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फरीदपुर में पुलिस हिरासत में अवामी लीग कार्यकर्ता की मौत, न्यायिक जांच की मांग

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फरीदपुर में पुलिस हिरासत में अवामी लीग कार्यकर्ता की मौत, न्यायिक जांच की मांग

सारांश

बांग्लादेश के फरीदपुर में पुलिस हिरासत में अवामी लीग कार्यकर्ता मिर्जा इश्तियाक अहमद प्रांतो की मौत ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। परिजनों ने प्रताड़ना का आरोप लगाया है, मानवाधिकार संगठन एएसके ने न्यायिक जांच और सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करने की माँग की है।

मुख्य बातें

मिर्जा इश्तियाक अहमद प्रांतो (28) , अवामी लीग की छात्र शाखा छात्र लीग के कार्यकर्ता, की फरीदपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हुई।
पुलिस के डिटेक्टिव ब्रांच (डीबी) ने उन्हें 20 जून को मधुखाली उपजिला से हिरासत में लिया था।
परिजनों ने हिरासत के दौरान पिटाई का आरोप लगाया; माँ खादिजा अख्तर ने न्याय की माँग की।
मानवाधिकार संगठन ऐन ओ सालिश केंद्र (एएसके) ने न्यायिक जांच, सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करने और पीड़ित परिवार को कानूनी सहायता देने की माँग की।
अवामी लीग ने बीएनपी सरकार पर राज्य तंत्र से अपने कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया।

बांग्लादेश के फरीदपुर जिले में पुलिस हिरासत में अवामी लीग के एक स्थानीय कार्यकर्ता की मौत हो गई है, जिसने देश में हिरासत में होने वाली मौतों को लेकर चल रही बहस को और तेज कर दिया है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब बांग्लादेश में अवामी लीग सदस्यों की हिरासत में मौत के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।

मुख्य घटनाक्रम

मृतक की पहचान 28 वर्षीय मिर्जा इश्तियाक अहमद प्रांतो के रूप में हुई है, जो अवामी लीग की छात्र शाखा छात्र लीग से जुड़े कार्यकर्ता थे। पुलिस के डिटेक्टिव ब्रांच (डीबी) ने उन्हें 20 जून को मधुखाली उपजिला से हिरासत में लिया था। इसके बाद रविवार को फरीदपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

परिजनों के आरोप

परिजनों ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने हिरासत के दौरान प्रांतो की पिटाई की, जिसके कारण उनकी मौत हुई। मृतक की माँ खादिजा अख्तर ने रोते हुए कहा, "मेरे स्वस्थ और निर्दोष बेटे को किस अपराध में पकड़ा गया, उसे प्रताड़ित किया गया और हिरासत में मार दिया गया? मैं न्याय चाहती हूँ।" पुलिस की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

मानवाधिकार संगठन की माँगें

ढाका स्थित मानवाधिकार संगठन ऐन ओ सालिश केंद्र (एएसके) ने इस घटना पर गंभीर चिंता जताई है और न्यायिक जांच की माँग की है। संगठन ने कहा कि मौत के वास्तविक कारण का पता लगाने के लिए निष्पक्ष जांच अनिवार्य है और दोषियों को सजा मिलनी चाहिए। एएसके ने यह भी माँग की है कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक किया जाए, पीड़ित परिवार को सुरक्षा और कानूनी सहायता दी जाए, तथा दोषियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई हो।

अवामी लीग की प्रतिक्रिया

अवामी लीग ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की सरकार राज्य तंत्र का इस्तेमाल करके उसके नेताओं और कार्यकर्ताओं को निशाना बनाकर समाप्त कर रही है। पार्टी ने कहा, "कानून-व्यवस्था एजेंसियों का काम कानून लागू करना है, डर पैदा करना नहीं। हिरासत में किसी नागरिक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत गंभीर सवाल उठाती है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।"

पार्टी ने आगे कहा, "राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन किसी भी सरकार को नागरिकों का जीवन छीनने का अधिकार नहीं है। पुलिस और प्रशासन की जिम्मेदारी कानून के शासन को बनाए रखना है, न कि किसी राजनीतिक एजेंडे को लागू करना।"

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि यह मामला बांग्लादेश में हिरासत में होने वाली मौतों की बढ़ती श्रृंखला में एक और कड़ी के रूप में सामने आया है। मानवाधिकार संगठनों की माँग पर सरकार की प्रतिक्रिया और न्यायिक जांच के आदेश की प्रतीक्षा है। इस घटना से बांग्लादेश में राजनीतिक हिरासत और पुलिस जवाबदेही को लेकर अंतरराष्ट्रीय ध्यान भी आकर्षित होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या वे राजनीतिक दबाव में निष्क्रिय हो चुके हैं। एएसके जैसे संगठनों की माँगें तब तक प्रतीकात्मक रहेंगी जब तक सीसीटीवी फुटेज और पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होती। मुख्यधारा की कवरेज जो अनदेखा कर रही है वह यह है कि इस पैटर्न की अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार निकायों द्वारा जाँच की माँग अब और टाली नहीं जा सकती।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फरीदपुर पुलिस हिरासत में किसकी मौत हुई?
अवामी लीग की छात्र शाखा छात्र लीग के 28 वर्षीय कार्यकर्ता मिर्जा इश्तियाक अहमद प्रांतो की मौत फरीदपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाज के दौरान हुई। पुलिस के डिटेक्टिव ब्रांच ने उन्हें 20 जून को मधुखाली उपजिला से हिरासत में लिया था।
परिजनों ने पुलिस पर क्या आरोप लगाए हैं?
परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने हिरासत के दौरान प्रांतो की पिटाई की, जिसके कारण उनकी मौत हुई। मृतक की माँ खादिजा अख्तर ने न्याय की माँग करते हुए कहा कि उनके बेटे को निर्दोष होने के बावजूद प्रताड़ित किया गया।
ऐन ओ सालिश केंद्र (एएसके) ने क्या माँगें रखी हैं?
एएसके ने न्यायिक जांच, सीसीटीवी फुटेज को सार्वजनिक करने, पीड़ित परिवार को सुरक्षा और कानूनी सहायता देने तथा दोषियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई की माँग की है। संगठन का कहना है कि निष्पक्ष जांच के बिना मौत के वास्तविक कारण का पता नहीं चलेगा।
अवामी लीग ने इस मामले में बीएनपी सरकार पर क्या आरोप लगाए?
अवामी लीग ने आरोप लगाया कि बीएनपी सरकार राज्य तंत्र का इस्तेमाल करके उसके नेताओं और कार्यकर्ताओं को निशाना बना रही है। पार्टी ने कहा कि किसी भी सरकार को नागरिकों का जीवन छीनने का अधिकार नहीं है।
बांग्लादेश में हिरासत में मौतों का यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
यह घटना बांग्लादेश में अवामी लीग सदस्यों की हिरासत में मौत के बढ़ते मामलों की पृष्ठभूमि में सामने आई है, जो राजनीतिक उत्पीड़न और पुलिस जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठाती है। मानवाधिकार संगठन इसे राज्य संस्थाओं की विश्वसनीयता की परीक्षा मान रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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