8 अक्टूबर 2026
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असम के सोनितपुर में 20,000 एलपीडी दूध प्रोसेसिंग प्लांट शुरू, सीएम सरमा बोले — किसानों की आय बढ़ेगी

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असम के सोनितपुर में 20,000 एलपीडी दूध प्रोसेसिंग प्लांट शुरू, सीएम सरमा बोले — किसानों की आय बढ़ेगी

सारांश

असम के शोणितपुर में 20,000 एलपीडी दूध प्रोसेसिंग प्लांट शुरू हुआ — सीएम सरमा का कहना है कि इससे स्थानीय कोऑपरेटिव किसानों को पक्का बाज़ार मिलेगा और ब्रह्मपुत्र के उत्तरी किनारे पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई रफ़्तार मिलेगी। यह राज्य के 10 लाख एलपीडी दूध उत्पादन लक्ष्य की दिशा में अहम कदम है।

मुख्य बातें

असम के शोणितपुर में 20,000 लीटर प्रति दिन क्षमता वाला दूध प्रोसेसिंग प्लांट 8 अक्टूबर 2026 को शुरू हुआ।
प्लांट में प्रोसेसिंग के लिए दूध पूरी तरह स्थानीय डेयरी कोऑपरेटिव सोसायटियों के किसानों से खरीदा जाएगा।
सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा — इससे किसानों को पक्का बाज़ार और बेहतर आमदनी मिलेगी।
सरकार का लक्ष्य राज्य में दूध उत्पादन को 10 लाख लीटर प्रति दिन तक पहुँचाना है।
CMAA और MMUA योजनाओं के ज़रिये युवाओं और महिलाओं को डेयरी फार्मिंग से जोड़ा जा रहा है।
कोऑपरेटिव नेटवर्क को मज़बूत करने के लिए दूध कोऑपरेटिव सोसायटियों का डिजिटल रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 8 अक्टूबर 2026 को घोषणा की कि शोणितपुर में 20,000 लीटर प्रति दिन (एलपीडी) क्षमता वाला नया दूध प्रोसेसिंग प्लांट शुरू हो गया है, जिससे राज्य के डेयरी क्षेत्र को नई गति मिलेगी। इस प्लांट में प्रोसेस किया जाने वाला सारा दूध स्थानीय डेयरी कोऑपरेटिव सोसायटियों से जुड़े किसानों से सीधे खरीदा जाएगा। मुख्यमंत्री ने इसे राज्य में दूध उत्पादन को 10 लाख लीटर प्रति दिन तक पहुँचाने के दीर्घकालिक लक्ष्य की दिशा में एक अहम पड़ाव बताया।

प्लांट की मुख्य विशेषताएँ

शोणितपुर में स्थापित यह प्रोसेसिंग सुविधा प्रतिदिन 20,000 लीटर दूध की प्रोसेसिंग करने में सक्षम है। ब्रह्मपुत्र के उत्तरी किनारे पर स्थित यह प्लांट क्षेत्र के कोऑपरेटिव सोसायटियों से जुड़े किसानों के लिए एक भरोसेमंद और स्थायी बाज़ार उपलब्ध कराएगा। सीएम सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, "इससे उनकी आमदनी बढ़ेगी, उन्हें एक पक्का बाजार मिलेगा और ब्रह्मपुत्र के उत्तरी किनारे पर कई सहायक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।"

सरकार की व्यापक डेयरी नीति

यह प्लांट असम सरकार की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जो डेयरी क्षेत्र को संगठित और सशक्त बनाने पर केंद्रित है। सरकार किसानों को दूध पर सीधी सब्सिडी सहायता दे रही है और दूध कोऑपरेटिव सोसायटियों का डिजिटल रजिस्ट्रेशन कर कोऑपरेटिव नेटवर्क को मज़बूत बनाने की कोशिश कर रही है। मुख्यमंत्री सरमा ने इस पहल को 'मेड इन असम' उत्पादों को बढ़ावा देने और डेयरी किसानों की आजीविका सुदृढ़ करने से जोड़ा।

