30 अक्टूबर 2026
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असम में युवा पलायन रोकने की कोशिश: हिमंता सरमा बोले — निवेश और उद्योग ही एकमात्र रास्ता

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असम में युवा पलायन रोकने की कोशिश: हिमंता सरमा बोले — निवेश और उद्योग ही एकमात्र रास्ता

सारांश

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने युवा पलायन की समस्या को सीधे स्वीकारते हुए निवेश और उद्योग को एकमात्र दीर्घकालिक समाधान बताया। दीमा हसाओ में ₹1,800 करोड़ के सीमेंट संयंत्र का शिलान्यास इस रणनीति की पहली ठोस कड़ी है — सवाल यह है कि MoU से ज़मीनी रोज़गार तक का सफर कितना तेज़ होगा।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 30 अक्टूबर 2026 को असम में युवा पलायन रोकने के लिए निवेश व औद्योगिक विस्तार को केंद्रीय रणनीति बताया।
दीमा हसाओ में एकीकृत सीमेंट संयंत्र के पहले चरण में ₹1,800 करोड़ का निवेश; 1,000 रोज़गार सृजित होने की उम्मीद।
सीमेंट कंपनी ने असम में कुल ₹11,000 करोड़ के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है।
सरमा ने कोविड-19 महामारी को पलायन समस्या से निपटने के संकल्प का निर्णायक मोड़ बताया।
एडवांटेज असम 2.0 के अधिकांश MoU लागू होने का दावा; शांति समझौतों को निवेश-अनुकूल माहौल से जोड़ा।

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट किया कि उनकी सरकार राज्य से युवाओं के पलायन को रोकने के लिए निवेश आकर्षण, औद्योगिक विस्तार और स्थानीय रोज़गार सृजन की त्रिस्तरीय रणनीति पर काम कर रही है। गुवाहाटी में दिए गए अपने बयान में सरमा ने स्वीकार किया कि पर्याप्त उद्योग और नौकरियों के अभाव में असम के युवा राज्य छोड़ने को मजबूर होते रहे हैं।

पलायन की मूल वजह

सरमा के अनुसार, अपर्याप्त निवेश और उद्योगों की कमी असम में युवा पलायन के प्रमुख कारण हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से रोज़गार का मुख्य स्रोत रहा है, लेकिन यह एक बड़ी और लगातार बढ़ती युवा आबादी की ज़रूरतों को पूरा करने में सक्षम नहीं है।

उन्होंने यह भी बताया कि कोविड-19 महामारी के दौरान असम के छात्रों और युवाओं को घर से सैकड़ों किलोमीटर दूर रहकर काम करते देखने का अनुभव उनके लिए निर्णायक मोड़ बना और इसने इस समस्या के समाधान के प्रति उनके संकल्प को और गहरा किया। उन्होंने कहा कि ऐसे कई युवा आज भी बाहर रहकर काम करने पर मजबूर हैं।

सरकार का दृष्टिकोण

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार की नीति दोहरी है — एक ओर असम के युवाओं को राज्य के भीतर ही रोज़गार के अवसर उपलब्ध कराना, और दूसरी ओर देश-विदेश से कुशल पेशेवरों और प्रतिभाशाली लोगों को राज्य में आकर्षित करना। सरमा ने निवेश की अनुकूल परिस्थितियों को बेहतर कानून-व्यवस्था से जोड़ते हुए कहा कि शांति समझौतों और राज्य में बढ़ती स्थिरता ने औद्योगिक विकास को रफ्तार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

दीमा हसाओ में सीमेंट संयंत्र का शिलान्यास

निवेश को कार्यान्वयन तक पहुँचाने के उदाहरण के रूप में सरमा ने दीमा हसाओ में शुक्रवार को हुए एक एकीकृत सीमेंट संयंत्र के शिलान्यास समारोह का ज़िक्र किया। इस परियोजना के पहले चरण में ₹1,800 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है और इससे 1,000 नए रोज़गार सृजित होने की उम्मीद है।

उन्होंने बताया कि संबंधित सीमेंट उत्पादक कंपनी ने असम में कुल मिलाकर लगभग ₹11,000 करोड़ के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है, जिसके बाद दूसरे चरण की शुरुआत होने की उम्मीद है। यह परियोजना दीमा हसाओ जैसे पहाड़ी और आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण ज़िले के लिए विशेष महत्व रखती है।

