क्या असम में बांग्लादेश की स्थिति के गंभीर परिणाम हो सकते हैं?
सारांश
Key Takeaways
- बांग्लादेश में बढ़ती अस्थिरता का असर असम पर पड़ सकता है।
- मुख्यमंत्री ने हिंदू समुदाय पर हमलों की चिंता जताई।
- सुरक्षा एजेंसियों को स्थिति पर नजर रखनी चाहिए।
- जिहादी तत्व असम में सक्रिय हो सकते हैं।
- क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखना आवश्यक है।
गुवाहाटी, 7 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बुधवार को बांग्लादेश में तेजी से बदलती स्थिति को लेकर चेतावनी दी और कहा कि वहां की बढ़ती अस्थिरता और हिंसा के घटनाक्रम असम की संवेदनशील भौगोलिक और भू-राजनीतिक स्थिति के कारण गंभीर परिणाम पैदा कर सकते हैं।
पत्रकारों से बात करते हुए सरमा ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सीमा पर हो रहे घटनाक्रमों को अलग-थलग करके नहीं देखा जा सकता, विशेषकर ऐसे समय में जब हिंसा और असुरक्षा बढ़ती दिख रही हैं। उन्होंने बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर बढ़ते हमलों की खबरों पर चिंता व्यक्त की और क्षेत्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से स्थिति को बेहद चिंताजनक बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा, "बांग्लादेश में जो कुछ भी हो रहा है, वह हमारे लिए गंभीर चिंता का विषय है। खबरों के मुताबिक, हिंदुओं पर अत्याचार और उत्पीड़न बढ़ रहा है, और ऐसे घटनाक्रमों का असर असम पर भी पड़ सकता है।"
पड़ोसी देश में हाल ही में हुए राजनीतिक और सामाजिक घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए सरमा ने कहा कि हाल के हफ्तों में अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ भीड़ हिंसा और लक्षित हमलों की घटनाएं तेज हो गई हैं।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि असम सरकार और सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क रहना चाहिए और राज्य में किसी भी तरह के दुष्प्रभाव को रोकने के लिए स्थिति पर लगातार नजर रखनी चाहिए। उन्होंने कहा, "इस समय हमें सतर्क रहना होगा और सीमा पार के घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रखनी होगी। साथ ही, बांग्लादेश में हिंदू समाज को नैतिक समर्थन और आश्वासन देना भी महत्वपूर्ण है।"
2022 की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार, बांग्लादेश में लगभग 13.13 मिलियन हिंदू रहते हैं, जो देश की जनसंख्या का लगभग आठ प्रतिशत हैं।
बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा को लेकर क्षेत्र में बढ़ती चिंता के बीच सरमा की ये टिप्पणियां आई हैं।
मुख्यमंत्री ने असम के भीतर आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों का भी मुद्दा उठाया और दावा किया कि चरमपंथी तत्व लगातार खतरा बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों ने पिछले एक दशक में इस तरह की गतिविधियों के कई सबूत जुटाए हैं।
सरमा ने कहा कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि असम में जिहादी तत्व मौजूद रहे हैं, और हमें इसके बार-बार सबूत मिले हैं। कुछ तत्व अभी भी स्लीपर सेल के रूप में छिपे हुए हो सकते हैं।
असम की रणनीतिक और संवेदनशील स्थिति पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य को लंबे समय से सीमा पार और आंतरिक सुरक्षा संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए निरंतर सतर्कता, मजबूत खुफिया नेटवर्क और सक्रिय सुरक्षा उपाय अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।