असम BJP रैली पर CM हिमंत सरमा का दावा: 'कांग्रेस को मिला जनता का करारा जवाब'
सारांश
मुख्य बातें
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को दावा किया कि गुवाहाटी में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की रैली में उमड़ी भारी भीड़ ने कांग्रेस को एक स्पष्ट और कड़ा संदेश दिया है। उनके अनुसार, जनता ने साबित कर दिया है कि वह लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं को कमज़ोर करने के किसी भी प्रयास को स्वीकार नहीं करेगी।
रैली का माहौल और सरमा का बयान
मुख्यमंत्री सरमा ने सोशल मीडिया पर रैली की तस्वीरें साझा करते हुए जनभागीदारी को रेखांकित किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति खुला समर्थन व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि रैली में जुटी भीड़ BJP के प्रति जनता के भरोसे और चुनावी विमर्श में पार्टी के दृढ़ रुख को दर्शाती है।
सरमा ने अपने बयान में कहा, 'भारी संख्या में लोगों की मौजूदगी कांग्रेस को स्पष्ट संदेश देती है कि जनता हमारे लोकतंत्र को कमज़ोर करने, हमारी संवैधानिक संस्थाओं को डराने या चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता से समझौता करने के प्रयासों को कभी बर्दाश्त नहीं करेगी।'
जनादेश पर सरमा का तीखा प्रहार
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर जनादेश की वैधता को चुनौती देने का सीधा आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'जनता का जनादेश पवित्र है। कांग्रेस को इसे कुचलने का न तो अधिकार है और न ही प्राधिकार।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस लगातार चुनावी प्रक्रियाओं और लोकतांत्रिक संस्थाओं के कामकाज पर सवाल उठाती रही है।
असम विधानसभा चुनाव 2026 की पृष्ठभूमि
2026 असम विधानसभा चुनावों से पहले दोनों प्रमुख दलों के बीच राजनीतिक तनाव तेज़ी से बढ़ रहा है। BJP अपने शासन के रिकॉर्ड को आधार बनाकर जनाधार मज़बूत कर रही है, जबकि कांग्रेस सत्तारूढ़ दल के विरुद्ध विपक्षी एकजुटता बनाने में जुटी है। गौरतलब है कि सरमा पूर्वोत्तर भारत में BJP के सबसे सक्रिय और आक्रामक प्रचारकों में गिने जाते हैं।
यह रैली राज्य में उस व्यापक राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच हुई है, जिसमें संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता और चुनाव प्रबंधन को लेकर दोनों दलों के बीच तीखी बहस जारी है।
आगे क्या होगा
चुनावी तारीखों के नज़दीक आते ही असम में राजनीतिक सरगर्मी और तेज़ होने के संकेत हैं। BJP का संगठनात्मक अभियान जहाँ ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जनसंपर्क बढ़ाने पर केंद्रित है, वहीं कांग्रेस शासन-विरोधी भावना को एकजुट करने की रणनीति पर काम कर रही है। विश्लेषकों के अनुसार आने वाले हफ्तों में दोनों दलों की रैलियों की आवृत्ति और तीव्रता दोनों बढ़ेंगी।