बागेश्वर बाबा के शिवाजी महाराज पर विवादित दावे के बाद CM फडणवीस ने किया खंडन, विपक्ष ने मांगी गिरफ्तारी
सारांश
Key Takeaways
- बागेश्वर बाबा धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने नागपुर में दावा किया कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने अपना राजमुकुट समर्थ रामदास स्वामी को सौंपने की पेशकश की थी।
- यह बयान उस मंच पर दिया गया जहाँ CM देवेंद्र फडणवीस, नितिन गडकरी और RSS प्रमुख मोहन भागवत उपस्थित थे।
- मुख्यमंत्री फडणवीस ने बयान को ऐतिहासिक रूप से निराधार बताया और कहा कि लिखित इतिहास में इसका कोई प्रमाण नहीं है।
- कांग्रेस ने बागेश्वर बाबा की गिरफ्तारी की मांग की; NCP (शरद पवार गुट) ने महाराष्ट्र में उन पर प्रतिबंध लगाने की माँग उठाई।
- 17वीं सदी के ऐतिहासिक दस्तावेज़ों में शिवाजी महाराज और रामदास स्वामी के बीच सिंहासन हस्तांतरण जैसी किसी घटना का उल्लेख नहीं है।
- महायुति सरकार 'डैमेज-कंट्रोल' मोड में है और धार्मिक कार्यक्रम का बचाव करते हुए शास्त्री के बयान से खुद को अलग दिखाने की कोशिश कर रही है।
मुंबई, 25 अप्रैल — धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री उर्फ 'बागेश्वर बाबा' के एक विवादित दावे ने पूरे महाराष्ट्र में राजनीतिक भूचाल ला दिया है। उन्होंने नागपुर में एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज लगातार युद्धों से थककर समर्थ रामदास स्वामी के पास गए और अपना राजमुकुट उनके चरणों में रखकर राज्य का शासन उन्हें सौंपने का आग्रह किया। इस बयान पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट रूप से कहा कि इसका कोई ऐतिहासिक आधार नहीं है।
विवाद की पृष्ठभूमि और कार्यक्रम का संदर्भ
यह कार्यक्रम शुक्रवार को नागपुर में आयोजित हुआ था, जहाँ मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत भी मंच पर उपस्थित थे। बागेश्वर बाबा ने इसी मंच से यह दावा किया, जिसके बाद विपक्ष ने सत्ताधारी महायुति गठबंधन पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया।
इसके अलावा धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने हिंदुओं को चार बच्चे पैदा करने की सलाह दी और सुझाव दिया कि उनमें से एक को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को समर्पित करना चाहिए। इस बयान ने विवाद की आग को और भड़का दिया।
विपक्ष का तीखा हमला और गिरफ्तारी की मांग
कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार और महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने इस बयान को 'इतिहास का विकृत रूप' करार दिया। उन्होंने तर्क दिया कि शिवाजी महाराज स्वराज्य की लड़ाई से कभी थके नहीं और राज्य सौंपने की बात ऐतिहासिक रूप से सर्वथा निराधार है।
वडेट्टीवार ने सवाल उठाया कि जब मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री मंच पर बैठे थे, तो वे चुप क्यों रहे? उन्होंने यह भी पूछा कि क्या भारतीय जनता पार्टी (BJP) इस बात से सहमत है कि शिवाजी महाराज ने अपना राजमुकुट किसी और को सौंप दिया था। कांग्रेस ने बागेश्वर बाबा की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है।
कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने इस बयान को 'ऐतिहासिक रूप से गलत' और तथ्यों की तोड़-मरोड़ बताया।
शिवसेना और NCP का कड़ा विरोध
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रवक्ता संजय राउत ने कहा कि पहले सिंधुदुर्ग के मालवन में भ्रष्टाचार के चलते एक प्रतिमा गिरी, और अब बाहरी लोगों को बुलाकर महाराष्ट्र के इतिहास का अपमान करवाया जा रहा है। उन्होंने महायुति सरकार पर ऐसे अपमान के लिए मंच मुहैया कराने का आरोप लगाया।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के विधायक रोहित पवार ने मांग की कि महाराष्ट्र में बागेश्वर बाबा पर प्रतिबंध लगाया जाए और उन्हें दोबारा राज्य में प्रवेश न दिया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने कार्रवाई नहीं की, तो शिव-प्रेमी जनता खुद फैसला करेगी।
इसी दल के विधायक जितेंद्र आव्हाड ने शास्त्री से बिना शर्त माफी की मांग करते हुए कहा कि 17वीं सदी के ऐतिहासिक दस्तावेज़ यह साबित करते हैं कि शिवाजी महाराज और रामदास स्वामी के बीच संपर्क बेहद सीमित था और सिंहासन सौंपने जैसी कोई घटना दर्ज नहीं है।
मुख्यमंत्री फडणवीस की सफाई और महायुति का 'डैमेज-कंट्रोल'
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस तरह की बातों का कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है। उन्होंने स्वीकार किया कि कई लोककथाएं और किंवदंतियाँ प्रचलित हैं, लेकिन लिखित इतिहास में ऐसी किसी घटना का उल्लेख नहीं मिलता।
फडणवीस ने यह भी कहा कि बागेश्वर बाबा का मूल आशय यह था कि RSS ने हिंदू संस्कृति और सनातन परंपराओं को जीवंत रखा है और हर घर से कम से कम एक बेटे को संघ से जुड़ना चाहिए। इस तरह महायुति सरकार धार्मिक आयोजन का बचाव करते हुए खुद को शास्त्री के बयान से अलग दिखाने की कोशिश में जुटी है।
ऐतिहासिक संदर्भ और व्यापक निहितार्थ
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब बागेश्वर बाबा धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री विवादास्पद बयानों के कारण सुर्खियों में आए हैं। इससे पहले भी उन पर 'ढोंगी बाबा' होने और 'चमत्कार' के नाम पर लोगों को गुमराह करने के आरोप लग चुके हैं, जिस पर अखिल भारतीय अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति ने आपत्ति जताई थी।
यह विवाद ऐसे समय में उठा है जब महाराष्ट्र में मराठा अस्मिता और शिवाजी महाराज की विरासत को लेकर राजनीतिक संवेदनशीलता पहले से ही चरम पर है। 2023 में मालवन में शिवाजी महाराज की नौसेना प्रतिमा के ढहने की घटना ने पहले ही सत्ताधारी दल को कठघरे में खड़ा किया था।
विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद 2024 के विधानसभा चुनाव के बाद भी महाराष्ट्र की राजनीति में मराठा गौरव के मुद्दे की केंद्रीयता को रेखांकित करता है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बागेश्वर बाबा माफी मांगते हैं या नहीं, और महायुति सरकार इस दबाव में कोई ठोस कदम उठाती है अथवा नहीं।