एडवांटेज असम 2.0 की प्रगति

सरमा ने दावा किया कि एडवांटेज असम 2.0 पहल के तहत हस्ताक्षरित अधिकांश समझौता ज्ञापनों (MoU) को ज़मीन पर लागू किया जा चुका है। गौरतलब है कि अक्सर निवेश सम्मेलनों में बड़े-बड़े MoU हस्ताक्षर होते हैं, लेकिन उनका क्रियान्वयन सीमित रहता है — इस पृष्ठभूमि में सरकार का यह दावा महत्वपूर्ण है, हालाँकि स्वतंत्र सत्यापन अभी लंबित है।

यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर के कई राज्य युवा पलायन की साझा चुनौती से जूझ रहे हैं और केंद्र सरकार की 'एक्ट ईस्ट नीति' के तहत इस क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के प्रयास जारी हैं। असम की सफलता या विफलता इस पूरे क्षेत्र के लिए एक मिसाल बन सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह खुद मुख्यमंत्री के शब्दों से ज़ाहिर होता है। लेकिन असली परीक्षा MoU से नौकरी तक की यात्रा की गति है; पूर्वोत्तर में निवेश सम्मेलनों और ज़मीनी क्रियान्वयन के बीच की खाई ऐतिहासिक रूप से चौड़ी रही है। दीमा हसाओ जैसे संघर्षरहित पहाड़ी ज़िले में ₹11,000 करोड़ की प्रतिबद्धता उत्साहजनक है, किंतु 'अधिकांश MoU लागू' का दावा बिना स्वतंत्र सत्यापन के अधूरा है। युवा पलायन केवल नीतिगत नहीं, बल्कि सामाजिक संरचना की भी समस्या है — निवेश के साथ-साथ कौशल विकास और स्थानीय उद्यमिता के बिना यह रणनीति एकांगी रह सकती है।
RashtraPress
30 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम में युवा पलायन की समस्या क्या है?
असम में पर्याप्त उद्योग और रोज़गार के अवसर न होने के कारण बड़ी संख्या में युवा राज्य छोड़कर अन्य राज्यों या देशों में काम करने जाते हैं। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के अनुसार, सरकारी क्षेत्र की सीमित क्षमता इस समस्या को और गहरा करती है।
हिमंता सरमा सरकार इस पलायन को रोकने के लिए क्या कर रही है?
सरकार निवेश आकर्षण, औद्योगिक विस्तार और राज्य के भीतर रोज़गार सृजन की रणनीति अपना रही है। एडवांटेज असम 2.0 पहल के तहत MoU क्रियान्वयन और दीमा हसाओ में ₹1,800 करोड़ के सीमेंट संयंत्र का शिलान्यास इस दिशा में ठोस कदम बताए जा रहे हैं।
दीमा हसाओ सीमेंट संयंत्र से कितने रोज़गार मिलेंगे?
पहले चरण में ₹1,800 करोड़ के निवेश से लगभग 1,000 रोज़गार सृजित होने की उम्मीद है। संबंधित कंपनी ने असम में कुल ₹11,000 करोड़ के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है, जिसके बाद दूसरे चरण की शुरुआत होगी।
एडवांटेज असम 2.0 क्या है?
एडवांटेज असम 2.0 असम सरकार की एक निवेश प्रोत्साहन पहल है, जिसके तहत देश-विदेश की कंपनियों के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) हस्ताक्षरित किए गए हैं। मुख्यमंत्री सरमा ने दावा किया है कि इनमें से अधिकांश MoU को ज़मीन पर लागू किया जा चुका है।
क्या शांति समझौतों का असम के निवेश पर असर पड़ा है?
मुख्यमंत्री सरमा के अनुसार, राज्य में शांति समझौतों और बढ़ती स्थिरता ने निवेश के अनुकूल माहौल बनाने में सीधा योगदान दिया है। उन्होंने बेहतर सुरक्षा स्थिति को औद्योगिक विकास की पूर्वशर्त के रूप में रेखांकित किया।
राष्ट्र प्रेस
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