15 जुलाई 2026
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बलूचिस्तान में 220 केवी ट्रांसमिशन टावर उड़ाए, क्वेटा-सिबी समेत कई शहरों में बिजली संकट

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बलूचिस्तान में 220 केवी ट्रांसमिशन टावर उड़ाए, क्वेटा-सिबी समेत कई शहरों में बिजली संकट

सारांश

बलूचिस्तान में हथियारबंद हमलावरों ने उच पावर प्लांट की 220 केवी लाइन के छह में से दो टावर उड़ा दिए, जिससे क्वेटा और सिबी में बिजली ठप हो गई। यह हमला जियारत में नौ पुलिसकर्मियों की मौत के एक हफ्ते बाद हुआ — बलूचिस्तान में बुनियादी ढाँचे और सुरक्षा बलों पर हमलों की बढ़ती श्रृंखला का हिस्सा।

मुख्य बातें

डेरा मुराद जमाली के पास 14 जुलाई 2026 की रात अज्ञात हमलावरों ने उच पावर प्लांट की 220 केवी ट्रांसमिशन लाइन के छह टावरों पर विस्फोटक लगाए।
दो टावर पूरी तरह नष्ट , दो को नुकसान; शेष दो टावरों के विस्फोटक बम निरोधक दस्ते ने निष्क्रिय किए।
क्वेटा , सिबी और बलूचिस्तान के कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित; QESCO ने पुष्टि की।
पुलिस और फ्रंटियर कॉर्प्स ने इलाका घेरा, तलाशी अभियान जारी।
पिछले हफ्ते जियारत में पुलिस चौकी पर हमले में 9 पुलिसकर्मी मारे गए थे; 5 अभी भी लापता ।

बलूचिस्तान के डेरा मुराद जमाली के निकट 14 जुलाई 2026 की देर रात अज्ञात हथियारबंद हमलावरों ने उच पावर प्लांट से जुड़ी 220 केवी की हाई-वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइन के छह टावरों पर विस्फोटक लगाए, जिनमें से दो टावर पूरी तरह नष्ट हो गए और दो को गंभीर क्षति पहुँची। इस हमले के कारण क्वेटा, सिबी और बलूचिस्तान के कई अन्य इलाकों में बिजली आपूर्ति ठप हो गई।

हमले का घटनाक्रम

पुलिस के अनुसार यह हमला नोटल पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में हुआ। हमलावरों ने उच पावर प्लांट से क्वेटा और सिबी तक बिजली पहुँचाने वाली ट्रांसमिशन लाइन के छह टावरों पर सुनियोजित तरीके से विस्फोटक लगाए। इनमें से दो टावर पूरी तरह ध्वस्त हो गए, जबकि दो अन्य को आंशिक नुकसान पहुँचा। शेष दो टावरों पर लगाए गए विस्फोटकों को बम निरोधक दस्ते ने समय रहते निष्क्रिय कर दिया।

हमले की सूचना मिलते ही पुलिस और फ्रंटियर कॉर्प्स के जवानों ने पूरे इलाके को घेर लिया और तलाशी अभियान शुरू किया।

बिजली आपूर्ति पर असर

क्वेटा इलेक्ट्रिक सप्लाई कंपनी (QESCO) के प्रवक्ता ने पुष्टि की कि उच पावर प्लांट से आने वाली 220 केवी ट्रांसमिशन लाइन पूरी तरह बंद हो गई है। इसके चलते क्वेटा, सिबी और बलूचिस्तान के कई आसपास के इलाकों में बिजली की आपूर्ति बाधित हुई। बिजली बहाली के प्रयास जारी हैं, लेकिन टावरों को हुए भारी नुकसान के कारण मरम्मत में समय लग सकता है।

पिछले हफ्ते का जियारत हमला

यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब पिछले हफ्ते बलूचिस्तान के जियारत जिले में एक पुलिस चौकी पर हथियारबंद हमलावरों ने धावा बोला था। उस हमले में दो स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) समेत कम से कम नौ पुलिसकर्मी मारे गए थे। हमलावरों ने 6 जुलाई की रात पुलिस चौकी को निशाना बनाया और कुछ समय तक चली गोलीबारी के बाद चौकी के भीतर घुसने में सफल रहे।

