कर्नाटक विधान परिषद चुनाव: भाजपा-जेडी(एस) ने एनडीए बैठक में 4 सीटों पर गठबंधन का किया ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल (सेक्युलर) [JD(S)] ने राज्य विधान परिषद की चार सीटों पर मिलकर चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है। यह रणनीतिक फैसला 26 सितंबर 2026 को बेंगलुरु में आयोजित राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की एक विशेष बैठक में लिया गया। इन सीटों में एक शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र और दो स्नातक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं।
बैठक में कौन-कौन मौजूद रहे
इस बैठक में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र, केंद्रीय मंत्री एवं जेडी(एस) के प्रदेश अध्यक्ष एच.डी. कुमारस्वामी, विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक, जेडी(एस) विधायक दल के नेता सुरेश बाबू, विधान परिषद में विपक्ष के नेता चलवाडी नारायणस्वामी और जेडी(एस) विधान परिषद दल के नेता एस.एल. भोजेगौड़ा उपस्थित रहे। यह बैठक विधान परिषद चुनावों की तैयारियों पर केंद्रित थी।
गठबंधन की रणनीति और ज़िम्मेदारियाँ
बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में विजयेंद्र ने बताया कि दोनों दलों ने मिलकर सभी चार सीटें जीतने का संकल्प लिया है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र के लिए पार्टी नेताओं की जिम्मेदारियाँ निर्धारित कर दी गई हैं। गौरतलब है कि NDA के दोनों घटक दल — भाजपा और जेडी(एस) — आने वाले दिनों में संयुक्त रूप से आंदोलन भी चलाएंगे।
कांग्रेस सरकार पर आरोप
विजयेंद्र ने दावा किया कि राज्य की सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार के विधायक मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार पर भरोसा खो रहे हैं और मुख्यमंत्री प्रशासन पर प्रभावी पकड़ बनाने में असफल रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार पर्याप्त धनराशि उपलब्ध कराए बिना केवल घोषणाएं कर रही है। इसके समर्थन में उन्होंने वित्त विभाग के एक पत्र का हवाला देते हुए कहा कि राज्य के खजाने में धन की कमी है।
कर्नाटक में NDA की व्यापक रणनीति
यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में विपक्षी NDA अपनी ज़मीन मजबूत करने की कोशिश में है। बैठक में कर्नाटक में NDA को सत्ता में लाने की दीर्घकालिक रणनीति पर भी चर्चा की गई। यह लोकसभा चुनाव 2024 के बाद से दोनों दलों के बीच गठजोड़ को और मज़बूत करने की कड़ी में देखा जा रहा है।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया
विजयेंद्र के आरोपों पर कांग्रेस की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। विधान परिषद चुनावों की तारीखों की घोषणा अभी बाकी है, लेकिन NDA का यह कदम दोनों दलों की चुनावी तैयारी की गंभीरता को दर्शाता है।