिला समाहर्ताओं ने अपनी प्रगति और सर्वोत्तम कार्यप्रणाली प्रस्तुत की।
सरकार की प्राथमिकताएँ
सचिव अशोक केके मीणा ने अपने उद्घाटन भाषण में स्पष्ट किया कि जल जीवन मिशन अब एक नए चरण में है — ध्यान अवसंरचना निर्माण से हटकर सामुदायिक-नेतृत्व वाली शासन व्यवस्था (जन भागीदारी) के माध्यम से सुनिश्चित और सतत ग्रामीण पाइपलाइन जल सेवा पर केंद्रित हो गया है। उन्होंने राज्यों और जिलों से हर घर जल (एचजीजे) ग्राम पंचायतों के प्रमाणीकरण में गति लाने और जल अर्पण को वार्षिक सामुदायिक कार्यक्रम के रूप में संस्थागत बनाने का आह्वान किया।
मीणा ने बताया कि जल सेवा आकलन के अंतर्गत देशभर में 1.17 लाख से अधिक गतिविधियाँ पहले ही पूरी हो चुकी हैं। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि सुजलम भारत डिजिटल रजिस्ट्री और पीएम गति शक्ति पोर्टल के माध्यम से स्रोत से नल तक सभी जल आपूर्ति संपत्तियों की डिजिटल मैपिंग और जियो-टैगिंग सुनिश्चित की जाए।
पाँच जिलों के सफल मॉडल
किन्नौर, हिमाचल प्रदेश के उपायुक्त डॉ. अमित कुमार शर्मा ने बताया कि दुर्गम पहाड़ी भूभाग और बिखरी बस्तियों के बावजूद जिले के सभी 210 गाँवों में 100 प्रतिशत हर घर जल कवरेज हासिल कर ली गई है। हिम-जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और पारंपरिक जल निकायों के संरक्षण जैसे अभिनव उपायों ने यह उपलब्धि संभव की।
हावेरी, कर्नाटक के उपायुक्त डॉ. विजयमहंतेश बी. दानम्मनावर ने बताया कि जिले में 95.36 प्रतिशत चालू घरेलू नल कनेक्शन (एफएचटीसी) कवरेज हासिल हो चुकी है। जीवा जल मोबाइल एप्लिकेशन और छह गाँवों में 24×7 जल आपूर्ति इस जिले की विशेष उपलब्धि है।
दुमका, झारखंड के उपायुक्त अभिजीत सिन्हा ने एकीकृत नियंत्रण कक्ष, ग्राम-स्तरीय रखरखाव कर्मियों के प्रशिक्षण और सुदृढ़ शिकायत निवारण तंत्र पर आधारित समन्वय-केंद्रित रणनीति साझा की।
दक्षिण गोवा के कलेक्टर ईगन क्लैटस ने बताया कि जिले में जल जीवन मिशन की सभी 118 परियोजनाएँ पूरी होकर चालू हो चुकी हैं। आईओटी-सक्षम निगरानी, एससीएडीए सिस्टम और स्मार्ट मीटरिंग के माध्यम से राज्य की पेयजल की लगभग 96 प्रतिशत माँग सतही जल आधारित प्रणालियों से पूरी हो रही है।
उनाकोटी, त्रिपुरा की जिला मजिस्ट्रेट एवं कलेक्टर मेघा जैन ने बताया कि जिले में 89.16 प्रतिशत एफएचटीसी कवरेज से 47,800 से अधिक परिवारों को लाभ मिल रहा है। कलिगिरी सतही जल परियोजना ने दूरस्थ सीमावर्ती गाँवों में मौसमी और टैंकर-आधारित आपूर्ति को स्थायी पाइपयुक्त पेयजल से बदल दिया है।
16वें वित्त आयोग अनुदान की भूमिका
सम्मेलन में जल, स्वच्छता और स्वास्थ्य (डब्ल्यूएएसएच) के लिए 16वें वित्त आयोग के अनुदान की महत्वपूर्ण भूमिका को विस्तृत प्रस्तुति के माध्यम से रेखांकित किया गया। यह ऐसे समय में आया है जब ग्राम पंचायतों और ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों (वीडब्ल्यूएससी) को जल आपूर्ति प्रणालियों के संचालन एवं रखरखाव की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है।
आगे की राह
मिशन निदेशक कमल किशोर सोआन ने जिला कलेक्टरों से विभागों के बीच समन्वय मजबूत करने, नियमित कार्यान्वयन समीक्षा करने और नवाचार को प्रोत्साहित करने का आग्रह किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सतत सेवा वितरण, स्रोत की स्थिरता, सामुदायिक भागीदारी और प्रौद्योगिकी-आधारित निगरानी आगे चलकर जेजेएम 2.0 के चार मुख्य स्तंभ होंगे। पेयजल संवाद ने यह भी स्पष्ट किया कि हर घर जल के लक्ष्य को टिकाऊ बनाए रखना ही अब मिशन की असली कसौटी है।