बिहार पंचायत टैक्स पर राजद सांसद सुधाकर सिंह का हमला, बोले— 'जजिया टैक्स' जैसा नया बोझ
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद सुधाकर सिंह ने 18 जुलाई को बिहार सरकार के ग्रामीण पंचायत टैक्स की कड़े शब्दों में निंदा की और इसे गरीब ग्रामीणों पर थोपा गया अनावश्यक आर्थिक बोझ करार दिया। उन्होंने इस टैक्स की तुलना मुगल काल के 'जजिया टैक्स' से करते हुए कहा कि जो लोग पहले से बिजली, मोबाइल और नमक जैसी जरूरी चीजों पर कर चुका रहे हैं, उन पर एक और नया कर लगाना सर्वथा अनुचित है।
पंचायत टैक्स पर मुख्य आपत्तियाँ
सुधाकर सिंह ने कहा कि गरीब किसानों के पास नकद धन नहीं होता — वे खेती की उपज से गुजारा करते हैं और थोड़ी बचत होने पर कपड़े जैसी बुनियादी ज़रूरतें पूरी करते हैं। उनके अनुसार, ऐसे लोगों से हर महीने टैक्स वसूलना 'जनता के साथ खुला अन्याय' है।
उन्होंने यह भी तर्क दिया कि सरकार पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने की दुहाई देती है, जबकि पंचायतों के लिए पहले से ही लगभग ₹12,500 करोड़ का वार्षिक बजट निर्धारित है। उनका आरोप है कि टैक्स वसूली के नाम पर गाँव-गाँव में नए कर्मचारी तैनात किए जाएंगे, जिससे भ्रष्टाचार में और इज़ाफा होगा।
सोनम वांगचुक और नीट विवाद पर निशाना
राजद सांसद ने सोनम वांगचुक के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल और उनके अस्पताल में भर्ती होने के मसले पर भी केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने प्रधानमंत्री से सवाल किया कि आखिर किन परिस्थितियों में वांगचुक को इस कदम तक जाना पड़ा।
नीट पेपर लीक प्रकरण पर सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित कई परीक्षाओं में पेपर लीक के आरोप लगे हैं। उनके अनुसार, सरकार ने न तो इस मामले में माफी माँगी और न ही दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की — यह रवैया लोकतंत्र की भावना के विरुद्ध है।
आरएसएस और परिसीमन पर बयान
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के उस बयान पर, जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को 'राष्ट्रसेवा' करने वाला संगठन बताया था, सुधाकर सिंह ने कहा कि देश में सभी संगठनों के लिए एक समान कानून होना चाहिए। उनका कहना था कि यदि किसी संगठन को गतिविधियाँ चलाने के लिए अनुमति लेनी पड़ती है, तो वही नियम बिना भेदभाव के सभी पर लागू होना चाहिए।
परिसीमन के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि यह किसी एक दल का नहीं, बल्कि पूरे देश का विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व में भी कुछ राज्यों में परिसीमन के दौरान भेदभाव हुआ था, और यदि सरकार गैरकानूनी तरीके से परिसीमन विधेयक पारित कराने की कोशिश करती है, तो राजद इसका पुरज़ोर विरोध करेगी।
आगे की राजनीतिक दिशा
सुधाकर सिंह के ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब बिहार में 2025 के विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि में विपक्ष सरकारी नीतियों पर आक्रामक तेवर अपना रहा है। गौरतलब है कि पंचायत टैक्स जैसे मुद्दे ग्रामीण मतदाताओं को सीधे प्रभावित करते हैं और विपक्ष के लिए जमीनी लामबंदी का अवसर बन सकते हैं।