असम में युवा पलायन रोकने की कोशिश: हिमंता सरमा बोले — निवेश और उद्योग ही एकमात्र रास्ता
सारांश
मुख्य बातें
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट किया कि उनकी सरकार राज्य से युवाओं के पलायन को रोकने के लिए निवेश आकर्षण, औद्योगिक विस्तार और स्थानीय रोज़गार सृजन की त्रिस्तरीय रणनीति पर काम कर रही है। गुवाहाटी में दिए गए अपने बयान में सरमा ने स्वीकार किया कि पर्याप्त उद्योग और नौकरियों के अभाव में असम के युवा राज्य छोड़ने को मजबूर होते रहे हैं।
पलायन की मूल वजह
सरमा के अनुसार, अपर्याप्त निवेश और उद्योगों की कमी असम में युवा पलायन के प्रमुख कारण हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से रोज़गार का मुख्य स्रोत रहा है, लेकिन यह एक बड़ी और लगातार बढ़ती युवा आबादी की ज़रूरतों को पूरा करने में सक्षम नहीं है।
उन्होंने यह भी बताया कि कोविड-19 महामारी के दौरान असम के छात्रों और युवाओं को घर से सैकड़ों किलोमीटर दूर रहकर काम करते देखने का अनुभव उनके लिए निर्णायक मोड़ बना और इसने इस समस्या के समाधान के प्रति उनके संकल्प को और गहरा किया। उन्होंने कहा कि ऐसे कई युवा आज भी बाहर रहकर काम करने पर मजबूर हैं।
सरकार का दृष्टिकोण
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार की नीति दोहरी है — एक ओर असम के युवाओं को राज्य के भीतर ही रोज़गार के अवसर उपलब्ध कराना, और दूसरी ओर देश-विदेश से कुशल पेशेवरों और प्रतिभाशाली लोगों को राज्य में आकर्षित करना। सरमा ने निवेश की अनुकूल परिस्थितियों को बेहतर कानून-व्यवस्था से जोड़ते हुए कहा कि शांति समझौतों और राज्य में बढ़ती स्थिरता ने औद्योगिक विकास को रफ्तार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
दीमा हसाओ में सीमेंट संयंत्र का शिलान्यास
निवेश को कार्यान्वयन तक पहुँचाने के उदाहरण के रूप में सरमा ने दीमा हसाओ में शुक्रवार को हुए एक एकीकृत सीमेंट संयंत्र के शिलान्यास समारोह का ज़िक्र किया। इस परियोजना के पहले चरण में ₹1,800 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है और इससे 1,000 नए रोज़गार सृजित होने की उम्मीद है।
उन्होंने बताया कि संबंधित सीमेंट उत्पादक कंपनी ने असम में कुल मिलाकर लगभग ₹11,000 करोड़ के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है, जिसके बाद दूसरे चरण की शुरुआत होने की उम्मीद है। यह परियोजना दीमा हसाओ जैसे पहाड़ी और आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण ज़िले के लिए विशेष महत्व रखती है।
एडवांटेज असम 2.0 की प्रगति
सरमा ने दावा किया कि एडवांटेज असम 2.0 पहल के तहत हस्ताक्षरित अधिकांश समझौता ज्ञापनों (MoU) को ज़मीन पर लागू किया जा चुका है। गौरतलब है कि अक्सर निवेश सम्मेलनों में बड़े-बड़े MoU हस्ताक्षर होते हैं, लेकिन उनका क्रियान्वयन सीमित रहता है — इस पृष्ठभूमि में सरकार का यह दावा महत्वपूर्ण है, हालाँकि स्वतंत्र सत्यापन अभी लंबित है।
यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर के कई राज्य युवा पलायन की साझा चुनौती से जूझ रहे हैं और केंद्र सरकार की 'एक्ट ईस्ट नीति' के तहत इस क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के प्रयास जारी हैं। असम की सफलता या विफलता इस पूरे क्षेत्र के लिए एक मिसाल बन सकती है।