जल जीवन मिशन: मिर्जापुर के दुहुआ गांव ने संभाली जल आपूर्ति योजना, डेनमार्क राजदूत ने किया दौरा
सारांश
मुख्य बातें
जल जीवन मिशन के अंतर्गत उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के दुहुआ गांव में 16 सितंबर को एक ऐतिहासिक 'जल अर्पण' समारोह आयोजित किया गया, जिसमें ग्रामीण जल आपूर्ति योजना की जिम्मेदारी औपचारिक रूप से स्थानीय समुदाय को सौंपी गई। इस अवसर पर भारत में डेनमार्क के राजदूत रासमस एबिल्डगार्ड क्रिस्टेंसन ने गांव का दौरा किया और समुदाय की जल-प्रबंधन क्षमता को प्रत्यक्ष रूप से देखा। यह आयोजन उस व्यापक प्रयास का हिस्सा है, जिसके तहत भारत सरकार ग्रामीण जल अवसंरचना को सामुदायिक नियंत्रण में देने की दिशा में काम कर रही है।
मुख्य घटनाक्रम
समारोह में जिला मजिस्ट्रेट पवन कुमार गंगवार, मुख्य विकास अधिकारी विशाल कुमार, नमामि गंगे की अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट विजेता, तथा यूएनओपीएस के भारत में कंट्री मैनेजर विनोद मिश्रा सहित वरिष्ठ सरकारी अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में 400 से अधिक समुदाय के सदस्य शामिल हुए, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं थीं।
राजदूत क्रिस्टेंसन ने सबसे पहले नरैना कला गांव, लालगंज स्थित जल उपचार संयंत्र (वाटर ट्रीटमेंट प्लांट) का दौरा किया। उन्हें संयंत्र के संचालन और सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्विजिशन (स्काडा) सिस्टम की कार्यप्रणाली से अवगत कराया गया, जो स्रोत से नल तक पानी की पूरी यात्रा की निगरानी करता है।
योजना की व्यापकता और लाभार्थी गांव
यह उपचार संयंत्र बेलन नदी से जल लेकर एक बहु-ग्राम योजना के तहत संचालित होता है। जल जीवन मिशन के अंतर्गत इस योजना से 258 गांवों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। इनमें से अमरावती, भवानीपुर और दुहुआ — ये तीन गांव यूएनओपीएस के हस्तक्षेप वाले क्षेत्र हैं, जहाँ विशेष तकनीकी और प्रशिक्षण सहायता प्रदान की गई है।
गौरतलब है कि यूएनओपीएस ने इन गांवों में 'जल सहेलियों' को प्रशिक्षित किया है — महिलाओं का एक समूह जो जल आपूर्ति व्यवस्था की स्थानीय निगरानी और रखरखाव की जिम्मेदारी उठाती हैं। दुहुआ पहुंचने पर इन्हीं जल सहेलियों ने राजदूत का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया।
सामुदायिक भागीदारी की झलक
प्रतिनिधिमंडल ने गांव में एक ट्रांसेक्ट वॉक (गांव भ्रमण) किया, जिसके दौरान ग्रामीण जल आपूर्ति योजना के व्यावहारिक संचालन को देखा गया और समुदाय के सदस्यों से सीधी बातचीत हुई। पारसिया स्थित ओवरहेड टैंक पर राजदूत ने पंप ऑपरेटर से संवाद किया और 'जल बंधन' गतिविधि में भाग लिया, जो जल संरक्षण के प्रति सामुदायिक संकल्प का प्रतीक है। उन्होंने वहाँ एक पौधा भी लगाया।
मुख्य 'जल अर्पण' समारोह जय प्रकाश नारायण सर्वोदय बालक विद्यालय, पारसिया में आयोजित किया गया। इसमें दुहुआ के ग्राम प्रधान का संबोधन, पानी की गुणवत्ता जाँच का लाइव प्रदर्शन और समुदाय के साथ संवाद शामिल रहा।
डेनमार्क-भारत जल साझेदारी
राजदूत क्रिस्टेंसन ने इस अवसर पर कहा, 'पानी के मामले में डेनमार्क और भारत की साझेदारी बहुत पुरानी और मजबूत है। हम दोनों इस बात पर सहमत हैं कि पानी का प्रबंधन टिकाऊ और कुशल तरीके से किया जाना चाहिए, और इसमें उन समुदायों को भी शामिल किया जाना चाहिए जो पानी के लिए इस पर निर्भर हैं।' उन्होंने आगे कहा, 'डेनमार्क को इस बात पर गर्व है कि वह जल जीवन मिशन का समर्थन करने वाला एकमात्र अंतरराष्ट्रीय देश है, और हम इसे भारत के साथ अपनी साझेदारी के भरोसे और गहराई का प्रतीक मानते हैं।'
यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार जल जीवन मिशन के तहत देशभर के ग्रामीण घरों तक नल से पेयजल पहुंचाने के लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में तेज़ी से काम कर रही है। दुहुआ जैसे गांवों में सामुदायिक स्वामित्व का यह मॉडल उस बड़े बदलाव की एक मिसाल है, जहाँ सरकारी अवसंरचना को दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ बनाने के लिए स्थानीय समुदायों को केंद्र में रखा जा रहा है।
आगे की राह
दुहुआ में 'जल अर्पण' के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशिक्षित जल सहेलियाँ और ग्राम स्तरीय समितियाँ दीर्घकाल में इस अवसंरचना का रखरखाव किस प्रकार करती हैं। यूएनओपीएस और डेनमार्क की सहभागिता से विकसित यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी एक संदर्भ बिंदु बन सकता है।