असम में डेयरी क्रांति: हिमंता सरमा का रोज़ाना 10 लाख लीटर दूध उत्पादन का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 30 अक्टूबर 2026 को घोषणा की कि राज्य सरकार डेयरी क्षेत्र को व्यापक रूप से मज़बूत करने की योजना पर काम कर रही है, जिसका मुख्य लक्ष्य प्रतिदिन 10 लाख लीटर दूध उत्पादन हासिल करना है। इस पहल के तहत डेयरी किसानों को सीधी सब्सिडी दी जाएगी और गुवाहाटी सहित पूरे असम में प्रसंस्करण बुनियादी ढाँचे का विस्तार किया जाएगा।
मुख्यमंत्री की घोषणा और लक्ष्य
मुख्यमंत्री सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, 'एक मज़बूत डेयरी क्षेत्र से पोषण में सुधार होगा, किसानों की आजीविका सुरक्षित होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था अधिक मज़बूत बनेगी।' उन्होंने इन पहलों को 'आत्मनिर्भर असम' बनाने की राज्य सरकार की व्यापक रणनीति का अभिन्न हिस्सा बताया।
सरमा के अनुसार, असम में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता फ़िलहाल राष्ट्रीय औसत से कम है, जिसके कारण उत्पादन बढ़ाने और डेयरी सप्लाई चेन को दुरुस्त करने की तत्काल आवश्यकता है।
प्रसंस्करण बुनियादी ढाँचे का विस्तार
राज्य सरकार पूरे असम में बड़े डेयरी प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित करने की योजना बना रही है। इन सुविधाओं से दूध की प्रसंस्करण क्षमता मज़बूत होगी, रखरखाव में सुधार आएगा और संगठित डेयरी क्षेत्र को नई गति मिलेगी।
घोषणा के अनुसार, सोनितपुर ज़िले में 20,000 लीटर प्रतिदिन की क्षमता वाला एक नया मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट पहले से शुरू हो चुका है। यह संयंत्र राज्य के प्रसंस्करण नेटवर्क की नींव को मज़बूत करेगा और प्रोसेस्ड दूध की उपलब्धता में इज़ाफ़ा करेगा।
किसानों के लिए सीधी सब्सिडी और आय का अवसर
सरकार डेयरी गतिविधियों को प्रोत्साहन देने के लिए किसानों को दूध पर सीधी सब्सिडी प्रदान कर रही है। इसका उद्देश्य डेयरी फार्मिंग में आम लोगों की भागीदारी बढ़ाना और किसान परिवारों के लिए आय का एक वैकल्पिक स्रोत तैयार करना है।
गौरतलब है कि यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब असम स्थानीय दूध की माँग और उत्पादन के बीच की खाई को पाटने की कोशिश कर रहा है। दूध संग्रहण, प्रसंस्करण और वितरण नेटवर्क को एक साथ मज़बूत किए बिना 10 लाख लीटर के लक्ष्य तक पहुँचना कठिन होगा।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पोषण पर असर
विशेषज्ञों के अनुसार, डेयरी क्षेत्र में निरंतर विस्तार से ग्रामीण रोज़गार सृजन में उल्लेखनीय मदद मिल सकती है। यह योजना केवल दूध उत्पादन तक सीमित नहीं है — इसके तहत किसानों को बेहतर बाज़ार तक पहुँच, प्रोसेस्ड उत्पादों की उपलब्धता और पोषण सुरक्षा भी सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है।
मुख्यमंत्री सरमा ने स्पष्ट किया कि इन कदमों से 'आत्मनिर्भर असम' की नींव मज़बूत होगी — बेहतर पोषण, किसानों की सशक्त आजीविका और एक अधिक जीवंत ग्रामीण अर्थव्यवस्था इसके तीन प्रमुख स्तंभ हैं।
क्या होगा आगे
राज्य सरकार के अनुसार, दूध कलेक्शन से लेकर अंतिम उपभोक्ता तक की पूरी सप्लाई चेन को उन्नत करना प्राथमिकता में है। सोनितपुर के बाद अन्य ज़िलों में भी प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित किए जाने की उम्मीद है, हालाँकि इसकी विस्तृत समयसीमा अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।