कर्नाटक MLC चुनाव: BJP उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किए, NDA के तीसरे प्रत्याशी ने कांग्रेस की रणनीति पलटी
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राज्यसभा और कर्नाटक विधान परिषद (MLC) चुनावों के उम्मीदवारों ने सोमवार, 8 जून को बेंगलुरु स्थित विधान सौधा में वरिष्ठ पार्टी नेताओं की उपस्थिति में अपने नामांकन पत्र दाखिल किए। इसी के साथ BJP-जनता दल (सेक्युलर) [JD(S)] गठबंधन द्वारा तीसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारने से चुनावी समीकरण बदल गए हैं और कांग्रेस की निर्विरोध जीत की रणनीति को सीधी चुनौती मिली है।
किसने दाखिल किए नामांकन
राज्यसभा सीट के लिए BJP उम्मीदवार प्रो. एम. नागराज ने नामांकन दाखिल किया। विधान परिषद सीटों के लिए पार्टी के उम्मीदवार लिंगराज पाटिल और रघु कौटिल्य ने भी अपने नामांकन पत्र जमा किए।
नामांकन के दौरान BJP प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र, केंद्रीय संसदीय बोर्ड के सदस्य एवं पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा, विधान परिषद विपक्ष के नेता चालवाड़ी नारायणस्वामी, पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. सीएन अश्वथ नारायण, राज्यसभा सदस्य लहर सिंह, विधानसभा विपक्ष के मुख्य सचेतक डोड्डानागौड़ा जी. पाटिल और विधान परिषद विपक्ष के मुख्य सचेतक एन. रविकुमार उपस्थित रहे।
NDA के तीसरे उम्मीदवार ने बदले समीकरण
कर्नाटक विधानसभा की सात MLC सीटों पर होने वाले चुनाव में BJP-JD(S) गठबंधन ने अप्रत्याशित रूप से गोविंदराजू को तीसरे उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतारा है। इस कदम से अब सात सीटों पर आठ उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं।
कांग्रेस को पहले उम्मीद थी कि उसका पाँचवाँ उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो जाएगा। सूत्रों के अनुसार, JD(S) नेता एचडी कुमारस्वामी ने अंतिम निर्णय लेने से पहले BJP के केंद्रीय नेतृत्व से विचार-विमर्श किया था। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब NDA गठबंधन विधानसभा में अल्पमत में है और हर वोट की अहमियत है।
विधायकों का गणित
MLC चुनाव में किसी भी उम्मीदवार को जीत के लिए 28 विधायकों के मतों की आवश्यकता होती है। वर्तमान स्थिति के अनुसार, BJP के पास 62 विधायक और JD(S) के पास 18 विधायक हैं। गठबंधन को निर्दलीय विधायक जी. जनार्दन रेड्डी और निष्कासित विधायक बसनागौड़ा पाटिल यतनाल के समर्थन की भी उम्मीद है।
दूसरी ओर, कांग्रेस के पास 134 विधायक हैं, जिसके आधार पर पार्टी चार सीटें सहजता से जीत सकती है और फिर भी अतिरिक्त मत बचा सकती है। इसके अलावा दो निर्दलीय विधायक हैं — एक कल्याण राज्य प्रगति पक्ष (KRPP) से और एक सर्वोदय कर्नाटक पक्ष (SKP) से। BJP के तीन निष्कासित विधायक फिलहाल निर्दलीय सदस्य के रूप में कार्यरत हैं। कांग्रेस विधायक विनय कुलकर्णी की अयोग्यता और डी. सुधाकर के निधन के कारण दो सीटें रिक्त हैं।
NDA की रणनीतिक चुनौती
आँकड़ों के अनुसार, NDA के तीसरे उम्मीदवार गोविंदराजू को जीत के लिए अभी भी लगभग चार से पाँच अतिरिक्त मतों की आवश्यकता है। बताया जा रहा है कि BJP और JD(S) दोनों के नेता इस अंतर को पाटने के लिए पर्दे के पीछे कुछ कांग्रेस विधायकों से संपर्क साधने की कोशिश कर रहे हैं।
विधायक दल के नेता सुरेश बाबू के नेतृत्व में गठबंधन की कई बैठकें भी हो रही हैं। अतिरिक्त मत जुटाने के लिए गठबंधन के प्रयास अब राजनीतिक हलकों में चर्चा का मुख्य विषय बन गए हैं।
आगे क्या होगा
अनुमानित विधायक गणना के आधार पर, कांग्रेस चार सीटें और BJP दो सीटें जीत सकती है। तीसरी NDA सीट का भविष्य अनिश्चित बना हुआ है और यह चुनाव के दिन तक क्रॉस-वोटिंग की संभावना पर निर्भर करेगा। यह चुनाव कर्नाटक की राजनीति में गठबंधन की ताकत और कांग्रेस की आंतरिक एकजुटता, दोनों की असली परीक्षा होगी।