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अश्विनी वैष्णव: इंजीनियर से IAS, व्हार्टन MBA और फिर केंद्रीय मंत्री तक का असाधारण सफर

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अश्विनी वैष्णव: इंजीनियर से IAS, व्हार्टन MBA और फिर केंद्रीय मंत्री तक का असाधारण सफर

सारांश

इंजीनियर से IAS, IAS से व्हार्टन MBA, कॉर्पोरेट से उद्यमी और फिर तीन बड़े मंत्रालयों के मुखिया — अश्विनी वैष्णव का सफर बताता है कि विविध अनुभव किसी नीति-निर्माता को कितना धारदार बना सकते हैं।

मुख्य बातें

अश्विनी वैष्णव का जन्म 18 जुलाई 1970 को राजस्थान के जोधपुर में हुआ।
उन्होंने IIT कानपुर से एम.टेक और 1994 में 27वीं रैंक से IAS परीक्षा उत्तीर्ण की।
ओडिशा कैडर में बालासोर व कटक कलेक्टर, अटल बिहारी वाजपेयी के निजी सचिव और मोरमुगाओ पोर्ट ट्रस्ट के उपाध्यक्ष रहे।
2008 में व्हार्टन स्कूल से MBA; GE ट्रांसपोर्टेशन और सीमेंस में वरिष्ठ पदों पर काम किया।
2019 में ओडिशा से राज्यसभा सांसद; 2021 में रेलवे, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं IT तथा सूचना एवं प्रसारण मंत्री बने।
कार्यकाल में वंदे भारत विस्तार, सेमीकंडक्टर नीति और AI को बढ़ावा देना प्रमुख उपलब्धियाँ रहीं।

केंद्रीय रेलवे, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी तथा सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव का जीवन भारतीय प्रशासन और राजनीति में विरले ही देखा जाने वाला बहुआयामी सफर है। 18 जुलाई 1970 को राजस्थान के जोधपुर में जन्मे वैष्णव ने इंजीनियरिंग, IAS, कॉर्पोरेट जगत और अंततः केंद्रीय मंत्रिमंडल — हर पड़ाव पर खुद को नए सिरे से साबित किया। उनकी प्रशासनिक दक्षता, तकनीकी पृष्ठभूमि और नीतिगत दूरदर्शिता ने उन्हें मोदी सरकार के सबसे सक्रिय मंत्रियों में स्थान दिलाया है।

शिक्षा और प्रारंभिक जीवन

अश्विनी वैष्णव ने 1989 में एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज (जेएनवीयू), जोधपुर से इलेक्ट्रॉनिक एवं संचार इंजीनियरिंग में स्नातक किया। इसके बाद उन्होंने IIT कानपुर से एम.टेक की उपाधि प्राप्त की। तकनीकी शिक्षा की इस मजबूत नींव ने उनके भविष्य के हर निर्णय को आकार दिया।

1994 में उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की परीक्षा 27वीं रैंक के साथ उत्तीर्ण की — एक ऐसी उपलब्धि जो उनकी बौद्धिक क्षमता की पुष्टि करती है।

IAS कैरियर: ओडिशा से PMO तक

1994 में ओडिशा कैडर से IAS में शामिल होने के बाद वैष्णव ने बालासोर और कटक जिलों में कलेक्टर के रूप में जमीनी प्रशासन का अनुभव लिया। उनकी कार्यकुशलता ने उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यालय में उप सचिव के पद तक पहुँचाया।

PMO में कार्यकाल के दौरान उन्होंने बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं के लिए सार्वजनिक-निजी-भागीदारी (PPP) ढाँचे को विकसित करने में अहम भूमिका निभाई। बाद में उन्हें वाजपेयी के निजी सचिव के रूप में नियुक्त किया गया। 2006 में वे मोरमुगाओ पोर्ट ट्रस्ट के उपाध्यक्ष बने और दो वर्षों तक इस पद पर रहे।

कॉर्पोरेट जगत और उद्यमिता

2008 में वैष्णव ने पेन्सिलवेनिया विश्वविद्यालय के व्हार्टन स्कूल से MBA करने के लिए अमेरिका का रुख किया — यह कदम उनके निरंतर सीखते रहने की प्रवृत्ति का प्रमाण है। 2010 में सिविल सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर वे कॉर्पोरेट क्षेत्र में उतरे।

