1 नवंबर 2026
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शिवसेना प्रवक्ता आनंद दुबे का विपक्षी रैली पर हमला: 'इंडी गठबंधन नहीं, ठगबंधन है'

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शिवसेना प्रवक्ता आनंद दुबे का विपक्षी रैली पर हमला: 'इंडी गठबंधन नहीं, ठगबंधन है'

सारांश

शिवसेना प्रवक्ता आनंद दुबे ने दीपावली के मौसम में दिल्ली में हुई विपक्षी रैली को 'अवरोध प्रदर्शन' बताया और इंडी गठबंधन को 'ठगबंधन' करार दिया। भीड़ के आँकड़ों, महाकुंभ के अपमान और '20-30 साल नो वैकेंसी' जैसे तंज के साथ यह बयान सत्तापक्ष की आक्रामक जवाबी रणनीति का हिस्सा है।

मुख्य बातें

शिवसेना प्रवक्ता आनंद दुबे ने 1 नवंबर 2026 को दिल्ली में हुई विपक्षी रैली को 'अवरोध प्रदर्शन' करार दिया।
उन्होंने इंडी गठबंधन को 'ठगबंधन' बताया और रैली की तारीख पर सवाल उठाया — दीपावली, भाई दूज व छठ के बीच आयोजन को जानबूझकर बाधा डालने की कोशिश बताया।
दुबे ने दावा किया कि रैली में 50 हज़ार से कम लोग थे, जिन्हें 10 लाख बताया जा रहा है; महाकुंभ में 45 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं का हवाला दिया।
विपक्ष पर 'मॉक पार्लियामेंट' चलाने और संसद की चर्चाओं से बचने का आरोप लगाया।
सपा नेता आज़म खान पर ईडी की कार्रवाई को उचित ठहराया; कहा — न्यायालय का रास्ता खुला है।
दुबे ने कहा कि प्रधानमंत्री पद के लिए 20-30 साल तक 'नो वैकेंसी' है।

शिवसेना के प्रवक्ता आनंद दुबे ने 1 नवंबर 2026 को दिल्ली में हुई विपक्षी रैली पर तीखा प्रहार करते हुए इंडी गठबंधन को 'ठगबंधन' और इस रैली को 'विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि अवरोध प्रदर्शन' करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि दीपावली, भाई दूज और छठ जैसे प्रमुख त्योहारों के बीच जानबूझकर रैली आयोजित कर आम नागरिकों की खुशियों पर पानी फेरा गया।

रैली की तारीख पर सवाल

दुबे ने कहा, 'दिल्ली देश की राजधानी के साथ-साथ देश का दिल और धड़कन भी है। आपने 1 नवंबर इसलिए चुना है क्योंकि आपको पता है कि हिंदुओं और सनातनियों का सबसे बड़ा त्योहार दीपावली है। भाई दूज है, फिर कुछ ही दिनों बाद छठ है।' उनका कहना था कि यही रैली दस दिन पहले या दस दिन बाद भी की जा सकती थी, परंतु त्योहारी सीज़न में जानबूझकर आयोजन करके आम लोगों और व्यापारियों को नुकसान पहुँचाया गया।

भीड़ के आँकड़ों पर तंज

शिवसेना प्रवक्ता ने रैली में भीड़ के दावों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब 50 हज़ार लोग इकट्ठे हों तो उन्हें 10 लाख बताना सच्चाई से मुँह मोड़ना है। उन्होंने महाकुंभ का संदर्भ देते हुए कहा कि जहाँ 45 करोड़ से ज़्यादा श्रद्धालु आए, उस महाकुंभ का अपमान करने वाले अब लाखों की रैली का दावा कर रहे हैं। दुबे का कहना था कि दिल्ली की जनता का समर्थन होता तो पूरे भारत से ट्रेन और बसों में भरकर लोगों को लाने की ज़रूरत नहीं पड़ती।

लोकतंत्र और संसद पर आरोप

दुबे ने विपक्ष पर लोकतंत्र को कमज़ोर करने का आरोप भी लगाया। उनके अनुसार संसद में चर्चा का निमंत्रण मिलने पर विपक्ष नहीं आता और बाहर 'मॉक पार्लियामेंट' चलाता है जिसमें 'नकली प्रधानमंत्री' और 'नकली सरकार' बनाई जाती है। उन्होंने कहा, 'ऐसे देश नहीं चलता। यहाँ चुनाव लड़ना पड़ता है, लोगों का विश्वास जीतना पड़ता है।'

