बिहार में एनीमिया से ग्रस्त गर्भवती महिलाओं के लिए एफसीएम थेरेपी की शुरुआत: मंगल पांडेय
सारांश
Key Takeaways
- एफसीएम थेरेपी गर्भवती महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण चिकित्सा है।
- यह एनीमिया के कारण होने वाले जोखिम को कम करती है।
- स्वास्थ्य विभाग ने विभिन्न नर्सिंग कॉलेजों और आशा कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर यह पहल शुरू की है।
- इससे सुरक्षित मातृत्व और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित होंगी।
- बिहार में 'एनीमिया मुक्त बिहार' का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए उपाय किए जा रहे हैं।
पटना, २६ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। बिहार में गर्भवती महिलाओं में एनीमिया, जिसे खून की कमी कहा जाता है, की गंभीर समस्या के समाधान के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एक नई पहल शुरू की है। इस पहल में शामिल है फेरिक कार्बोसीमाल्टोज इंजेक्शन (एफसीएम) थेरेपी।
एफसीएम थेरेपी उन गर्भवती महिलाओं के लिए एक सुरक्षा कवच साबित होगी, जो खून की कमी के चलते प्रसव के समय जोखिम में होती हैं। बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने गुरुवार को पटना में राज्यस्तरीय फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज (एफसीएम) थेरेपी अभियान का शुभारंभ किया।
इस मौके पर विभिन्न नर्सिंग कॉलेज के छात्र, आशा कार्यकर्ता और राज्य के सभी जिलों के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि यह पहल एनीमिया के प्रभावी उपचार और त्वरित प्रबंधन के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने बताया कि बिहार में एफसीएम थेरेपी गर्भवती महिलाओं के लिए सुरक्षा कवच बनेगी। उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार ने सुरक्षित मातृत्व और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए इस अभियान का संकल्प लिया है। इस थेरेपी के माध्यम से गंभीर एनीमिया से ग्रसित महिलाओं को समय पर प्रभावी उपचार प्रदान किया जाएगा, जिससे प्रसव के समय होने वाले जोखिम में कमी आएगी।
उन्होंने बताया कि 'एनीमिया मुक्त बिहार' के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जिला अस्पतालों एवं प्रथम रेफरल इकाइयों में उचित व्यवस्थाएं की गई हैं। इसी क्रम में, गयाजी के एक अस्पताल में गर्भवती महिलाओं को एफसीएम थेरेपी प्रदान की गई। इस अवसर पर सिविल सर्जन डॉ. राजराम प्रसाद और अन्य वरीय स्वास्थ्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।
सिविल सर्जन डॉ. राजराम प्रसाद ने बताया कि एनीमिया से प्रभावित सभी गर्भवती महिलाओं को यह थेरेपी देने की सभी आवश्यक व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने कहा कि जिला स्वास्थ्य संस्थानों जैसे जिला अस्पताल और प्रथम रेफरल इकाई में बीस बेड की व्यवस्था की गई है। उन्होंने जानकारी दी कि अभियान के प्रारंभ होते ही अस्पताल में 20 एनीमिया से ग्रसित गर्भवती महिलाओं को एफसीएम थेरेपी दी गई, साथ ही आवश्यक दवाएं भी उपलब्ध कराई गई।