जिनेवा में बलोच नेशनल मूवमेंट की फोटो प्रदर्शनी, पाकिस्तान पर बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
बलोच नेशनल मूवमेंट (बीएनएम) ने 30 सितंबर 2026 को जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय के बाहर एक फोटो प्रदर्शनी आयोजित की, जिसमें बलूचिस्तान में कथित तौर पर पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा लोगों को जबरन गायब करने, सामूहिक दंड और अन्य मानवाधिकार उल्लंघनों के दस्तावेज़ी साक्ष्य अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने रखे गए। समूह के अनुसार, इस प्रदर्शनी का उद्देश्य बलूचिस्तान की गंभीर मानवीय स्थिति को वैश्विक मंच पर उजागर करना था।
प्रदर्शनी का उद्देश्य और स्वरूप
बीएनएम के मुताबिक, प्रदर्शनी में उन बलोच नागरिकों की तस्वीरें प्रदर्शित की गईं जिन्हें कथित तौर पर जबरन गायब किया गया है और उनके परिजन वर्षों से उनकी वापसी की प्रतीक्षा कर रहे हैं। समूह ने कहा, 'बलूचिस्तान में जबरन गायब करना सिर्फ एक दावा या आँकड़ा नहीं, बल्कि हज़ारों परिवारों के लिए एक दर्दनाक हकीकत है।'
यह प्रदर्शनी बीएनएम के उस वैश्विक अभियान का हिस्सा है जिसके तहत समूह फोटोग्राफिक और दस्तावेज़ी साक्ष्यों को संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुँचाने का प्रयास कर रहा है।
महरंग बलोच और मानवाधिकार संघर्ष
बलोच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) की नेता महरंग बलोच का उल्लेख करते हुए बीएनएम ने बताया कि उन्होंने पहली बार तब आवाज़ उठाई थी जब वह एक छोटी बच्ची थीं और उनके पिता को कथित तौर पर जबरन गायब कर दिया गया था। तब से वह बलोच अधिकारों की एक प्रमुख आवाज़ बनकर उभरी हैं।
समूह के अनुसार, बलोच अधिकारों के लिए संघर्ष करने पर उन पर कई मुकदमे दर्ज किए गए और जून 2026 में एक पाकिस्तानी अदालत ने उन्हें कथित तौर पर एक 'झूठे मामले' में आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
बीएनएम अध्यक्ष के परिजनों का मामला
बीएनएम ने अपने अध्यक्ष नसीम बलोच के पिता मुहम्मद बख्श साजिदी, चाचा नईम साजिदी और मामा रफीक बलोच के मामलों का भी हवाला दिया। समूह का आरोप है कि 2 फरवरी 2026 को बलूचिस्तान के हब क्षेत्र में उनके घरों पर छापेमारी के दौरान पाकिस्तानी सेना ने उन्हें जबरन गायब कर दिया। तब से उनका कोई पता नहीं चला है।
गौरतलब है कि इस मुद्दे को ब्रिटिश संसद में अर्ली डे मोशन के ज़रिये भी उठाया जा चुका है, जो इसकी अंतरराष्ट्रीय चिंता को रेखांकित करता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्रवाई की माँग
बीएनएम ने रेखांकित किया कि जबरन गुमशुदगी के पीड़ितों के परिजनों के विरोध प्रदर्शन, वॉयस फॉर बलोच मिसिंग पर्सन्स के लॉन्ग मार्च और बलूचिस्तान में लंबे समय तक चली भूख हड़तालों के बावजूद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
यह ऐसे समय में आया है जब बलूचिस्तान में मानवाधिकार की स्थिति को लेकर वैश्विक चिंता बढ़ती जा रही है। बीएनएम ने माँग की कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस संकट को गंभीरता से ले और जबरन गुमशुदगी के मामलों की स्वतंत्र जाँच सुनिश्चित करे।