जैसलमेर में ऊंट से टकराई सेना की गाड़ी: मेजर हमजा आरिफ की मौत, दो लेफ्टिनेंट गंभीर रूप से घायल
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान के जैसलमेर जिले में 31 जुलाई की देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसे में मेजर हमजा आरिफ की मौत हो गई और दो साथी अधिकारी गंभीर रूप से घायल हो गए। यह हादसा थैयात आर्मी इलाके के पास रात करीब 12:30 बजे हुआ, जब ड्यूटी से लौट रही सेना की गाड़ी अचानक सड़क पर आए एक ऊंट से टकरा गई। जैसलमेर शहर से लगभग 18 किलोमीटर दूर हुए इस हादसे ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया।
हादसे का घटनाक्रम
पुलिस के अनुसार, ऊंट से टक्कर के बाद सेना की गाड़ी चार से पाँच बार पलटी और फिर करीब 100 मीटर तक घिसटती चली गई। सदर पुलिस स्टेशन के एएसआई जगदीश चरण ने बताया कि तीनों अधिकारी ड्यूटी पूरी करके आर्मी स्टेशन लौट रहे थे, तभी यह दुर्घटना हुई। टक्कर में शामिल ऊंट की भी मौत हो गई।
मृतक और घायल अधिकारियों की पहचान
मृतक अधिकारी की पहचान मध्य प्रदेश के निवासी मेजर हमजा आरिफ के रूप में हुई है। उल्लेखनीय है कि उनकी शादी महज एक महीने पहले ही हुई थी। हादसे के बाद तीनों को थैयात स्थित आर्मी हॉस्पिटल ले जाया गया, जहाँ चिकित्सकों ने मेजर हमजा को मृत घोषित कर दिया। घायल अधिकारियों की पहचान लेफ्टिनेंट आयुष्मान और लेफ्टिनेंट अभिनव राठौर के रूप में हुई है। दोनों को गंभीर चोटें आई हैं और वे आर्मी हॉस्पिटल में चिकित्सीय निगरानी में हैं।
प्रशासन और सेना की प्रतिक्रिया
हादसे की सूचना मिलते ही बचाव दल और सेना के जवान तुरंत घटनास्थल पर पहुँचे। स्थानीय पुलिस और मिलिट्री पुलिस ने इस दुर्घटना की संयुक्त जाँच शुरू कर दी है। राजस्थान में रक्षा विभाग के पीआरओ, लेफ्टिनेंट कर्नल निखिल धवन ने कहा कि उन्हें अभी दुर्घटना की पूरी जानकारी नहीं मिली है और जानकारी मिलने पर पूरी बात बताई जाएगी।
जाँच के मुख्य बिंदु
अधिकारी दुर्घटना के कारणों की जाँच कर रहे हैं, जिसमें यह भी शामिल है कि ऊंट रात के समय उस सड़क पर कैसे आया। गौरतलब है कि थैयात आर्मी इलाका जैसलमेर शहर के केंद्र से लगभग 12 से 13.5 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में स्थित है। यह क्षेत्र जैसलमेर वॉर म्यूजियम के लिए भी जाना जाता है, जहाँ 1971 की लोंगेवाला की लड़ाई में इस्तेमाल हुए सैन्य उपकरण प्रदर्शित हैं।
आगे क्या होगा
संयुक्त जाँच के नतीजों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। सेना और पुलिस दोनों इस बात की पड़ताल कर रहे हैं कि क्या इस मार्ग पर रात के समय जानवरों की आवाजाही रोकने के लिए पर्याप्त उपाय थे। मेजर हमजा आरिफ के असामयिक निधन ने उनके परिजनों और सेना के साथियों को गहरे शोक में डुबो दिया है।