26 सितंबर 2026
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बलूचिस्तान में दशकों से दमन जारी: बीएनएम प्रमुख नसीम बलोच का जिनेवा में पाकिस्तान पर सीधा हमला

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बलूचिस्तान में दशकों से दमन जारी: बीएनएम प्रमुख नसीम बलोच का जिनेवा में पाकिस्तान पर सीधा हमला

सारांश

जिनेवा के अंतरराष्ट्रीय मंच पर बीएनएम प्रमुख नसीम बलोच ने पाकिस्तान के दशकों पुराने दमन चक्र को उजागर किया — गुमशुदगी, उम्रकैद, सैन्य बल और संसाधनों की लूट। संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों की 'घोर अन्याय' वाली टिप्पणी के बीच बलोच आज़ादी की माँग एक बार फिर वैश्विक मंच पर गूंजी।

मुख्य बातें

बीएनएम चेयरमैन नसीम बलोच ने 26 सितंबर 2026 को जिनेवा में 12वें बलूचिस्तान इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तान पर बलोच जनता के व्यवस्थित दमन का आरोप लगाया।
बीएनएम के केंद्रीय समिति सदस्य डॉ.
नोकाप बलोच) की 10 सितंबर को कथित हत्या के लिए पाकिस्तानी सेना को जिम्मेदार ठहराया गया।
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने महरंग बलोच और सिबगतुल्लाह शाहजी को सुनाई गई उम्रकैद की सजा को 'घोर अन्याय' करार दिया।
बीवाईसी नेता गुलजादी बलोच को भी पाकिस्तानी अदालत ने हाल ही में उम्रकैद की सजा सुनाई, जिसे बीएनएम ने 'झूठे आरोपों' पर आधारित बताया।
सीपीईसी के ज़रिए चीन के निवेश और बलूचिस्तान के खनिज संसाधनों के दोहन को बलोच राजनीतिक भविष्य से जोड़ते हुए नसीम बलोच ने स्वतंत्र बलूचिस्तान को संगठन का अटल राजनीतिक लक्ष्य बताया।

बलोच नेशनल मूवमेंट (बीएनएम) के चेयरमैन नसीम बलोच ने 26 सितंबर 2026 को जिनेवा में आयोजित 12वें बलूचिस्तान इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तान पर बलोच जनता के व्यवस्थित दमन का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक कार्यकर्ताओं, छात्रों, डॉक्टरों, शिक्षकों, वकीलों और आम नागरिकों की पीढ़ियों को जेलों में ठूंसा जा रहा है, अगवा किया जा रहा है और बड़ी संख्या में लोग या तो निर्वासन में जीवन बिता रहे हैं या राज्य-प्रायोजित कथित ज्यादतियों में मारे जा रहे हैं।

मुख्य आरोप और घटनाक्रम

नसीम बलोच ने आरोप लगाया कि इस्लामाबाद ने दशकों से 'बलोच राष्ट्रीय मुद्दे' को दबाने के लिए सैन्य बल, राजनीतिक जोड़-तोड़, जबरन गुमशुदगी, कारावास और बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण जैसे हथकंडों का सहारा लिया है। यह सम्मेलन मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों, मीडियाकर्मियों और बलोच राजनीतिक कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में आयोजित किया गया था।

बीएनएम प्रमुख ने संगठन की केंद्रीय समिति के सदस्य डॉ. अब्दुल रशीद, जिन्हें डॉ. नोकाप बलोच के नाम से भी जाना जाता था, को 10 सितंबर को हुई उनकी कथित हत्या पर श्रद्धांजलि दी और इसके लिए पाकिस्तानी सेना को जिम्मेदार ठहराया।

उम्रकैद की सज़ाओं पर संयुक्त राष्ट्र की चिंता

बलोच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) की नेता महरंग बलोच और सिबगतुल्लाह शाहजी को सुनाई गई उम्रकैद की सजा का उल्लेख करते हुए नसीम बलोच ने संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों के उन विचारों का हवाला दिया जिनमें इस सजा को 'घोर अन्याय' करार दिया गया था। विशेषज्ञों ने कानूनी कार्यवाही की निष्पक्षता और शांतिपूर्ण राजनीतिक गतिविधियों के खिलाफ आतंकवाद-रोधी कानूनों के उपयोग पर गंभीर चिंता जताई थी।

इसके अलावा, बीएनएम प्रमुख ने एक अन्य बीवाईसी नेता गुलजादी बलोच को पाकिस्तानी अदालत द्वारा हाल ही में सुनाई गई उम्रकैद की सजा की भी कड़ी निंदा की। उन्होंने आरोप लगाया कि गुलजादी को 'झूठे आरोपों' में दोषी ठहराया गया।

सीपीईसी और संसाधनों पर बलोच रुख

नसीम बलोच ने चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) के माध्यम से बलूचिस्तान में चीन के भारी निवेश और प्रांत के तांबे, सोने व अन्य खनिज संसाधनों में अंतरराष्ट्रीय कंपनियों की दिलचस्पी का भी जिक्र किया। उन्होंने तर्क दिया कि संसाधनों और निवेश पर किसी भी चर्चा को बलोच राष्ट्र के राजनीतिक भविष्य के सवाल से अलग नहीं किया जा सकता।