भारत लौटने के बाद उन्होंने GE ट्रांसपोर्टेशन में प्रबंध निदेशक और सीमेंस में वाइस प्रेसिडेंट (लोकोमोटिव्स एवं अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर स्ट्रैटेजी) के रूप में काम किया। 2012 में उन्होंने कॉर्पोरेट जगत से अलग होकर गुजरात में थ्रीटी ऑटो लॉजिस्टिक्स प्राइवेट लिमिटेड और वीजी ऑटो कम्पोनेंट्स प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना की, जो उनकी उद्यमशीलता की पहचान बनी।

राजनीतिक पारी और मंत्रालय की उपलब्धियाँ

भारतीय जनता पार्टी (BJP) से जुड़ने के बाद 2019 में वैष्णव ओडिशा से राज्यसभा सदस्य बने। 2021 में उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया गया, जहाँ उन्होंने रेलवे, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी तथा सूचना एवं प्रसारण मंत्रालयों की बागडोर सँभाली।

रेलवे मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल में वंदे भारत ट्रेनों का विस्तार, स्टेशनों का पुनर्विकास, सुरक्षा प्रणालियों का आधुनिकीकरण और रेल अवसंरचना में तेज़ निवेश उल्लेखनीय रहा। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं IT मंत्रालय में उन्होंने सेमीकंडक्टर निर्माण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण नीतिगत पहल कीं। उनका दीर्घकालिक लक्ष्य भारत को वैश्विक तकनीकी केंद्र के रूप में स्थापित करना रहा है — एक ऐसा विज़न जो उनकी इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि और प्रशासनिक अनुभव दोनों से पोषित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

कॉर्पोरेट बोर्डरूम और उद्यमिता — तीनों का अनुभव एक ही जीवन में समेटा है। यह बहुआयामी पृष्ठभूमि उनकी नीतियों में दिखती है — वंदे भारत की रफ्तार हो या सेमीकंडक्टर मिशन की महत्वाकांक्षा। लेकिन असली कसौटी यह है कि क्या ये नीतिगत घोषणाएँ ज़मीन पर मापने योग्य बदलाव लाती हैं — खासकर रेलवे सुरक्षा और घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन जैसे क्षेत्रों में जहाँ लक्ष्य और वास्तविकता के बीच की खाई अभी पाटी नहीं गई है।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अश्विनी वैष्णव कौन हैं और उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि क्या है?
अश्विनी वैष्णव भारत के केंद्रीय रेलवे, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं IT तथा सूचना एवं प्रसारण मंत्री हैं, जिनका जन्म 18 जुलाई 1970 को जोधपुर, राजस्थान में हुआ। उन्होंने एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज से इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग, IIT कानपुर से एम.टेक और व्हार्टन स्कूल से MBA की डिग्री हासिल की है।
अश्विनी वैष्णव ने IAS में कौन-सी रैंक हासिल की थी?
1994 में अश्विनी वैष्णव ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की परीक्षा में 27वीं रैंक प्राप्त की थी। उन्हें ओडिशा कैडर आवंटित किया गया, जहाँ उन्होंने बालासोर और कटक जिलों में कलेक्टर के रूप में काम किया।
अश्विनी वैष्णव ने IAS छोड़कर निजी क्षेत्र में क्यों गए?
2010 में अश्विनी वैष्णव ने स्वैच्छिक रूप से सिविल सेवा छोड़ी और कॉर्पोरेट जगत में शामिल हुए। इससे पहले 2008 में वे व्हार्टन स्कूल से MBA करने अमेरिका गए थे। इसके बाद उन्होंने GE ट्रांसपोर्टेशन और सीमेंस में वरिष्ठ पदों पर काम किया और 2012 में गुजरात में अपनी कंपनियाँ भी स्थापित कीं।
अश्विनी वैष्णव रेलवे मंत्री के रूप में क्या उपलब्धियाँ हासिल कर चुके हैं?
रेलवे मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल में वंदे भारत ट्रेनों का विस्तार, स्टेशनों का पुनर्विकास, सुरक्षा प्रणालियों का आधुनिकीकरण और रेल अवसंरचना में तेज़ निवेश प्रमुख उपलब्धियाँ रही हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं IT मंत्री के रूप में उन्होंने सेमीकंडक्टर निर्माण और AI नीति को आगे बढ़ाया।
अश्विनी वैष्णव राजनीति में कब और कैसे आए?
अश्विनी वैष्णव भारतीय जनता पार्टी (BJP) से जुड़े और 2019 में ओडिशा से राज्यसभा सांसद बने। 2021 में उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया गया, जहाँ उन्होंने रेलवे, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं IT और सूचना एवं प्रसारण — तीन महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी सँभाली।
राष्ट्र प्रेस
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