जियारत के डिप्टी कमिश्नर अब्दुल कुदूस अचकजई ने मौतों की संख्या की पुष्टि की और बताया कि पाँच पुलिसकर्मी अभी भी लापता हैं, जिनकी तलाश के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया गया है।

बढ़ते हमलों का व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा जैसे सीमावर्ती प्रांतों में सुरक्षा बलों — विशेषकर पुलिस और कानून प्रवर्तन कर्मियों — को निशाना बनाकर किए जाने वाले हमलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। बिजली के बुनियादी ढाँचे पर यह हमला इस क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता का नवीनतम संकेत है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के हमले आम नागरिकों की जीवन-रेखा को प्रभावित करते हैं और सरकार की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हैं।

आने वाले दिनों में सुरक्षा बलों की तैनाती और बिजली बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा पर पाकिस्तानी अधिकारियों का रुख महत्वपूर्ण होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

गैस पाइपलाइन और सड़क संपर्क पर हमले वर्षों से जारी हैं, लेकिन इनकी आवृत्ति और समन्वय चिंताजनक रूप से बढ़ रहा है। जियारत में नौ पुलिसकर्मियों की मौत के ठीक एक हफ्ते बाद यह हमला संकेत देता है कि सुरक्षा बल अभी भी पहल पर नहीं हैं। आम नागरिकों पर दोहरी मार पड़ती है — एक तरफ असुरक्षा, दूसरी तरफ बिजली और सेवाओं का संकट। पाकिस्तानी सरकार की सैन्य-केंद्रित प्रतिक्रिया बार-बार विफल होती दिखी है; राजनीतिक संवाद और विकास की अनुपस्थिति इस चक्र को तोड़ने में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बलूचिस्तान में बिजली टावर पर हमला कब और कहाँ हुआ?
यह हमला 14 जुलाई 2026 की देर रात डेरा मुराद जमाली के पास नोटल पुलिस स्टेशन क्षेत्र में हुआ। हमलावरों ने उच पावर प्लांट से क्वेटा और सिबी को बिजली पहुँचाने वाली 220 केवी ट्रांसमिशन लाइन के छह टावरों पर विस्फोटक लगाए।
इस हमले से कितने टावर नष्ट हुए और बिजली पर क्या असर पड़ा?
दो टावर पूरी तरह नष्ट हो गए और दो को गंभीर क्षति पहुँची। QESCO ने पुष्टि की कि 220 केवी ट्रांसमिशन लाइन बंद हो गई, जिससे क्वेटा, सिबी और बलूचिस्तान के कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित हुई।
जियारत पुलिस चौकी हमले में क्या हुआ था?
6 जुलाई 2026 की रात हथियारबंद हमलावरों ने जियारत जिले की एक पुलिस चौकी पर हमला किया, जिसमें दो SHO समेत कम से कम नौ पुलिसकर्मी मारे गए। जियारत के डिप्टी कमिश्नर अब्दुल कुदूस अचकजई ने मौतों की पुष्टि की और बताया कि पाँच पुलिसकर्मी अभी भी लापता हैं।
बलूचिस्तान में इस तरह के हमले क्यों बढ़ रहे हैं?
कथित तौर पर बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा जैसे सीमावर्ती प्रांतों में सुरक्षा बलों और बुनियादी ढाँचे को निशाना बनाने वाले हमलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। आलोचकों का कहना है कि राजनीतिक संवाद की कमी और विकास की अनुपस्थिति इस अस्थिरता को बढ़ावा दे रही है।
क्या बम निरोधक दस्ते ने सभी विस्फोटक निष्क्रिय कर दिए?
नहीं। छह में से दो टावरों पर लगे विस्फोटकों को बम निरोधक दस्ते ने समय रहते निष्क्रिय कर दिया, लेकिन तब तक दो टावर पूरी तरह नष्ट हो चुके थे और दो को नुकसान पहुँच चुका था।
राष्ट्र प्रेस
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