आत्मनिर्भर पंचायत वर्कशॉप: विवेक भारद्वाज बोले — स्थानीय परियोजनाओं से आय सृजन कर बनें आत्मनिर्भर
सारांश
मुख्य बातें
पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज ने 9 जून 2026 को गांधीनगर में आयोजित 'आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम' वर्कशॉप में स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'आत्मनिर्भर भारत' के विजन को ज़मीनी स्तर तक ले जाने के लिए पंचायतों को अब स्थानीय परियोजनाओं के माध्यम से स्वयं के आय-स्रोत विकसित करने होंगे। उन्होंने कहा कि इस दिशा में पंचायती राज मंत्रालय द्वारा आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा।
कार्यक्रम का स्वरूप और उद्देश्य
केंद्र सरकार के पंचायती राज मंत्रालय द्वारा गांधीनगर स्थित होटल लीला में एक दिवसीय राज्य स्तरीय आउटरीच वर्कशॉप का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में गुजरात के पंचायत विभाग के प्रधान सचिव धनंजय द्विवेदी, अपर विकास आयुक्त डॉ. गौरव दहिया, नाबार्ड के क्षेत्रीय प्रबंधक डॉ. प्रदीप, हडको के अधिकारी विमल कुमार शर्मा और पंचायती राज मंत्रालय की संयुक्त सचिव श्रीमती मुक्ता शेखर सहित जिला एवं तहसील स्तर के अनेक अधिकारी उपस्थित रहे। वर्कशॉप हाइब्रिड मोड में आयोजित हुई, जिसमें राज्यभर की ग्राम एवं तहसील पंचायतों के पदाधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।
भारद्वाज का संदेश: इतिहास से प्रेरणा, भविष्य की दिशा
भारद्वाज ने स्वतंत्रता के बाद के भारत का उल्लेख करते हुए कहा कि देश ने विभाजन, युद्ध, अकाल और अनाज की कमी जैसी विकट परिस्थितियों में विदेशी सहायता पर निर्भरता से शुरुआत की थी। उन्होंने बताया कि 2003 में भारत ने अधिकांश विदेशी सहायता लेना बंद किया और अफ्रीकी देशों का ऋण भी माफ किया। कोरोना महामारी के दौरान 'वैक्सीन मैत्री' अभियान के तहत लगभग 96 देशों को करोड़ों वैक्सीन डोज़ भेजना इसी आत्मनिर्भरता की परिणति थी। उन्होंने इंडियन स्टैंडर्ड टाइम रेखा, कर्कवृत्त, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी और समुद्र तट जैसे स्थानों का उदाहरण देते हुए कहा कि उचित आयोजन और नवीन सोच से पर्यटन एवं अन्य गतिविधियों द्वारा पंचायतें बड़ी आय और रोज़गार सृजित कर सकती हैं।
गुजरात की 71 पंचायतें चयनित, लक्ष्य 14,650
प्रधान सचिव धनंजय द्विवेदी ने बताया कि केंद्र के 'आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम' के प्रारंभिक मानदंडों — ग्राम पंचायत की न्यूनतम आय ₹50 लाख और तहसील की ₹1 करोड़ — के आधार पर गुजरात की 71 पंचायतें चयनित हुई हैं। परंतु उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल शुरुआत है; मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में गुजरात की सभी 14,650 ग्राम पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाना अंतिम लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि यदि कोई पंचायत आज ₹49 लाख या ₹95 लाख पर है, तो कुछ अतिरिक्त प्रयासों से वह भी यह सीमा पार कर सकती है।
नाबार्ड और हडको की भूमिका
नाबार्ड के क्षेत्रीय प्रबंधक डॉ. प्रदीप ने बताया कि संस्थान ग्राम हाट, फ़िल्टर्ड पेयजल सुविधा, कृषि उत्पादों का संग्रह व प्रसंस्करण, छोटे उद्योग, गोदाम निर्माण और कमोडिटी-आधारित व्यवसाय जैसे मॉडलों के लिए डीपीआर तैयार कर रहा है। हडको के अधिकारी विमल कुमार शर्मा ने कहा कि हडको ग्राम पंचायतों को प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने, तकनीकी व्यावहारिकता जाँचने और वित्तीय संस्थानों से फंडिंग दिलाने में पूर्ण सहयोग देगा। इसके अलावा, पंचायत अधिकारियों के लिए तकनीकी, वित्तीय और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
आगे की राह
वर्कशॉप में 'आत्मनिर्भर पंचायत पोर्टल' का लाइव प्रदर्शन किया गया और प्रश्नोत्तरी सत्र में प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया। द्विवेदी ने कहा कि 2047 में जब भारत अपनी स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूर्ण करेगा, तब प्रत्येक सरपंच और पंचायत अधिकारी गर्व से कह सके कि राष्ट्र निर्माण में उनके गाँव का भी योगदान रहा — यही इस पहल की असली भावना है।