क्या भारत ने अंडमान सागर में पहली ओपन-सी समुद्री मछली पालन परियोजना का शुभारंभ किया?

Click to start listening
क्या भारत ने अंडमान सागर में पहली ओपन-सी समुद्री मछली पालन परियोजना का शुभारंभ किया?

सारांश

भारत ने अंडमान सागर में पहली ओपन-सी समुद्री मछली पालन परियोजना का शुभारंभ किया है। इस पहल का उद्देश्य मछुआरों को सशक्त करना और ब्लू इकोनॉमी के विकास में योगदान देना है। यह परियोजना भारतीय समुद्री संसाधनों के महत्व को उजागर करती है।

Key Takeaways

  • भारत की पहली ओपन-सी समुद्री मछली पालन परियोजना का शुभारंभ हुआ है।
  • यह परियोजना मछुआरों को सशक्त करने की दिशा में है।
  • इससे ब्लू इकोनॉमी को बढ़ावा मिलेगा।
  • भारत के समुद्री संसाधनों का उचित उपयोग होगा।
  • यह पहल आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण होगी।

नई दिल्ली, 18 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने रविवार को अंडमान सागर में भारत की पहली ओपन-सी (खुले समुद्र में) समुद्री मछली पालन परियोजना का शुभारंभ किया।

यह देश की पहली पिंजरा-आधारित समुद्री मछली पालन योजना है। इसके अंतर्गत सरकार का उद्देश्य मछुआरों को सशक्त बनाना है।

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इसे भारत के विशाल समुद्री संसाधनों के माध्यम से ब्लू इकोनॉमी को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है, जिस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार जोर दिया है।

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने बताया कि इस परियोजना का शुभारंभ अंडमान सागर के खुले जल क्षेत्र के फील्ड दौरे के दौरान, नॉर्थ बे, श्री विजया पुरम में साइट पर ही किया गया।

इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह पहल भारत के समुद्रों की आर्थिक क्षमता के द्वार खोलने के लिए उठाए गए शुरुआती और सबसे महत्वपूर्ण कदमों में से एक है।

उन्होंने आगे कहा कि भारत के समुद्रों में भी, हिमालय और मुख्य भूमि के संसाधनों की तरह, विशाल और विविध आर्थिक संभावनाएं मौजूद हैं, जिन पर दशकों तक उचित ध्यान नहीं दिया गया था।

केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, स्वतंत्रता के बाद लगभग 70 वर्षों तक, भारत के समुद्री संसाधन काफी हद तक अनछुए रहे। 2014 के बाद से, राष्ट्रीय सोच में एक बुनियादी बदलाव आया है, जिसमें यह स्वीकार किया गया है कि भारत का समुद्री क्षेत्र आर्थिक विकास के लिए समान रूप से संपदा और अवसर रखता है।

उन्होंने आगे भारत के समुद्रों की विशिष्ट और विविधतापूर्ण प्रकृति पर प्रकाश डाला और कहा कि पश्चिमी, दक्षिणी और पूर्वी तटों में से प्रत्येक की अपनी अलग विशेषताएं हैं और वे देश के विकास में अद्वितीय योगदान देने की क्षमता रखते हैं।

इस परियोजना को भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, इसकी तकनीकी शाखा राष्ट्रीय समुद्र प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईओटी) और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह प्रशासन के बीच सहयोग के माध्यम से कार्यान्वित किया जा रहा है। यह पायलट पहल प्राकृतिक समुद्री परिस्थितियों में समुद्री फिनफिश और समुद्री शैवाल की ओपन-सी खेती पर केंद्रित है, जो वैज्ञानिक नवाचार को आजीविका सृजन के साथ जोड़ती है।

बता दें, एनआईओटी द्वारा ही मछुआरा समुदायों को सशक्त बनाने के लिए उन्नत ओपन-सी केज (खुले समुद्र में पिंजरा) तकनीक लाई गई है।

Point of View

बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगी।
NationPress
18/01/2026

Frequently Asked Questions

अंडमान सागर में ओपन-सी समुद्री मछली पालन परियोजना का उद्देश्य क्या है?
इस परियोजना का उद्देश्य मछुआरों को सशक्त करना और ब्लू इकोनॉमी के विकास में योगदान देना है।
इस परियोजना का शुभारंभ किसने किया?
इस परियोजना का शुभारंभ केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने किया।
इस परियोजना में किन संस्थाओं का सहयोग है?
इस परियोजना में भारत सरकार का पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, राष्ट्रीय समुद्र प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईओटी) और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह प्रशासन का सहयोग है।
Nation Press