10 अक्टूबर 2026
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राहुल गांधी पर BJP का पलटवार: 'बिना सबूत राष्ट्रपति के पास क्यों गए?' — संबित पात्रा

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राहुल गांधी पर BJP का पलटवार: 'बिना सबूत राष्ट्रपति के पास क्यों गए?' — संबित पात्रा

सारांश

विपक्ष बिना सबूत राष्ट्रपति भवन पहुँचा, और बाहर निकलते ही राहुल गांधी ने ऐसा बयान दिया जिसे BJP ने 'नालायक नेता' का बयान करार दिया। संबित पात्रा का एक तीखा सवाल — 'अगर एक साल से वोट चोरी का दावा है, तो सबूत जेब में क्यों नहीं थे?' — विपक्ष की रणनीति पर सवालिया निशान लगाता है।

मुख्य बातें

BJP प्रवक्ता संबित पात्रा ने 10 अक्टूबर 2026 को प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी के बयान को 'नालायक नेता' का बयान करार दिया।
पात्रा ने कहा कि विपक्ष वोट चोरी के आरोप लगभग एक साल से लगा रहा है, लेकिन राष्ट्रपति भवन जाते वक्त कोई सबूत साथ नहीं था।
BJP ने राहुल गांधी पर संवैधानिक प्रोटोकॉल की अनदेखी का आरोप लगाया — ज्ञापन स्वीकार करना राष्ट्रपति की सहमति नहीं होती।
चुनाव आयोग की EVM हैक चुनौती में विपक्ष की अनुपस्थिति पर भी पात्रा ने निशाना साधा।
पात्रा ने सवाल उठाया कि क्या राहुल गांधी किसी उच्च संवैधानिक पद के लिए योग्य हैं।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बयान पर तीखा पलटवार किया। BJP ने आरोप लगाया कि गांधी का बयान न केवल 'नालायक नेता' जैसा था, बल्कि उन्होंने राष्ट्रपति पद की गरिमा के साथ-साथ बुनियादी संवैधानिक प्रोटोकॉल की भी अनदेखी की।

संबित पात्रा की प्रेस कॉन्फ्रेंस में तीखे सवाल

BJP प्रवक्ता संबित पात्रा ने नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'शुक्रवार को कुछ राजनेता राष्ट्रपति भवन गए थे। वहाँ से बाहर निकलने के बाद राहुल गांधी का बयान एक नालायक नेता के बयान के बराबर है। मैं नालायक नेता इसलिए कहता हूँ कि आपने झूठ बोला। प्रधानमंत्री के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल किया। जिस तरह संवैधानिक संस्थाओं और पदों के लिए जिस प्रकार के शब्दों का प्रयोग किया, वो पूरा देश देख रहा है।'

पात्रा ने यह भी कहा कि इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ कि राष्ट्रपति को 'सड़क की लड़ाई' में घसीटने का प्रयास किया गया हो। उनके अनुसार, राहुल गांधी ने यह दावा करते हुए एक गंभीर प्रोटोकॉल उल्लंघन किया कि 'राष्ट्रपति ने भी माना कि विपक्ष सच कह रहा है।'

प्रोटोकॉल का सवाल: ज्ञापन स्वीकार करना सहमति नहीं

पात्रा ने स्पष्ट किया कि जब भी कोई प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपने जाता है, तो राष्ट्रपति उसे स्वीकार करती हैं — यह एक मानक औपचारिक प्रक्रिया है और किसी भी तरह की सहमति नहीं। उन्होंने कहा, 'यह बेसिक प्रोटोकॉल है, लेकिन राहुल गांधी को यह भी समझ नहीं आता।'

पात्रा ने राहुल गांधी के उस बयान को भी उद्धृत किया जिसमें उन्होंने कहा था कि 'राष्ट्रपति ने बोला कि अगर कोई सबूत है तो वो भी दें।' BJP ने इसी बिंदु पर विपक्ष को घेरते हुए कहा कि अगर राष्ट्रपति ने सबूत माँगे, तो इसका अर्थ यह है कि विपक्ष बिना सबूत लेकर ही राष्ट्रपति भवन पहुँच गया था।

वोट चोरी के आरोपों पर BJP का सीधा हमला

पात्रा ने आगे कहा कि विपक्ष 'वोट चोरी' का मुद्दा लगभग एक साल से उठा रहा है, इसलिए सबूत उनकी 'जेब में होने चाहिए थे।' उन्होंने कहा, 'जब चुनाव आयोग बुलाता है और EVM को हैक करने की चुनौती देता है, तो विपक्ष के लोग गायब हो जाते हैं। जब राष्ट्रपति सबूत माँगती हैं, तो बाद में देने की बात होती है। अगर बाद में ही सबूत देने हैं, तो बिना सबूत के राष्ट्रपति के पास क्यों गए थे?'

यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) की विश्वसनीयता पर लगातार सवाल उठाते रहे हैं, हालाँकि चुनाव आयोग इन दावों को बार-बार खारिज करता रहा है।

राहुल गांधी की योग्यता पर सवाल

संबित पात्रा ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में यह सवाल उठाया कि क्या राहुल गांधी किसी उच्च संवैधानिक पद पर बैठने के योग्य हैं। गौरतलब है कि यह बयान ऐसे राजनीतिक माहौल में आया है जब विपक्षी गठबंधन और सत्तारूढ़ BJP के बीच संसदीय लड़ाई लगातार तेज होती जा रही है। आने वाले दिनों में कांग्रेस की ओर से BJP के इन आरोपों पर जवाब आने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और इसे 'समर्थन' बताना प्रोटोकॉल की स्पष्ट गलतफहमी है। लेकिन इस वैध आलोचना की आड़ में BJP 'वोट चोरी' के मूल आरोपों की जाँच से ध्यान हटाने में सफल हो रही है — EVM पारदर्शिता पर विपक्ष के व्यापक सवालों का यह जवाब नहीं है। गौरतलब है कि चुनाव आयोग की EVM हैक चुनौती को लेकर विपक्ष की चुप्पी और राष्ट्रपति भवन जाने की राजनीतिक प्रतीकात्मकता — दोनों एक साथ सच हो सकते हैं। मुख्यधारा की कवरेज इस टकराव को महज़ 'बयानबाज़ी' तक सीमित कर रही है, जबकि असली सवाल यह है कि विपक्ष ने एक साल में ठोस साक्ष्य क्यों नहीं जुटाए।
RashtraPress
10 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राहुल गांधी के राष्ट्रपति से मिलने पर BJP ने क्या आपत्ति जताई?
BJP ने दो मुख्य आपत्तियाँ जताईं — पहली, कि विपक्ष 'वोट चोरी' के सबूत लेकर नहीं गया, और दूसरी, कि राहुल गांधी ने राष्ट्रपति द्वारा ज्ञापन स्वीकार करने को गलत तरीके से 'सहमति' बताया, जो बुनियादी संवैधानिक प्रोटोकॉल की समझ की कमी दर्शाता है।
संबित पात्रा ने 'नालायक नेता' किसे और क्यों कहा?
BJP प्रवक्ता संबित पात्रा ने राहुल गांधी को 'नालायक नेता' कहा। उन्होंने तर्क दिया कि राष्ट्रपति से मिलने के बाद गांधी ने झूठे बयान दिए, प्रधानमंत्री के लिए अपशब्दों का प्रयोग किया, और संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा का उल्लंघन किया।
राष्ट्रपति द्वारा ज्ञापन स्वीकार करने का क्या मतलब होता है?
संवैधानिक प्रोटोकॉल के अनुसार, जब भी कोई प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपता है, तो राष्ट्रपति उसे शिष्टाचार के तहत स्वीकार करती हैं। यह स्वीकृति किसी भी तरह से ज्ञापन में उठाए गए दावों से सहमति नहीं मानी जाती।
EVM विवाद में विपक्ष की स्थिति पर BJP ने क्या कहा?
पात्रा ने कहा कि जब भी चुनाव आयोग EVM हैक करने की चुनौती देता है, विपक्ष अनुपस्थित रहता है। उन्होंने कहा कि एक साल से 'वोट चोरी' का दावा करने के बावजूद विपक्ष के पास कोई ठोस सबूत नहीं है।
क्या राहुल गांधी ने इन आरोपों पर कोई जवाब दिया?
10 अक्टूबर 2026 तक की उपलब्ध जानकारी के अनुसार, BJP की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर कांग्रेस या राहुल गांधी की ओर से कोई तत्काल आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। आने वाले दिनों में कांग्रेस की प्रतिक्रिया अपेक्षित है।
राष्ट्र प्रेस
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