एसआईआर विवाद: भाजपा का सवाल — क्या कांग्रेस का अस्तित्व रोहिंग्या और घुसपैठियों के फर्जी वोटों पर टिका है?
सारांश
मुख्य बातें
बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने 3 नवंबर 2026 को पटना में तीखा सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस का पूरा राजनीतिक अस्तित्व रोहिंग्या और अवैध घुसपैठियों के फर्जी वोटों पर टिका है। यह बयान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस वक्तव्य के समर्थन में आया, जिसमें शाह ने आरोप लगाया था कि विपक्षी दल विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का विरोध इसलिए कर रहे हैं क्योंकि अवैध घुसपैठिए उनका वोट बैंक हैं।
भाजपा की मुख्य दलीलें
सरावगी ने कहा, 'अमित शाह हर मंच से बार-बार यही बात कह रहे हैं लेकिन विपक्ष को न तो दिखाई दे रहा है और न ही सुनाई दे रहा है।' उनका तर्क था कि गृह मंत्री ने स्पष्ट किया है कि तीन करोड़ फर्जी, मृत और अवैध घुसपैठियों के बोगस नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, फिर भी विपक्ष आपत्ति जता रहा है।
सरावगी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस शासित राज्यों में ही एसआईआर को उचित माना जा रहा है। उनके अनुसार, कर्नाटक में एक करोड़ नाम काटे गए हैं और वहाँ के वरिष्ठ मंत्री स्वयं कह रहे हैं कि एसआईआर सही हुआ। इसी प्रकार केरल के मंत्री भी इसे सही ठहरा रहे हैं।
बिहार के संदर्भ में दावे
सरावगी ने दावा किया कि बिहार में जिन लोगों के नाम काटे गए हैं, वे या तो मृत थे, स्थायी रूप से अन्यत्र स्थानांतरित हो चुके थे, अथवा उनका नाम दो जगह दर्ज था। उनके अनुसार, विपक्ष एक भी ऐसा व्यक्ति सामने नहीं ला सका जो यह कह सके कि वह जीवित मतदाता है और उसका नाम गलत तरीके से काटा गया।
सरावगी ने चेतावनी दी कि जो नेता देश की सुरक्षा और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया के बजाय विदेशी घुसपैठियों की ढाल बनकर खड़ा होगा, उसे 140 करोड़ भारतीय कभी देश का नेतृत्व नहीं सौंपेंगे।
बिहार सरकार की प्रतिक्रिया
बिहार सरकार के मंत्री रामकृपाल यादव ने भी अमित शाह के बयान को सही ठहराया। उन्होंने कहा कि एसआईआर के दौरान तीन करोड़ ऐसे लोग पाए गए जिन्होंने कथित तौर पर अवैध तरीके से देश में अपना नाम जुड़वाकर राष्ट्रीय संसाधनों का लाभ उठाया। यादव ने कहा, 'खाएगा हमारा और गाएगा दूसरा, ऐसा नहीं चल सकता। कुछ विदेशी ताकतें घुसपैठियों के जरिए देश में अव्यवस्था फैलाने की कोशिश कर रही हैं।'
जदयू का संतुलित रुख
जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक ने कुछ अलग स्वर में बात की। उन्होंने कहा कि यह सवाल केवल राहुल गांधी या अमित शाह का नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र के काम करने का है। रजक के अनुसार, यदि कोई अवैध व्यक्ति मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने में सफल होता है, तो इसमें निर्वाचन से जुड़े अधिकारियों की भी जिम्मेदारी बनती है।
रजक ने कहा, 'भाषण देकर जनता को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है। सीधी सी बात है — जो गलत है वह गलत है और जो सही है वह सही है। केवल भाषणबाजी से किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता।' यह ऐसे समय में आया है जब एनडीए के भीतर एसआईआर पर राजनीतिक सहमति और प्रशासनिक जवाबदेही दोनों पर बहस जारी है।
आगे की राह
गौरतलब है कि एसआईआर के आंकड़ों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर विवाद गहराता जा रहा है। विपक्षी दल जहाँ इसे मतदाताओं के अधिकारों पर हमला बता रहे हैं, वहीं सत्तारूढ़ गठबंधन इसे मतदाता सूची की शुद्धता के लिए आवश्यक कदम करार दे रहा है। इस बहस का अगला पड़ाव संभवतः संसद में देखने को मिलेगा।