मेजर जनरल बी.सी. खंडूरी का हरिद्वार में पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार, CM धामी सहित नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मेजर जनरल बी.सी. खंडूरी का हरिद्वार में पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार, CM धामी सहित नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

सारांश

मेजर जनरल (से.नि.) भुवन चंद्र खंडूरी — सैनिक, सड़क निर्माता, मुख्यमंत्री — को हरिद्वार में पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। CM धामी से लेकर संत समाज तक, सभी ने उन्हें उत्तराखंड की अटूट सेवा का प्रतीक बताया।

मुख्य बातें

मेजर जनरल (से.नि.) भुवन चंद्र खंडूरी का 20 मई 2026 को हरिद्वार में पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी , पूर्व CM विजय बहुगुणा और सांसद अनिल बलूनी सहित वरिष्ठ नेता अंतिम संस्कार में शामिल हुए।
खंडूरी ने पूर्व PM अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री के रूप में उत्तराखंड में सड़क नेटवर्क का विस्तार किया।
आध्यात्मिक गुरु कैलाशानंद गिरी महाराज ने उन्हें उत्तराखंड का 'दिव्य व्यक्तित्व' बताया।
खंडूरी सेना में मेजर जनरल के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद राजनीति में आए और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने।

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खंडूरी का बुधवार, 20 मई 2026 को हरिद्वार में पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। राजनेताओं, संतों और हजारों समर्थकों ने उन्हें भावभीनी विदाई दी। खंडूरी को उनके अनुशासन, ईमानदारी और उत्तराखंड के विकास में दिए योगदान के लिए याद किया जा रहा है।

अंतिम संस्कार में कौन-कौन शामिल हुए

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, भाजपा सांसद अनिल बलूनी और कई वरिष्ठ नेता हरिद्वार में अंतिम संस्कार में उपस्थित रहे। आध्यात्मिक गुरु कैलाशानंद गिरी महाराज सहित संत समाज के प्रतिनिधि भी इस अवसर पर मौजूद थे।

मुख्यमंत्री धामी की श्रद्धांजलि

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री खंडूरी का पूरा जीवन प्रेरणादायक रहा और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने कहा, 'चाहे सेना में देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले अधिकारी के रूप में हों, राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में या केंद्रीय मंत्री के तौर पर, उनका अनुशासन, नियमों का पालन और समय की पाबंदी जैसी खूबियां हमेशा हमें प्रेरित करती रहेंगी।'

नेताओं और संतों ने याद किया योगदान

पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने कहा कि खंडूरी ने खुद को पूरी तरह उत्तराखंड और यहाँ की जनता की सेवा के लिए समर्पित कर दिया था। उन्होंने कहा, 'आज उन्हें जिस तरह सम्मान दिया जा रहा है, वह उनके जीवन को दर्शाता है। सांसद, मंत्री और मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने उत्तराखंड की सेवा पूरी निष्ठा से की। वह सभी को साथ लेकर चलते थे। वह बड़े भाई जैसे थे। आज हम बेहद दुखी हैं।'

आध्यात्मिक गुरु कैलाशानंद गिरी महाराज ने खंडूरी को उत्तराखंड के लिए 'दिव्य व्यक्तित्व' बताते हुए कहा, 'उन्होंने उत्तराखंड के लिए बहुत काम किया और बड़ा योगदान दिया। अपने समय में उन्होंने कई नेताओं और युवा राजनेताओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। वह बेहद प्रतिभाशाली थे और हमेशा चाहते थे कि उत्तराखंड देश में सबसे आगे पहुँचे।'

सड़क निर्माण में ऐतिहासिक योगदान

भाजपा सांसद अनिल बलूनी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री के रूप में खंडूरी के कार्यकाल को याद किया। उन्होंने कहा, 'जब हम कोटद्वार से देहरादून जाते थे, तब रास्ते में कई दुर्घटनाएँ होती थीं। जैसे ही खंडूरी सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री बने, उन्होंने सभी कमियों को दूर किया। उत्तराखंड इसे कभी नहीं भूलेगा। उन्होंने सड़कों और हाईवे का ऐसा नेटवर्क बनाया, जिससे पूरा क्षेत्र जुड़ गया।'

एक सैनिक से मुख्यमंत्री तक की विरासत

गौरतलब है कि भुवन चंद्र खंडूरी उन विरले नेताओं में से थे जिन्होंने सेना में मेजर जनरल के पद तक पहुँचने के बाद राजनीति में कदम रखा और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने। उनका जीवन सैन्य अनुशासन और लोकसेवा का अनूठा संगम था। उनके निधन से उत्तराखंड ने एक ऐसा नेता खो दिया है जो राज्य की पहाड़ी पहचान और विकास दोनों का प्रतीक था। राज्य की राजनीति में उनकी विरासत आने वाले वर्षों तक प्रासंगिक बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भी उतना ही सच है कि राज्य में बुनियादी ढाँचे की कमियाँ आज भी बनी हुई हैं। उनकी विदाई राज्य की राजनीति को यह सोचने का अवसर देती है कि क्या उनके जैसे नेताओं की विरासत केवल श्रद्धांजलि तक सीमित रहेगी या उनके मूल्य — अनुशासन, ईमानदारी, सेवाभाव — अगली पीढ़ी के नेताओं में भी उतरेंगे।
RashtraPress
21 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भुवन चंद्र खंडूरी कौन थे?
भुवन चंद्र खंडूरी भारतीय सेना में मेजर जनरल के पद से सेवानिवृत्त हुए और बाद में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने। वे BJP के वरिष्ठ नेता थे और अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री भी रहे।
खंडूरी का अंतिम संस्कार कहाँ और कब हुआ?
उनका अंतिम संस्कार 20 मई 2026 को हरिद्वार में पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित कई वरिष्ठ नेता और संत उपस्थित रहे।
खंडूरी को उत्तराखंड में किस काम के लिए याद किया जाता है?
खंडूरी को उत्तराखंड में सड़क और हाईवे नेटवर्क के विस्तार, अनुशासित प्रशासन और राज्य की जनता के प्रति निष्ठा के लिए याद किया जाता है। केंद्रीय मंत्री रहते हुए उन्होंने कोटद्वार-देहरादून मार्ग सहित कई खतरनाक सड़कों को सुरक्षित बनाया।
अंतिम संस्कार में कौन-कौन से प्रमुख नेता शामिल हुए?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, भाजपा सांसद अनिल बलूनी और आध्यात्मिक गुरु कैलाशानंद गिरी महाराज सहित कई वरिष्ठ नेता और संत अंतिम संस्कार में उपस्थित रहे।
खंडूरी को 'पूर्ण सैन्य सम्मान' क्यों दिया गया?
भुवन चंद्र खंडूरी भारतीय सेना में मेजर जनरल के पद तक पहुँचे थे, इसलिए उन्हें सैन्य परंपराओं के अनुसार पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। यह सम्मान उनकी सैन्य सेवा और राष्ट्र के प्रति समर्पण का प्रतीक है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 14 घंटे पहले
  2. कल
  3. कल
  4. कल
  5. कल
  6. कल
  7. कल
  8. कल