जल जीवन मिशन: मिर्जापुर के दुहुआ गांव ने संभाली अपनी जल आपूर्ति योजना, डेनमार्क राजदूत ने किया दौरा
सारांश
मुख्य बातें
जल जीवन मिशन के अंतर्गत उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के दुहुआ गांव में 16 सितंबर 2026 को 'जल अर्पण' समारोह आयोजित किया गया, जिसमें ग्रामीण जल आपूर्ति योजना की जिम्मेदारी औपचारिक रूप से स्थानीय समुदाय को सौंपी गई। भारत में डेनमार्क के राजदूत रासमस एबिल्डगार्ड क्रिस्टेंसन इस ऐतिहासिक अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। यह आयोजन 'स्रोत से नल तक' की पूरी जल यात्रा को समुदाय के हाथों में सौंपने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
जल अर्पण समारोह: मुख्य घटनाक्रम
जय प्रकाश नारायण सर्वोदय बालक विद्यालय, पारसिया में आयोजित इस कार्यक्रम में जिला मजिस्ट्रेट पवन कुमार गंगवार, मुख्य विकास अधिकारी विशाल कुमार, नमामि गंगे की अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट विजेता, यूएनओपीएस के भारत में कंट्री मैनेजर विनोद मिश्रा सहित वरिष्ठ सरकारी अधिकारी एवं 400 से अधिक समुदाय के सदस्य — विशेष रूप से महिलाएँ — शामिल हुईं। कार्यक्रम की शुरुआत दुहुआ के ग्राम प्रधान के संबोधन से हुई, जिसके बाद पानी की गुणवत्ता जाँच का लाइव डेमो और समुदाय के साथ संवाद हुआ।
यूएनओपीएस द्वारा प्रशिक्षित 'जल सहेलियों' ने पारंपरिक तरीके से राजदूत का स्वागत किया। इसके बाद गांव में 'ट्रांसेक्ट वॉक' के अंतर्गत जल आपूर्ति ढाँचे का निरीक्षण किया गया और ग्रामीणों से सीधा संवाद हुआ।
जल उपचार संयंत्र और SCADA तकनीक
राजदूत क्रिस्टेंसन ने नरैना कला गांव, लालगंज स्थित जल उपचार संयंत्र (वाटर ट्रीटमेंट प्लांट) का विस्तृत दौरा किया। उन्हें 'सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्विजिशन' (SCADA) प्रणाली की कार्यप्रणाली समझाई गई, जो स्रोत से नल तक पानी की पूरी यात्रा की निगरानी करती है। यह संयंत्र बेलन नदी से जल लेकर उसे शुद्ध करता है और 258 गांवों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराता है।
इन 258 गांवों में अमरावती, भवानीपुर और दुहुआ वे तीन गांव हैं जहाँ यूएनओपीएस का विशेष हस्तक्षेप है। पारसिया के ओवरहेड टैंक पर राजदूत ने पंप ऑपरेटर से बातचीत की और 'जल बंधन' गतिविधि में भाग लिया — जो जल संरक्षण के प्रति समुदाय के सामूहिक संकल्प का प्रतीक है। उन्होंने एक पौधा भी रोपित किया।
डेनमार्क-भारत जल साझेदारी
राजदूत क्रिस्टेंसन ने इस अवसर पर कहा, 'पानी के मामले में डेनमार्क और भारत की साझेदारी बहुत पुरानी और मजबूत है। हम दोनों इस बात पर सहमत हैं कि पानी का प्रबंधन टिकाऊ और कुशल तरीके से किया जाना चाहिए, और इसमें उन समुदायों को भी शामिल किया जाना चाहिए जो पानी के लिए इस पर निर्भर हैं।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि डेनमार्क 'जल जीवन मिशन' का समर्थन करने वाला एकमात्र अंतरराष्ट्रीय देश है और इसे भारत के साथ साझेदारी के विश्वास का प्रतीक मानता है।
गौरतलब है कि यूएनओपीएस और डेनमार्क की भागीदारी केवल अवसंरचना निर्माण तक सीमित नहीं है — 'जल सहेलियों' का प्रशिक्षण और समुदाय की दीर्घकालिक क्षमता निर्माण इस साझेदारी की विशिष्टता है।
समुदाय की भागीदारी: मॉडल का केंद्रबिंदु
यह आयोजन इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है कि जल जीवन मिशन की सफलता सरकारी निवेश के साथ-साथ स्थानीय समुदाय की स्वामित्व-भावना पर भी निर्भर है। दुहुआ का यह मॉडल — जहाँ महिलाएँ 'जल सहेली' के रूप में योजना की संचालक हैं — ग्रामीण जल प्रबंधन में समुदाय-संचालित दृष्टिकोण का एक व्यावहारिक उदाहरण प्रस्तुत करता है। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार जल जीवन मिशन के अंतर्गत 'हर घर जल' के लक्ष्य को गति देने में जुटी है।
आगे क्या
दुहुआ की सफलता को एक प्रतिरूप के रूप में देखा जा रहा है जिसे मिर्जापुर और उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों में भी अपनाया जा सकता है। यूएनओपीएस और डेनमार्क की भागीदारी में अन्य गांवों में भी इसी तरह की क्षमता-निर्माण गतिविधियाँ आगे बढ़ाने की योजना बताई जा रही है।