गौरतलब है कि बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा लेकिन सबसे कम विकसित प्रांत है, और यहाँ दशकों से जारी अलगाववादी आंदोलन तथा मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोप अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बार-बार उठते रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब सीपीईसी परियोजनाओं को लेकर क्षेत्र में तनाव लगातार बना हुआ है।

बीएनएम का राजनीतिक रुख

गुमशुदा बलोच नागरिकों के परिवारों, राजनीतिक कैदियों और निर्वासन में रह रहे बलोचों को सीधे संबोधित करते हुए नसीम बलोच ने कहा, 'आपका दर्द हमारी सामूहिक याददाश्त का हिस्सा है।' अपना वक्तव्य समाप्त करते हुए उन्होंने संगठन का रुख स्पष्ट शब्दों में दोहराया: 'बलोच नेशनल मूवमेंट का राजनीतिक रुख स्पष्ट है — हमारा मानना है कि बलूचिस्तान में संघर्ष, दमन और बार-बार आने वाले संकटों का स्थायी समाधान बलूचिस्तान की आज़ादी और बलोच राष्ट्र का अपना भविष्य तय करने का अधिकार है।'

आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन और संयुक्त राष्ट्र निकाय इस सम्मेलन में उठाए गए मुद्दों पर किस प्रकार प्रतिक्रिया देते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव का हिस्सा है जो बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर पाकिस्तान पर बन रहा है। संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों का 'घोर अन्याय' वाला बयान और आतंकवाद-रोधी कानूनों के दुरुपयोग की चिंता, इस्लामाबाद की कूटनीतिक स्थिति को कमज़ोर करती है। विरोधाभास यह है कि सीपीईसी के नाम पर अरबों डॉलर का निवेश हो रहा है, लेकिन जिन बलोचों की धरती पर यह निवेश आ रहा है, उनकी आवाज़ें लगातार दबाई जा रही हैं। जब तक पाकिस्तान इस राजनीतिक असंतुलन को नहीं सुलझाता, सीपीईसी की दीर्घकालिक व्यवहार्यता भी संदेह के घेरे में रहेगी।
RashtraPress
26 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बलोच नेशनल मूवमेंट (बीएनएम) क्या है और इसका राजनीतिक रुख क्या है?
बलोच नेशनल मूवमेंट (बीएनएम) एक बलोच राजनीतिक संगठन है जो बलूचिस्तान की आज़ादी की वकालत करता है। बीएनएम के चेयरमैन नसीम बलोच के अनुसार, संगठन का स्पष्ट रुख है कि बलूचिस्तान में दशकों से जारी संघर्ष और दमन का एकमात्र स्थायी समाधान बलोच राष्ट्र की स्वतंत्रता और आत्मनिर्णय का अधिकार है।
महरंग बलोच और सिबगतुल्लाह शाहजी को उम्रकैद की सजा क्यों दी गई?
बलोच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) की नेता महरंग बलोच और सिबगतुल्लाह शाहजी को पाकिस्तानी अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने इसे 'घोर अन्याय' करार देते हुए कानूनी कार्यवाही की निष्पक्षता और शांतिपूर्ण राजनीतिक गतिविधियों के खिलाफ आतंकवाद-रोधी कानूनों के इस्तेमाल पर गंभीर चिंता जताई है।
डॉ. अब्दुल रशीद (डॉ. नोकाप बलोच) कौन थे?
डॉ. अब्दुल रशीद, जिन्हें डॉ. नोकाप बलोच के नाम से जाना जाता था, बीएनएम की केंद्रीय समिति के सदस्य थे। बीएनएम चेयरमैन नसीम बलोच के अनुसार, उनका निधन 10 सितंबर को हुआ और उन्होंने इसके लिए पाकिस्तानी सेना को जिम्मेदार ठहराया है।
सीपीईसी और बलूचिस्तान के संसाधनों को लेकर बलोचों का क्या रुख है?
बीएनएम प्रमुख नसीम बलोच ने कहा कि चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) के ज़रिए बलूचिस्तान के तांबे, सोने और अन्य खनिज संसाधनों का दोहन हो रहा है। उनका तर्क है कि इन संसाधनों और अंतरराष्ट्रीय निवेश पर होने वाली किसी भी चर्चा को बलोच राष्ट्र के राजनीतिक भविष्य के सवाल से अलग नहीं किया जा सकता।
12वें बलूचिस्तान इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में कौन-कौन शामिल हुए?
26 सितंबर 2026 को जिनेवा में आयोजित इस सम्मेलन में मानवाधिकार कार्यकर्ता, विभिन्न देशों और संगठनों के प्रतिनिधि, मीडियाकर्मी और बलोच राजनीतिक कार्यकर्ता शामिल हुए। इस मंच पर बीएनएम चेयरमैन नसीम बलोच ने पाकिस्तान के खिलाफ अपने आरोप प्रस्तुत किए।
राष्ट्र प्रेस
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