युवाओं और महिलाओं पर ज़ोर

सरकार 'मुख्यमंत्री आत्मनिर्भर असम अभियान' (CMAA) और 'मुख्यमंत्री महिला उद्यमिता अभियान' (MMUA) जैसी योजनाओं के ज़रिये युवाओं और महिलाओं को डेयरी फार्मिंग से जोड़ने की दिशा में काम कर रही है। गौरतलब है कि ये दोनों योजनाएँ ग्रामीण स्वरोज़गार को बढ़ावा देने के व्यापक ढाँचे का हिस्सा हैं।

आम जनता और अर्थव्यवस्था पर असर

विशेषज्ञों का मानना है कि दूध की खरीद, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग का बुनियादी ढाँचा मज़बूत होने से न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि पशुपालन सेवाएँ, परिवहन और ग्रामीण उद्योग जैसी सहायक गतिविधियाँ भी फलेंगी। यह ऐसे समय में आया है जब असम सरकार कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को संगठित क्षेत्र से जोड़ने पर बल दे रही है।

आगे क्या होगा

मुख्यमंत्री सरमा के अनुसार, सरकार का अगला लक्ष्य असम में दूध उत्पादन को 10 लाख लीटर प्रति दिन तक ले जाना है। शोणितपुर प्लांट इस दिशा में डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार करने और नॉर्थ बैंक क्षेत्र में एक समृद्ध डेयरी इकोसिस्टम तैयार करने की कोशिश की एक कड़ी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या कोऑपरेटिव नेटवर्क वास्तव में उस किसान तक पहुँचता है जो अभी असंगठित बाज़ार पर निर्भर है। असम में डेयरी सेक्टर में पिछले कई वर्षों से बुनियादी ढाँचे के वादे होते रहे हैं, लेकिन कोऑपरेटिव की पहुँच और खरीद की नियमितता अक्सर सवालों के घेरे में रही है। 10 लाख एलपीडी का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है, पर इसके लिए केवल प्रोसेसिंग क्षमता नहीं — पशु नस्ल सुधार, पशु चिकित्सा सेवाओं और कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर में समानांतर निवेश ज़रूरी है, जिसका विस्तृत रोडमैप अभी सामने नहीं आया है।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोनितपुर में शुरू हुए दूध प्रोसेसिंग प्लांट की क्षमता कितनी है?
शोणितपुर में शुरू हुए इस प्लांट की क्षमता 20,000 लीटर प्रति दिन (एलपीडी) है। प्लांट में प्रोसेस किया जाने वाला दूध पूरी तरह स्थानीय डेयरी कोऑपरेटिव सोसायटियों से जुड़े किसानों से खरीदा जाएगा।
असम सरकार का दूध उत्पादन को लेकर क्या लक्ष्य है?
असम सरकार का लक्ष्य राज्य में दूध उत्पादन को 10 लाख लीटर प्रति दिन तक पहुँचाना है। सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने शोणितपुर प्लांट को इस लक्ष्य की दिशा में एक अहम कदम बताया है।
इस प्लांट से डेयरी किसानों को कैसे फ़ायदा होगा?
प्लांट के शुरू होने से स्थानीय कोऑपरेटिव सोसायटियों के किसानों को एक स्थायी और भरोसेमंद बाज़ार मिलेगा, जिससे उनकी आमदनी बढ़ेगी। इसके साथ ही पशुपालन सेवाएँ, परिवहन और अन्य ग्रामीण उद्योगों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
सरकार डेयरी सेक्टर को मज़बूत करने के लिए और क्या कदम उठा रही है?
सरकार किसानों को दूध पर सीधी सब्सिडी दे रही है और कोऑपरेटिव सोसायटियों का डिजिटल रजिस्ट्रेशन कर नेटवर्क को संगठित कर रही है। इसके अलावा 'मुख्यमंत्री आत्मनिर्भर असम अभियान' (CMAA) और 'मुख्यमंत्री महिला उद्यमिता अभियान' (MMUA) के ज़रिये युवाओं और महिलाओं को डेयरी फार्मिंग से जोड़ा जा रहा है।
यह पहल 'मेड इन असम' से कैसे जुड़ी है?
सीएम सरमा ने शोणितपुर प्लांट को 'मेड इन असम' उत्पादों को बढ़ावा देने की नीति का हिस्सा बताया है। स्थानीय किसानों से दूध खरीदकर प्रोसेस करना और उसे बाज़ार में उतारना इस नीति के तहत राज्य के भीतर ही मूल्य संवर्धन की कोशिश है।
राष्ट्र प्रेस
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