क्या भारत की स्वतंत्र विदेश नीति हमारे राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देती है? शाहनवाज हुसैन

सारांश
Key Takeaways
- भारत का राष्ट्रीय हित सबसे पहले आता है।
- स्वतंत्र विदेश नीति का महत्व है।
- राजनीतिक आरोप का सही मूल्यांकन होना चाहिए।
- भ्रष्टाचार
- विपक्ष की रणनीतियाँ पर विचार करना चाहिए।
पटना, २४ अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता शाहनवाज हुसैन ने विदेश मंत्री एस जयशंकर के उस बयान का समर्थन किया जिसमें उन्होंने कहा है कि भारत से तेल खरीदने में जिनको दिक्कत है, वे न खरीदें।
शाहनवाज हुसैन ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि भारत की एक स्वतंत्र विदेश नीति है। हमने स्पष्ट किया है कि यदि हम किसी भी देश के साथ समझौता करते हैं, तो हम अपने राष्ट्रीय हितों या किसानों के हितों से समझौता नहीं कर सकते। भारत का हित पहले है, बाकी सब बाद में।
उन्होंने 'वोट चोरी' विवाद पर कहा कि जब कांग्रेस कर्नाटक, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, झारखंड या तमिलनाडु में जीतती है, तो चुनाव आयोग को अच्छा माना जाता है। लेकिन जब वे महाराष्ट्र, हरियाणा या दिल्ली में हारते हैं, तो आरोप लगाना शुरू कर देते हैं। उनके आरोपों से कुछ नहीं बदलेगा।
उन्होंने एसआईआर को लेकर मचे बवाल को बेबुनियाद बताते हुए कहा, "चुनाव आयोग अच्छी नीयत के साथ काम कर रहा है। आयोग ने कहा है कि जो वैध वोटर हैं उन्हें डरने की जरूरत नहीं है। इस मुद्दे पर जानबूझकर हंगामा किया जा रहा है।
उन्होंने पीएम-सीएम को पद से हटाने संबंधी बिल को लेकर विपक्ष की प्रतिक्रिया को गैर जरूरी बताया। उन्होंने कहा, "विपक्ष ने हर मुद्दे पर विवाद पैदा करने की रणनीति बना ली है। अगर भ्रष्टाचार के खिलाफ कोई कानून बनेगा, तो उसका सबसे ज्यादा विरोध टीएमसी, समाजवादी पार्टी के लोग करेंगे। इन लोगों ने भ्रष्टाचार को जैसे पेटेंट करा रखा है।"