जल जीवन मिशन 2.0: पेयजल संवाद के 12वें संस्करण में जिला कलेक्टरों ने साझा कीं ग्रामीण जल आपूर्ति की सर्वोत्तम प्रथाएँ
सारांश
मुख्य बातें
जल जीवन मिशन (JJM) 2.0 के कार्यान्वयन को गति देने के उद्देश्य से मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में 'पेयजल संवाद' के 12वें संस्करण का आयोजन किया गया, जिसमें देशभर के जिला कलेक्टरों ने ग्रामीण जल आपूर्ति योजनाओं पर चर्चा की और सर्वोत्तम प्रथाएँ साझा कीं। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (DDWS), जो जल शक्ति मंत्रालय के अधीन आता है, ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए इस संवाद का आयोजन किया।
संवाद की अध्यक्षता और प्रमुख उपस्थिति
इस संवाद की अध्यक्षता DDWS के सचिव अशोक केके मीना ने की। राष्ट्रीय जल जीवन मिशन (NJJM) के अतिरिक्त सचिव और मिशन निदेशक कमल किशोर सोआन, राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन (SWSM) और DDWS के वरिष्ठ अधिकारी भी इस कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। यह संवाद श्रृंखला मिशन की प्रगति की समीक्षा के लिए एक नियमित मंच के रूप में स्थापित हो चुकी है।
मुख्य घटनाक्रम: क्या-क्या हुई चर्चा
सचिव मीना ने JJM 2.0 के तहत योजना की प्रगति, सेवा वितरण, जल गुणवत्ता और स्रोत स्थिरता की समीक्षा के लिए नियमित मासिक जिला जल और स्वच्छता मिशन (DWSM) बैठकों के महत्व पर विशेष ज़ोर दिया। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि निर्धारित परीक्षण अवधि और उचित दस्तावेज़ीकरण के बाद पूर्ण हो चुकी योजनाओं को 'जल अर्पण' कार्यक्रम के माध्यम से ग्राम पंचायतों को सौंपा जाए, जिससे सामुदायिक स्वामित्व और दीर्घकालिक संचालन एवं रखरखाव को प्रोत्साहन मिल सके।
गौरतलब है कि ग्राम पंचायतों को जिम्मेदारी सौंपने की यह प्रक्रिया योजनाओं की दीर्घकालिक व्यवहार्यता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। आँकड़ों के अनुसार, बहुत-सी ग्रामीण जल योजनाएँ स्थानीय स्वामित्व के अभाव में निर्माण के बाद उचित रखरखाव से वंचित रह जाती हैं।
जन प्रतिनिधियों की भागीदारी पर ज़ोर
मीना ने जिलों से आग्रह किया कि वे जल अर्पण समारोहों, DISHA बैठकों और WSM समीक्षाओं के माध्यम से सांसदों, विधायकों तथा अन्य जन प्रतिनिधियों को सक्रिय रूप से इस प्रक्रिया में शामिल करें। उनका कहना था कि इससे ग्रामीण जल आपूर्ति प्रणालियों में पारदर्शिता और जनविश्वास दोनों में वृद्धि होगी। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार JJM के दूसरे चरण में सेवा-वितरण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रही है।
वित्तीय प्रबंधन और तकनीकी उपकरणों पर बल
सचिव ने JJM 2.0 निधियों के समय पर उपयोग, भौतिक और वित्तीय प्रगति की सटीक रिपोर्टिंग, तथा सेवा अंतरालों को दूर करने के लिए जिला और राज्य स्तरीय सुधार योजनाओं की तैयारी की आवश्यकता पर भी बल दिया। इसके अलावा, मीना ने वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण जैसे स्रोत स्थिरता उपायों की योजना बनाने के लिए निर्णय समर्थन प्रणाली (DSS) के उपयोग को प्रोत्साहित किया।
आगे की राह
सभी ग्रामीण परिवारों को विश्वसनीय और सतत पेयजल सेवाएँ सुनिश्चित करने के लिए योजना की कार्यप्रणाली, जल गुणवत्ता और स्थिरता संबंधी उपायों की नियमित निगरानी की आवश्यकता को इस संवाद में प्रमुखता से उठाया गया। यह 12वाँ पेयजल संवाद मिशन की निरंतर समीक्षा और सीखने की प्रक्रिया को दर्शाता है, और आगामी महीनों में जिला स्तर पर क्रियान्वयन की गति तेज करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।