बिहार बाढ़ पर पप्पू यादव का हमला: 'गाद नासा ने नहीं, बिहार की व्यवस्था ने जमा की'
सारांश
मुख्य बातें
पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने 5 अक्टूबर 2026 को पटना में एक प्रेस वार्ता के दौरान बिहार में बाढ़ और बाढ़ नियंत्रण के नाम पर होने वाले खर्च को लेकर राज्य एवं केंद्र सरकार पर तीखे आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बाढ़ के स्थायी समाधान की बजाय हर वर्ष राहत और निर्माण के नाम पर करोड़ों रुपए बहाए जा रहे हैं, फिर भी समस्या जस की तस बनी हुई है।
नासा पर तंज और व्यवस्था पर सवाल
पप्पू यादव ने उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी के कथित बयान पर कटाक्ष करते हुए कहा कि यदि बिहार में बारिश और बाढ़ के लिए नासा जिम्मेदार है, तो नदियों में जमा गाद के लिए भी नासा ही जिम्मेदार होगा। उन्होंने सवाल किया कि एंटी-इरोशन के नाम पर एक करोड़ रुपए से अधिक खर्च हुए हैं, तो क्या वह धनराशि भी नासा लेकर चला गया? यह तंज उस राजनीतिक संस्कृति पर था जो जवाबदेही से बचने के लिए बाहरी कारणों का सहारा लेती है।
भ्रष्टाचार और ठेकेदारी पर सीधे आरोप
सांसद ने आरोप लगाया कि 1990 से अब तक बिहार में जाति, धर्म और मज़हब के नाम पर 'खुली लूट' हुई है। उन्होंने यह भी पूछा कि हर साल एक ही स्थान पर बाँध क्यों टूटता है और बार-बार उसी ठेकेदार को काम क्यों दिया जाता है। उन्होंने नेताओं, मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और अधिकारियों की भूमिका की जाँच की माँग करते हुए कहा कि बाढ़ बिहार के लिए 'नासूर' बन चुकी है और इस वर्ष तीन बार बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो चुकी है।
फरक्का संधि और केंद्रीय सहायता का मुद्दा
पप्पू यादव ने यह भी रेखांकित किया कि फरक्का संधि दिसंबर में समाप्त हो रही है, किंतु बिहार की बाढ़ समस्या के स्थायी समाधान को लेकर कोई गंभीर पहल नहीं हो रही। उन्होंने सवाल उठाया कि असम, पंजाब और नेपाल को केंद्रीय सहायता मिलती है, तो बिहार को क्यों नहीं। उनके दावे के अनुसार, 2008 में तत्कालीन केंद्र सरकार ने बिहार की बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित कर ₹1,000 करोड़ जारी किए थे, जबकि 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ₹5,000 करोड़ की घोषणा की थी — लेकिन उनके अनुसार वह राशि बिहार को नहीं मिली। सरकार की ओर से इन दावों पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राजनीतिक दलों पर निशाना
पप्पू यादव ने कहा कि चुनाव के समय भारतीय जनता पार्टी (BJP) हिंदू-मुसलमान का मुद्दा उठाती है, लेकिन बाढ़ आने पर उसका हिंदुत्व 'डूब जाता है।' उसी तरह विपक्ष भी चुनाव में जाति की राजनीति करता है, लेकिन बाढ़ में उसकी जाति भी 'डूब जाती है।' उन्होंने आरोप लगाया कि नेता चुनाव के समय हेलीकॉप्टर से जनता के बीच पहुँचते हैं, परंतु आपदा के समय संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का अभाव स्पष्ट दिखता है।
पप्पू यादव का दावा और माँगें
सांसद ने बताया कि उन्होंने छपरा और नौतन में करीब ₹60 लाख की व्यक्तिगत सहायता दी है और टूटे घरों के लिए ₹10,000 से ₹25,000 तक की मदद पहुँचाई है। उन्होंने अन्य सांसदों पर सवाल उठाया कि जिनके पास पर्याप्त संसाधन हैं, उन्होंने बाढ़ पीड़ितों के लिए क्या किया। उनके अनुसार, वह इस संबंध में करीब 50 पत्र लिख चुके हैं और सर्वोच्च न्यायालय में भी याचिका दाखिल कर चुके हैं। उन्होंने 1990 के बाद बिहार में रहे सिंचाई मंत्रियों और अधिकारियों की संपत्ति की जाँच की माँग भी की। गौरतलब है कि बिहार में बाढ़ का यह संकट हर वर्ष लाखों परिवारों को विस्थापित करता है, और इस बार तीन-तीन बाढ़ की स्थितियों ने स्थायी समाधान की माँग को और तीव्र कर दिया है।