बिहार बाढ़: बगहा में बांध टूटने पर पप्पू यादव बोले — 'यह प्राकृतिक नहीं, पॉलिटिकल डिजास्टर है'
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम चंपारण के बगहा विधानसभा क्षेत्र के खेरटवा गांव में बांध टूटने के बाद 29 सितंबर 2026 को कई गांवों में बाढ़ का पानी फैल गया और जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया। पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव मंगलवार को बाढ़ प्रभावित इलाके में पहुंचे, पीड़ितों से मिले और सहयोग किया। उन्होंने इस आपदा को 'प्राकृतिक' नहीं, बल्कि 'पॉलिटिकल डिजास्टर' करार दिया।
बांध क्यों टूटा — पप्पू यादव के आरोप
मीडिया से बातचीत में पप्पू यादव ने बांध की गुणवत्ता और सरकारी तैयारियों पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि फ्लड फाइटिंग के नाम पर करोड़ों-अरबों रुपये के बिल बनाए जाते हैं, फिर भी बांध बार-बार टूट रहा है। उनके अनुसार यह बांध 2024 में भी टूटा था और अब 2026 में एक बार फिर ध्वस्त हो गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि बांध पर ठोकर न होने के कारण गंडक नदी के पानी का दबाव बढ़ रहा है। उनकी माँग है कि बांध निर्माण एवं मरम्मत से जुड़े ठेकेदारों और विभागीय अधिकारियों की भूमिका की जाँच हो और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
खतरे का आकलन — गंडक उफान का खतरा
पप्पू यादव ने चेतावनी दी कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में घरों में छाती तक पानी पहुंच गया है और गंडक नदी महज 300-400 मीटर की दूरी पर है। उन्होंने कहा कि यदि ऊपर से 6 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया, तो बगहा और वाल्मीकि नगर के बड़े हिस्से के लिए अत्यंत गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है।
उन्होंने दावा किया कि नौतन, बेतिया और करीब 12 किलोमीटर लंबे रजभटिया से रतवल तक के बांध के कई हिस्सों में बोल्डर नहीं लगाए गए हैं — जो उनके अनुसार बार-बार होने वाले टूटाव का प्रमुख कारण है।
आम जनता और किसानों पर असर
बाढ़ से किसानों की हजारों एकड़ जमीन और गन्ने की फसल बुरी तरह प्रभावित हुई है। पप्पू यादव ने बताया कि पीड़ितों को दूध, नाव, मवेशियों के लिए भूसा, पन्नी और पर्याप्त चिकित्सा सुविधा तक नहीं मिल रही। उनके अनुसार गोपालगंज, बगहा, वाल्मीकि नगर, बेतिया, मोतिहारी के साथ-साथ मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी और मिथिला क्षेत्र में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
स्थायी समाधान की माँग
पप्पू यादव ने स्पष्ट किया कि बाढ़ की समस्या केवल राहत सामग्री बांटने से हल नहीं होगी। उन्होंने माँग की कि नदियों में जमा गाद हटाई जाए, ठोकर और गार्ड बांध बनाए जाएं और बैराजों को मजबूत किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र में कई प्रभावशाली जनप्रतिनिधि होने के बावजूद जनता हर साल बाढ़ की त्रासदी झेलने को मजबूर है।
गौरतलब है कि 2024 के बाद 2026 में दोबारा यही बांध टूटना सरकारी दावों पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। पप्पू यादव ने कहा कि दशकों से इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ है और इसे केवल प्राकृतिक आपदा बताकर जिम्मेदारी से नहीं बचा जा सकता। आने वाले दिनों में गंडक के जलस्तर और प्रशासनिक राहत कार्यों पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।