प्रधानमंत्री पद और भविष्य की राजनीति

दुबे ने सत्ता पर विपक्ष की दावेदारी को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि 20-30 साल तक प्रधानमंत्री पद के लिए 'नो वैकेंसी' है। उन्होंने कहा कि जनता सब देख रही है और रैलियों से कुछ हासिल नहीं होगा।

आज़म खान और जाँच एजेंसियाँ

समाजवादी पार्टी (सपा) नेता आज़म खान के संदर्भ में दुबे ने कहा कि देश की जाँच एजेंसियों की यह जिम्मेदारी है कि सार्वजनिक धन का दुरुपयोग न हो। उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई पर आपत्ति जताने की बजाय अगर कोई बेकसूर है तो न्यायालय का रास्ता खुला है। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष लगातार केंद्रीय जाँच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाता रहा है। दुबे की यह प्रतिक्रिया उस बहस को और तीखा करती है जो सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लंबे समय से जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह तथ्य कि विपक्ष को रैली करने का संवैधानिक अधिकार है, इस बयान में कहीं स्वीकार नहीं होता। भीड़ के आँकड़ों पर बहस दोनों पक्षों में आम है, पर असली सवाल यह है कि सार्वजनिक विरोध की वैधता को ट्रैफिक जाम और त्योहारी बाधा से तोला जाए या लोकतांत्रिक मूल्यों से — यह बहस आगे और तीखी होगी।
RashtraPress
1 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शिवसेना प्रवक्ता आनंद दुबे ने विपक्षी रैली को 'अवरोध प्रदर्शन' क्यों कहा?
दुबे ने दिल्ली में हुई विपक्षी रैली को 'विरोध नहीं, अवरोध प्रदर्शन' इसलिए कहा क्योंकि उनके अनुसार इसे दीपावली, भाई दूज और छठ जैसे त्योहारों के बीच जानबूझकर आयोजित किया गया, जिससे आम नागरिकों, व्यापारियों और ट्रेड यूनियनों को यातायात जाम और आजीविका के नुकसान का सामना करना पड़ा।
दुबे ने इंडी गठबंधन को 'ठगबंधन' क्यों बताया?
शिवसेना प्रवक्ता ने इंडी गठबंधन को 'ठगबंधन' इसलिए कहा क्योंकि उनके अनुसार यह गठजोड़ जनता को भ्रमित करने की राजनीति करता है — संसद की चर्चाओं से बचता है, 'मॉक पार्लियामेंट' चलाता है और भीड़ के आँकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करता है।
रैली में भीड़ को लेकर दुबे ने क्या दावा किया?
दुबे ने दावा किया कि रैली में 50 हज़ार से कम लोग थे, जबकि विपक्ष उन्हें 10 लाख बता रहा है। उन्होंने महाकुंभ का उदाहरण देते हुए कहा कि जहाँ 45 करोड़ से ज़्यादा लोग आए उस आयोजन का अपमान करने वाले अब लाखों की भीड़ का दावा नहीं कर सकते।
आज़म खान पर ईडी की कार्रवाई को लेकर दुबे ने क्या कहा?
दुबे ने सपा नेता आज़म खान पर ईडी की कार्रवाई को उचित ठहराया और कहा कि देश की जाँच एजेंसियों की जिम्मेदारी है कि सार्वजनिक धन का दुरुपयोग न हो। उन्होंने कहा कि अगर कोई बेकसूर है तो न्यायालय का रास्ता खुला है।
दुबे ने विपक्ष के प्रधानमंत्री बनने की संभावना पर क्या कहा?
दुबे ने कहा कि प्रधानमंत्री पद के लिए 20-30 साल तक 'नो वैकेंसी' है। उनके अनुसार जनता सब देख रही है और रैलियों से सत्ता नहीं मिलती — इसके लिए चुनाव जीतना और काम करके दिखाना पड़ता है।
राष्ट्र प्रेस
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