अयोध्या में रामलला का दिव्य 'सूर्य तिलक', श्रद्धालुओं में उल्लास की लहर

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अयोध्या में रामलला का दिव्य 'सूर्य तिलक', श्रद्धालुओं में उल्लास की लहर

सारांश

अयोध्या में रामनवमी पर भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव का आयोजन अद्भुत रहा। अभिजीत मुहूर्त में रामलला के ललाट पर 'सूर्य तिलक' ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। जानें इस खास अवसर की भव्यता और तकनीकी पहलुओं के बारे में।

मुख्य बातें

रामनवमी पर विशेष पूजा और तिलक का आयोजन सूर्य की किरणों का वैज्ञानिक उपयोग 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग श्रद्धालुओं की भारी भीड़ अभिजीत मुहूर्त का महत्व

अयोध्या, 27 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। रामनगरी अयोध्या में स्थित राम जन्मभूमि मंदिर में रामनवमी के शुभ अवसर पर शुक्रवार को भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव का एक भव्य और अलौकिक आयोजन किया गया। दोपहर ठीक 12 बजे, अभिजीत मुहूर्त में सूर्य की किरणों ने रामलला के ललाट पर ‘सूर्य तिलक’ किया, जिससे पूरा मंदिर परिसर दिव्य आभा से आलोकित हो उठा और श्रद्धालु भावविभोर हो गए।

रामनवमी के इस विशेष अनुष्ठान में, सूर्य की किरणें वैज्ञानिक तकनीक के माध्यम से सीधे गर्भगृह तक पहुंचाई गईं और लगभग नौ मिनट तक रामलला के ललाट पर केंद्रित रहीं। इसे भगवान राम के जन्म क्षण का प्रतीकात्मक पुनर्सृजन माना गया। प्राण-प्रतिष्ठा के बाद यह दूसरा अवसर है जब रामलला का सूर्य तिलक संपन्न हुआ।

जानकारी के अनुसार, इस दौरान गर्भगृह में 14 पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विशेष पूजा-अर्चना और पंचामृत अभिषेक किया। इसके पश्चात आरती की गई और भगवान को स्वर्ण जड़ित पीतांबर, मुकुट व आभूषणों से सजाया गया। जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में रामलला को 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग भी अर्पित किया गया। मंदिर ट्रस्ट के अनुसार, सूर्य तिलक के लिए अष्टधातु के पाइप, लेंस और दर्पणों से युक्त करीब 65 फीट लंबी विशेष प्रणाली तैयार की गई है। इसके जरिए सूर्य की किरणों को परावर्तित कर सटीक कोण पर रामलला के मस्तक तक पहुंचाया गया, जिससे लगभग 75 मिमी आकार का तिलक बना।

इससे पहले लगातार तीन दिनों तक इस प्रक्रिया का सफल ट्रायल किया गया था, ताकि निर्धारित समय पर सटीकता के साथ सूर्य तिलक संपन्न कराया जा सके। रामनवमी के अवसर पर अयोध्या में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। राम पथ, भक्ति पथ और जन्मभूमि पथ पर लंबी कतारें देखी गईं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जगह-जगह एलईडी स्क्रीन लगाई गईं, जिनके माध्यम से जन्मोत्सव के प्रत्येक क्षण का सीधा प्रसारण किया गया।

मंदिर प्रशासन ने इस अवसर पर दर्शन का समय भी बढ़ाकर सुबह 5 बजे से रात 11 बजे तक कर दिया, जिससे श्रद्धालु अधिक समय तक दर्शन कर सकें। धार्मिक दृष्टि से भी इस बार की रामनवमी अत्यंत विशेष मानी जा रही है, क्योंकि रवि योग और सर्वार्थसिद्धि योग का दुर्लभ संयोग बना है, जिसने इस पर्व के महत्व को और अधिक बढ़ा दिया है। पूरे आयोजन के दौरान अयोध्या नगरी भक्ति, उल्लास और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर नजर आई। साधु-संत, श्रद्धालु और ट्रस्ट से जुड़े लोग भजन-कीर्तन और उत्सव में झूमते दिखाई दिए, जिससे रामनवमी का यह पर्व अपने चरम उल्लास पर पहुंच गया।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह तकनीकी नवाचारों को भी दर्शाता है। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ने इस घटना के प्रति लोगों की आस्था को स्पष्ट किया है, जिससे अयोध्या की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत और भी मजबूत हुई है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रामलला का सूर्य तिलक कैसे किया गया?
सूर्य की किरणों को वैज्ञानिक तकनीक के माध्यम से गर्भगृह तक पहुंचाया गया और रामलला के ललाट पर तिलक किया गया।
इस बार की रामनवमी में कितने पुजारियों ने पूजा की?
गर्भगृह में 14 पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विशेष पूजा-अर्चना की।
रामलला को किस प्रकार का भोग अर्पित किया गया?
रामलला को 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग अर्पित किया गया।
अभिजीत मुहूर्त का क्या महत्व है?
अभिजीत मुहूर्त का समय विशेष रूप से शुभ माना जाता है, जब महत्वपूर्ण धार्मिक कार्य किए जाते हैं।
इस आयोजन का तकनीकी पहलू क्या था?
सूर्य तिलक के लिए 65 फीट लंबी विशेष प्रणाली तैयार की गई थी, जो कि अष्टधातु के पाइप और लेंस से युक्त थी।
राष्ट्र प्रेस