3 अगस्त 2026
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1993 बोवबाजार बम ब्लास्ट: रशीद खान की रिहाई के खिलाफ पश्चिम बंगाल सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची

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1993 बोवबाजार बम ब्लास्ट: रशीद खान की रिहाई के खिलाफ पश्चिम बंगाल सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची

सारांश

1993 के बोवबाजार बम ब्लास्ट में आजीवन कारावास काट रहे मोहम्मद रशीद खान को दिल्ली उच्च न्यायालय ने 33 साल बाद रिहाई का हकदार माना — लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार ने इसे सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी। यह मामला अब टाडा-युग के दोषियों की सजा समीक्षा की सीमाओं पर एक बड़ा कानूनी सवाल बन गया है।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल सरकार ने 18 जून 2026 को सर्वोच्च न्यायालय में SLP दाखिल कर दिल्ली उच्च न्यायालय के रिहाई आदेश को चुनौती दी।
मोहम्मद रशीद खान 1993 बोवबाजार बम विस्फोट के दोषी हैं और मार्च 1993 से 33 वर्षों से अधिक समय से जेल में बंद हैं।
न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा की पीठ ने 5 जून को आदेश दिया था कि अच्छे आचरण और पुनर्वास के आधार पर रशीद खान रिहाई के हकदार हैं।
राज्य सजा समीक्षा बोर्ड ने 2015 में रिहाई की सिफारिश की थी, जिसे बाद में टाडा से जुड़े कानूनी विवादों के कारण वापस लिया गया।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने राज्य को SLP पर शीघ्र सुनवाई का आश्वासन दिया।

पश्चिम बंगाल सरकार ने 18 जून 2026 को सर्वोच्च न्यायालय में एक विशेष अनुमति याचिका (SLP) दाखिल कर दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें 1993 बोवबाजार बम विस्फोट मामले के दोषी मोहम्मद रशीद खान को रिहा करने और सजा में छूट देने का निर्देश दिया गया था। राज्य सरकार ने भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के समक्ष मामले का उल्लेख कर शीघ्र सुनवाई की माँग की।

मामले की पृष्ठभूमि

मोहम्मद रशीद खान मार्च 1993 से जेल में बंद हैं — यानी 33 वर्षों से अधिक समय से। राज्य सजा समीक्षा बोर्ड ने 2015 में उनकी रिहाई की सिफारिश की थी, लेकिन टाडा मामलों से जुड़े कानूनी विवादों के कारण वह सिफारिश बाद में वापस ले ली गई। यह मामला तीन दशकों से न्यायिक प्रक्रिया में उलझा रहा है।

दिल्ली उच्च न्यायालय का आदेश

5 जून को न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा की एकल पीठ ने आदेश दिया कि रशीद खान रिहाई के हकदार हैं। अदालत ने कहा कि जेल में उनका आचरण 'बहुत अच्छा' रहा है और पैरोल पर रिहाई के दौरान वे समय पर वापस लौटे, जिससे पुनरावृत्ति का जोखिम न्यूनतम प्रतीत होता है। उच्च न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि अपराध की गंभीरता को रिहाई से इनकार का एकमात्र आधार नहीं बनाया जा सकता, यदि अन्य सभी मानदंड पूरे होते हों।

पश्चिम बंगाल सरकार का पक्ष

राज्य सरकार ने रिहाई का विरोध करते हुए तर्क दिया कि रशीद खान इस विस्फोट का मास्टरमाइंड था और इस अपराध का समाज पर गंभीर प्रभाव पड़ा था। सर्वोच्च न्यायालय में SLP दाखिल कर राज्य ने उच्च न्यायालय के निर्देश पर रोक लगाने की माँग की है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने राज्य की दलीलें सुनने के बाद आश्वासन दिया कि याचिका पर शीघ्र सुनवाई पर विचार किया जाएगा।

कानूनी महत्व

यह मामला एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न उठाता है — क्या आतंकवाद से जुड़े गंभीर अपराधों में दीर्घकालिक कारावास और अच्छे आचरण के आधार पर सजा माफी दी जा सकती है? गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब टाडा-युग के मामलों में सजा समीक्षा की प्रक्रिया और मानदंड देशभर में न्यायिक विमर्श का हिस्सा बने हुए हैं।

आगे क्या होगा

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा SLP पर सुनवाई की तारीख जल्द तय होने की उम्मीद है। तब तक दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश पर सर्वोच्च न्यायालय का रुख स्पष्ट होगा। यह फैसला भविष्य में टाडा और इसी तरह के विशेष कानूनों के तहत दोषियों की सजा समीक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

अच्छा आचरण और पुनर्वास के स्पष्ट संकेत दंड-शास्त्र के मानकों पर खरे उतरते हैं। लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार का सर्वोच्च न्यायालय जाना यह भी दर्शाता है कि आतंकवाद-संबंधी अपराधों में 'गंभीरता बनाम पुनर्वास' की बहस अभी सुलझी नहीं है। टाडा-युग के मामलों में सजा समीक्षा के मानदंड अभी तक स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं हैं, और यह मामला उस खालीपन को भरने का अवसर बन सकता है। सर्वोच्च न्यायालय का फैसला केवल रशीद खान तक सीमित नहीं रहेगा — यह देशभर में ऐसे दर्जनों मामलों के लिए मिसाल बनेगा।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1993 बोवबाजार बम विस्फोट मामला क्या है?
1993 में कोलकाता के बोवबाजार इलाके में हुए बम विस्फोट के इस मामले में मोहम्मद रशीद खान को दोषी ठहराया गया था और आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। वे मार्च 1993 से जेल में बंद हैं, यानी 33 वर्षों से अधिक समय से।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने रशीद खान को रिहाई का हकदार क्यों माना?
न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा की पीठ ने 5 जून को कहा कि रशीद खान का जेल में आचरण 'बहुत अच्छा' रहा है, पैरोल पर समय पर वापसी हुई है और पुनर्वास के मानदंड पूरे होते हैं। अदालत ने यह भी कहा कि अपराध की गंभीरता अकेले रिहाई से इनकार का आधार नहीं बन सकती।
पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में क्यों चुनौती दी?
राज्य सरकार का कहना है कि रशीद खान इस विस्फोट का मास्टरमाइंड था और इस अपराध का समाज पर गंभीर प्रभाव पड़ा था। इसी आधार पर सरकार ने दिल्ली उच्च न्यायालय के 5 जून के आदेश को SLP के जरिये सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है।
राज्य सजा समीक्षा बोर्ड की 2015 की सिफारिश क्यों वापस ली गई थी?
राज्य सजा समीक्षा बोर्ड ने 2015 में रशीद खान की रिहाई की सिफारिश की थी, लेकिन टाडा (आतंकवाद निरोधक अधिनियम) से जुड़े कानूनी विवादों के कारण यह सिफारिश बाद में वापस ले ली गई।
इस मामले में अब आगे क्या होगा?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने पश्चिम बंगाल सरकार की SLP पर शीघ्र सुनवाई का आश्वासन दिया है। सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय टाडा-युग के अन्य मामलों में सजा समीक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल स्थापित कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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