क्या तेजस्वी यादव के बयानों से उनकी निष्क्रियता छुप सकती है?

सारांश
Key Takeaways
- मंत्री अशोक चौधरी ने तेजस्वी यादव के बयानों पर प्रतिक्रिया दी।
- विपक्ष को अपने कार्यों को जनता के सामने रखना चाहिए।
- 46% लोग गरीबी रेखा से नीचे थे, अब 30% ऊपर आए हैं।
- नए कानून से पारदर्शिता बढ़ेगी।
- विपक्ष का विरोध और सरकार की जिम्मेदारी की बात।
पटना, २४ अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। राजद नेता तेजस्वी यादव के 'एनडीए का मतलब नहीं देंगे अधिकार' संबंधी बयान पर मंत्री अशोक चौधरी ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि शब्दों को तोड़-मरोड़कर पेश करने के बजाय, उन्हें जनता के सामने जाकर अपने कार्यों को स्पष्ट करना चाहिए।
मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि विपक्ष निरंतर आधारहीन बयानों में व्यस्त रहता है। क्या एनडीए को नई परिभाषा देने का प्रयास उनके नेताओं का कोई कर्मकांड है? शब्दों को तोड़-मरोड़ने के बजाय, उन्हें जनता के बीच जाकर यह बताना चाहिए कि उनके नेता वास्तव में क्या कर रहे हैं। केवल नारे गढ़ने से कई वर्षों की निष्क्रियता नहीं छुप जाती।
उन्होंने एनडीए के विकास कार्यों पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने बताया कि ४६ प्रतिशत लोग गरीबी रेखा से नीचे थे, और ३० प्रतिशत लोग गरीबी रेखा के ऊपर आ गए हैं।
मंत्री अशोक चौधरी ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को हटाने वाले बिल के बारे में कहा कि भ्रष्टाचार में संलिप्त व्यक्ति सब कुछ रोकने वाला नहीं हो सकता। सत्ता पर काबिज होने के लिए देश के भविष्य को नजरअंदाज करने वाले लोग, भविष्य द्वारा भी नजरअंदाज किए जाते हैं।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार नए कानून लाने जा रही है। इस कानून के तहत यदि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री गंभीर आपराधिक आरोपों में ३० दिन से अधिक हिरासत में रहते हैं, तो उन्हें पद से हटा दिया जाएगा। विपक्ष इसका विरोध कर रहा है। एक ओर सरकार इसे जिम्मेदारी और पारदर्शिता की दिशा में एक बड़ा कदम मानती है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इसे सत्ता का हथियार मानता है।