16 सितंबर 2026
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बांग्लादेश ICT ने 7 अवामी लीग नेताओं को सुनाई मौत की सजा, पार्टी बोली — 'फैसला राजनीतिक बदला'

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बांग्लादेश ICT ने 7 अवामी लीग नेताओं को सुनाई मौत की सजा, पार्टी बोली — 'फैसला राजनीतिक बदला'

सारांश

बांग्लादेश के ICT ने अवामी लीग महासचिव ओबैदुल कादर समेत 7 नेताओं को मौत की सजा सुनाई — सभी अनुपस्थित थे। पार्टी का कहना है यह न्याय नहीं, बल्कि राजनीतिक बदले की 'न्यायिक हत्या' है। 5 अगस्त 2024 के बाद से बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल का यह सबसे तीखा कानूनी अध्याय है।

मुख्य बातें

बांग्लादेश ICT ने 16 सितंबर 2026 को अवामी लीग के महासचिव ओबैदुल कादर समेत 7 वरिष्ठ नेताओं को मौत की सजा सुनाई।
सभी सात दोषी ट्रिब्यूनल में अनुपस्थित थे; सुनवाई in absentia हुई।
अवामी लीग ने फैसले को 'एकतरफा, पक्षपातपूर्ण और मनगढ़ंत' बताते हुए इसे राजनीतिक प्रतिशोध का हथियार करार दिया।
पार्टी का आरोप है कि अभियोजन और न्यायिक पैनल में जमात-ए-इस्लामी और BNP के पदाधिकारी शामिल थे।
पार्टी ने चेताया कि सजा से जुलाई-अगस्त 2024 के बाद जारी हिंसा और भड़केगी; 'हजारों कार्यकर्ता पहले ही जेल में।' ये सभी आरोप अवामी लीग के बयान पर आधारित हैं और स्वतंत्र रूप से पूरी तरह सत्यापित नहीं हुए हैं।

बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) ने मंगलवार, 16 सितंबर 2026 को अवामी लीग के महासचिव ओबैदुल कादर समेत पार्टी और उससे संबद्ध संगठनों के सात वरिष्ठ नेताओं को जुलाई 2024 विद्रोह से जुड़े 'मानवता के विरुद्ध अपराधों' का दोषी करार देते हुए मौत की सजा सुनाई। अवामी लीग ने इस फैसले को तत्काल 'एकतरफा, पक्षपातपूर्ण और मनगढ़ंत' बताते हुए खारिज किया और आरोप लगाया कि यह राजनीतिक प्रतिशोध का हथियार है।

मुख्य घटनाक्रम

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सातों दोषियों में से कोई भी ट्रिब्यूनल के समक्ष उपस्थित नहीं था — अर्थात् यह सुनवाई अनुपस्थिति में (in absentia) हुई। अवामी लीग ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक कानून का यह बुनियादी सिद्धांत है कि अनुपस्थित आरोपी को भी अपनी पसंद का वकील चुनने सहित न्यूनतम कानूनी सुरक्षाएँ मिलनी चाहिए, परंतु मौजूदा ट्रिब्यूनल में इन गारंटियों को 'पूरी तरह नजरअंदाज' किया गया।

पार्टी के बयान के अनुसार, पूरी न्यायिक प्रक्रिया 'अत्यंत जल्दबाजी' में निपटाई गई और इसमें अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार कानून के 'सर्वमान्य सिद्धांतों की खुलेआम अनदेखी' की गई।

कानूनी प्रक्रिया पर आरोप

अवामी लीग ने आरोप लगाया कि मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली पूर्व अंतरिम सरकार ने 5 अगस्त 2024 के बाद अध्यादेश के ज़रिए 1973 के ICT अधिनियम में संशोधन किया — जिसे पार्टी ने 'असंवैधानिक' करार दिया। पार्टी के अनुसार, अभियोजन और न्यायिक पैनलों में जमात-ए-इस्लामी और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के पदाधिकारी एवं सक्रिय कार्यकर्ता शामिल थे, जिन्होंने कथित तौर पर 'पूरी तरह झूठ पर आधारित' मामले दर्ज कराए।

पार्टी ने यह भी कहा कि मुकदमे की शुरुआत से पहले न्यायपालिका में 'बड़े पैमाने पर बदलाव' किए गए, वकीलों पर भीड़ ने लगातार हमले किए और अदालत परिसर के भीतर भी उत्पीड़न जारी रहा — जिसे पार्टी ने 'दिखावटी मुकदमे के साफ सबूत' बताया।

