भाजपा का राहुल गांधी पर हमला: 'सत्ता परिवर्तन का जुनून राजनीतिक गुमनामी में ले जाएगा'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेताओं ने 1 नवंबर 2026 को विपक्षी रैली और इंडिया गठबंधन पर एकजुट होकर तीखा प्रहार किया। मुख्तार अब्बास नकवी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को निशाने पर लेते हुए कहा कि सरकार बदलने का उनका जुनून उन्हें राजनीतिक अप्रासंगिकता की राह पर धकेल रहा है। सैयद शाहनवाज हुसैन ने इंडिया गठबंधन को 'हारे और थके हुए नेताओं का मंच' बताया, जबकि सिद्धार्थ नाथ सिंह ने विपक्षी आयोजन को 'मॉक रैली' की संज्ञा दी।
नकवी का राहुल गांधी पर सीधा हमला
भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा, 'सत्ता परिवर्तन का उनका जुनून और सरकार को उखाड़ फेंकने की उनकी महत्वाकांक्षा अंततः उन्हें राजनीतिक गुमनामी में ले जाएगी।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि अब राहुल गांधी को स्वयं यह बात स्पष्ट हो चुकी है कि जनता उन्हें जनादेश देने की स्थिति में नहीं है।
नकवी ने समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्होंने जो कहा और जो किया, उस पर फैसला अदालत करेगी। आलोचकों का कहना है कि भाजपा का यह हमला ऐसे समय में आया है जब विपक्ष अपनी एकजुटता दिखाने की कोशिश कर रहा है।
हुसैन ने इंडिया गठबंधन को बताया 'थकी हुई शक्तियों का जमावड़ा'
भाजपा के वरिष्ठ नेता सैयद शाहनवाज हुसैन ने कहा कि तेजस्वी यादव, अरविंद केजरीवाल और ममता बनर्जी ऐसे नेता हैं जो चुनाव हार चुके हैं। उन्होंने अखिलेश यादव पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वे दो चुनाव गँवा चुके हैं और तीसरा भी हारने की राह पर हैं। हुसैन के अनुसार, इंडिया गठबंधन 'हारे और थके हुए लोगों का गठबंधन' बनकर रह गया है।
गौरतलब है कि यह बयान विपक्षी दलों की सामूहिक रैली के ठीक बाद आया है, जिसे इंडिया गठबंधन ने अपनी राजनीतिक उपस्थिति दर्ज कराने के लिए आयोजित किया था।
सिद्धार्थ नाथ सिंह की 'मॉक रैली' वाली टिप्पणी और संसद में बहस की चुनौती
सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि विपक्ष ने पहले 'मॉक पार्लियामेंट' आयोजित की और अब 'मॉक रैली' कर रहा है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि विपक्ष चाहे तो 'मॉक प्रधानमंत्री', 'मॉक स्पीकर' और 'मॉक गृहमंत्री' भी बना ले — इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।
सिंह ने राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन को याद दिलाया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में CAA-NRC पर खुली बहस का न्योता दिया है। उन्होंने कहा, 'मॉक मत करो, आकर संसद में बहस करो — यही असली चुनौती है।'
राहुल गांधी पर 'व्यापार-विरोधी' का आरोप
सिद्धार्थ नाथ सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि राहुल गांधी भारतीय व्यापारियों के विरुद्ध हैं जबकि विदेशी व्यापारियों के पक्ष में खड़े रहते हैं। उन्होंने कहा कि राहुल का हालिया बयान व्यापारी-समर्थक नहीं, बल्कि व्यापारी-विरोधी था। यह ऐसे समय में आया है जब भाजपा लगातार विपक्ष को देशहित के खिलाफ खड़ा करने की रणनीति अपना रही है।
आगे क्या
भाजपा के इन हमलों के बाद कांग्रेस और इंडिया गठबंधन की ओर से प्रतिक्रिया अपेक्षित है। संसद के अगले सत्र में CAA-NRC पर बहस की चुनौती स्वीकार होती है या नहीं, यह देखने वाली बात होगी। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, भाजपा का यह आक्रामक रुख आगामी चुनावों की तैयारी का हिस्सा हो सकता है।