कर्नाटक विधान परिषद चुनाव: NDA उम्मीदवारों ने भरा नामांकन, कुमारस्वामी और विजयेंद्र ने चारों सीट जीतने का जताया भरोसा
सारांश
मुख्य बातें
बेंगलुरु में 5 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के उम्मीदवार के.एम. सुरेश और ए.पी. रंगनाथ ने कर्नाटक विधान परिषद चुनाव के लिए अपने नामांकन पत्र दाखिल किए। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने इस अवसर पर आत्मविश्वास जताया कि गठबंधन सभी चार सीटें जीतेगा।
नामांकन प्रक्रिया और पदयात्रा
दक्षिण-पूर्व ग्रेजुएट्स निर्वाचन क्षेत्र से उम्मीदवार सुरेश और बेंगलुरु टीचर्स निर्वाचन क्षेत्र से उम्मीदवार रंगनाथ ने लालबाग से शांतिनगर स्थित रीजनल कमिश्नर के कार्यालय तक पदयात्रा निकाली और वहाँ नामांकन पत्र जमा किए। यह पदयात्रा गठबंधन की एकजुटता और ज़मीनी समर्थन का प्रदर्शन था।
विजयेंद्र का बयान और गठबंधन की रणनीति
नामांकन के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए विजयेंद्र ने कहा कि चुनावी माहौल NDA के पक्ष में है। उन्होंने कहा, 'हम जेडीएस के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर चुनाव जीतने के संकल्प के साथ काम कर रहे हैं। विधान परिषद की गरिमा और पवित्रता की रक्षा की जानी चाहिए। ऐसे अच्छे उम्मीदवार चुने जाने चाहिए।' उन्होंने यह भी बताया कि NDA के शेष दो उम्मीदवार — नमाशी और संकानूर — मंगलवार को अपने नामांकन पत्र दाखिल करेंगे।
कुमारस्वामी की प्रतिक्रिया और KPSC मुद्दा
केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री तथा जनता दल (सेक्युलर) (JDS) के राज्य अध्यक्ष एच.डी. कुमारस्वामी ने कहा कि दो उम्मीदवारों का नामांकन पूरा हो चुका है और शेष दो सीटों पर भी जीत का पूरा भरोसा है। कुमारस्वामी ने कहा, 'दो और सीटों के लिए चुनाव होंगे और हमें उन सीटों पर भी जीत का भरोसा है।' उन्होंने यह भी तर्क दिया कि BJP-JDS गठबंधन सरकार के कार्यकाल में शिक्षकों और ग्रेजुएट निर्वाचन क्षेत्रों में उल्लेखनीय काम हुआ। गौरतलब है कि कुमारस्वामी ने KPSC घोटाले का हवाला देते हुए कहा कि शिक्षक और स्नातक मतदाता मौजूदा सरकार के विरोध में NDA उम्मीदवारों का समर्थन करेंगे।
बैठक में उपस्थित नेता
विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक, विधान परिषद में विपक्ष के नेता चलावादी नारायणस्वामी, BJP और JDS के सांसद, विधायक, MLC और पार्टी के वरिष्ठ नेता इस अवसर पर उपस्थित रहे। नामांकन प्रक्रिया के बाद BJP-JDS नेताओं ने विधान परिषद चुनावों की रणनीति को लेकर एक अलग बैठक भी की।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार पर KPSC भर्ती विवाद को लेकर विपक्ष का दबाव बढ़ा हुआ है। NDA यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं का विश्वास गठबंधन के साथ है। आने वाले दिनों में शेष दो उम्मीदवारों के नामांकन और प्रचार अभियान की दिशा यह तय करेगी कि NDA का दावा कितना ठोस है।