आम नागरिकों पर असर

अवामी लीग ने गहरी चिंता जताई कि मौत की सजा से जुलाई-अगस्त 2024 के प्रदर्शनों के बाद शुरू हुई हिंसा का सिलसिला और भड़केगा, जिसमें पहले ही 'सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है।' साथ ही, पार्टी ने कहा कि मनमाने ढंग से हिरासत में लिए जाने की घटनाएं बढ़ेंगी, जिनके कारण पहले ही 'हजारों लोग जेल में बंद हैं।'

पार्टी के बयान के अनुसार, जमीनी स्तर पर हजारों कार्यकर्ताओं के घर और कारोबार 'बिना किसी रोक-टोक के लूटे और तोड़े-फोड़े गए हैं।' ये आरोप अब तक स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हो सके हैं।

उग्रवाद पर चिंता

अवामी लीग ने यह भी आरोप लगाया कि ICT की कार्यवाही ने 'इस्लामी चरमपंथियों का हौसला खतरनाक हद तक बढ़ा दिया है।' पार्टी के अनुसार, बांग्लादेश में सैकड़ों 'दोषी और खतरनाक उग्रवादियों' — जिनमें कथित तौर पर अल-कायदा से जुड़े व्यक्ति भी शामिल हैं — को जमानत दी जा चुकी है। ये आरोप पार्टी के बयान पर आधारित हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।

आगे क्या होगा

अवामी लीग ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से ICT की कार्यवाहियों की निष्पक्ष समीक्षा की माँग की है। गौरतलब है कि बांग्लादेश में 5 अगस्त 2024 को पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के पद छोड़ने के बाद से राजनीतिक संकट लगातार गहराता रहा है, और ICT के फैसलों को लेकर विपक्ष तथा अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की आलोचना का दायरा बढ़ता जा रहा है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांग्लादेश ICT ने किन अवामी लीग नेताओं को मौत की सजा सुनाई?
ICT ने अवामी लीग के महासचिव ओबैदुल कादर समेत पार्टी और उससे संबद्ध संगठनों के कुल 7 वरिष्ठ नेताओं को 16 सितंबर 2026 को मौत की सजा सुनाई। ये सभी जुलाई 2024 विद्रोह से जुड़े 'मानवता के विरुद्ध अपराधों' के आरोपी थे।
अवामी लीग ने ICT के फैसले को क्यों गलत बताया?
अवामी लीग का कहना है कि सभी दोषी ट्रिब्यूनल में अनुपस्थित थे और उन्हें अपनी पसंद का वकील चुनने जैसी बुनियादी कानूनी सुरक्षा भी नहीं दी गई। पार्टी का आरोप है कि अभियोजन पैनल में जमात-ए-इस्लामी और BNP के पदाधिकारी शामिल थे, जिससे यह प्रक्रिया राजनीतिक बदले में बदल गई।
बांग्लादेश में ICT क्या है और इसकी स्थापना कब हुई?
इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) बांग्लादेश की एक विशेष अदालत है जिसे मूलतः 1973 के ICT अधिनियम के तहत स्थापित किया गया था। इसे पहले 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान हुए युद्ध अपराधों की सुनवाई के लिए बनाया गया था; बाद में इसके दायरे में विस्तार किया जाता रहा है।
5 अगस्त 2024 के बाद बांग्लादेश में क्या हुआ?
5 अगस्त 2024 को पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता छोड़ने के बाद मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार का गठन हुआ। तब से अवामी लीग के नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ बड़े पैमाने पर मुकदमे और हिरासत की कार्यवाहियाँ शुरू हुई हैं, जिन्हें लेकर मानवाधिकार संगठन चिंता जता चुके हैं।
इस फैसले का भारत-बांग्लादेश संबंधों पर क्या असर पड़ सकता है?
अवामी लीग ऐतिहासिक रूप से भारत की नज़दीकी पार्टी रही है; उसके शीर्ष नेताओं को मौत की सजा बांग्लादेश में राजनीतिक ध्रुवीकरण को और गहरा कर सकती है। भारत आधिकारिक तौर पर अभी तक इस फैसले पर चुप है, हालाँकि क्षेत्रीय स्थिरता और सीमा सुरक्षा के नजरिए से नई दिल्ली की नज़र इस घटनाक्रम पर बनी रहेगी।
राष्ट्र प्रेस
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