बिहार कृषि विश्वविद्यालय के 6 कृषि विज्ञान केंद्रों में बनेंगी मखाना सूक्ष्म प्रसंस्करण इकाइयाँ
सारांश
मुख्य बातें
बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर को उद्यान निदेशालय, कृषि विभाग, बिहार सरकार ने केंद्रीय क्षेत्र योजना के अंतर्गत मखाना की सूक्ष्म स्तरीय प्रसंस्करण इकाइयाँ स्थापित करने की अहम जिम्मेदारी सौंपी है। इस योजना के तहत बीएयू के अधीन संचालित छह कृषि विज्ञान केंद्रों का चयन किया गया है, जहाँ ये इकाइयाँ स्थापित की जाएंगी। यह पहल मखाना उत्पादन, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन की दिशा में बिहार के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
मुख्य घटनाक्रम
बिहार सरकार के उद्यान निदेशालय ने केंद्रीय क्षेत्र योजना के तहत बीएयू से संबद्ध छह कृषि विज्ञान केंद्रों को मखाना सूक्ष्म प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना के लिए चुना है। इन इकाइयों के माध्यम से मखाना उत्पादक क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर प्राथमिक प्रसंस्करण, गुणवत्ता सुधार, पैकेजिंग और मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने की सुविधा उपलब्ध होगी।
गौरतलब है कि अब तक किसान केवल कच्चे मखाना की बिक्री तक सीमित रहते थे, जिससे उन्हें उत्पाद का पूरा मूल्य नहीं मिल पाता था। इन इकाइयों की स्थापना से यह स्थिति बदलने की उम्मीद है।
किसानों और ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षण
बिहार कृषि विश्वविद्यालय के अनुसार, इन कृषि विज्ञान केंद्रों के जरिए किसानों और ग्रामीण युवाओं को मखाना प्रसंस्करण की तकनीक, स्वच्छता मानक, पैकेजिंग प्रक्रिया और उद्यमिता से जुड़ा व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे स्थानीय स्तर पर मखाना आधारित छोटे उद्यम विकसित होने और ग्रामीण रोजगार के नए अवसर बनने की संभावना है।
यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र और राज्य सरकारें कृषि आधारित ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएँ चला रही हैं। मखाना प्रसंस्करण में कौशल विकास इस दिशा में एक व्यावहारिक हस्तक्षेप माना जा रहा है।
बिहार में मखाना का महत्व
बीएयू के आँकड़ों के अनुसार, देश के कुल मखाना उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी लगभग 85 से 90 प्रतिशत है। राज्य के कई जिलों में मखाना किसानों की आजीविका का प्रमुख आधार बन चुका है। मखाना एक विशिष्ट जलज कृषि उपज है, जो बिहार की कृषि पहचान का अभिन्न हिस्सा है।
विश्वविद्यालय का मानना है कि यह पहल मखाना की 'फार्म-टू-मार्केट' मूल्य श्रृंखला को वैज्ञानिक आधार पर मजबूत करने की दिशा में निर्णायक भूमिका निभाएगी।
कुलपति की प्रतिक्रिया
बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह ने कहा कि मखाना बिहार की विशिष्ट कृषि धरोहर है और अब यह राज्य की अर्थव्यवस्था तथा किसानों की आय बढ़ाने की संभावनाओं वाली फसल के रूप में उभर रहा है।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का प्रयास मखाना की पूरी मूल्य श्रृंखला को वैज्ञानिक आधार देना है — उन्नत किस्म और गुणवत्तापूर्ण बीज से लेकर वैज्ञानिक उत्पादन तकनीक, कटाई, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, पैकेजिंग और बाजार तक। डॉ. सिंह ने यह भी कहा कि बीएयू मखाना को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर बिहार की पहचान बनाने वाले उच्च मूल्य वाले कृषि उत्पाद के रूप में स्थापित करने के लिए अनुसंधान, नवाचार, प्रशिक्षण और तकनीकी प्रसार को निरंतर मजबूत करता रहेगा।
आगे की राह
इन सूक्ष्म प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना से किसानों को अपने उत्पाद में मूल्य जोड़ने और बेहतर बाज़ार तक पहुँचने के अवसर मिलेंगे। साथ ही, मखाना आधारित उद्यमिता को प्रोत्साहन मिलने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को व्यापक मजबूती मिलने की उम्मीद है। यह पहल बिहार के मखाना क्षेत्र को एक संगठित और मूल्य-संवर्धित उद्योग के रूप में विकसित करने की दिशा में अगला अहम कदम साबित हो सकती है।