दतिया उपचुनाव हार की समीक्षा: भाजपा ने बनाई दो सदस्यीय जांच समिति, अंदरूनी घात के आरोपों की होगी पड़ताल
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में कथित अंदरूनी घात के आरोपों के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) की प्रदेश इकाई ने मंगलवार, 4 अगस्त को हार के कारणों की समीक्षा के लिए दो सदस्यीय जांच समिति का गठन किया। कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने 6,016 मतों के अंतर से BJP प्रत्याशी को पराजित किया, जिसके बाद पार्टी के भीतर से विश्वासघात के गंभीर आरोप उठे हैं।
समिति का गठन और जिम्मेदारी
प्रदेश BJP अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने इस समिति में प्रदेश महामंत्री गौरव रणदिवे और वरिष्ठ नेता अंबाराम कराड़ा को नियुक्त किया है। समिति उपचुनाव से जुड़े पार्टी पदाधिकारियों और वरिष्ठ नेताओं से विस्तृत चर्चा कर हार के संगठनात्मक एवं राजनीतिक कारणों का विश्लेषण करेगी तथा अपनी रिपोर्ट प्रदेश अध्यक्ष को सौंपेगी।
प्रदेश BJP के मीडिया प्रभारी आशीष उषा अग्रवाल ने कहा, "दो सदस्यीय समिति चुनाव से जुड़े जिम्मेदार पदाधिकारियों और वरिष्ठ नेताओं से चर्चा कर चुनाव परिणामों के कारणों का विश्लेषण करेगी और अपनी रिपोर्ट प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को सौंपेगी।"
चुनाव परिणाम: कांग्रेस की निर्णायक जीत
30 जुलाई को हुए दतिया विधानसभा उपचुनाव के नतीजे सोमवार को घोषित हुए। कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह को 66,757 मत मिले, जबकि BJP प्रत्याशी अशुतोष तिवारी को 60,741 मत प्राप्त हुए — अंतर रहा 6,016 वोटों का। आजाद समाज पार्टी के उम्मीदवार दामोदर यादव 22,527 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
अंदरूनी घात के आरोप
परिणाम के बाद पराजित उम्मीदवार अशुतोष तिवारी ने आरोप लगाया कि पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं ने अधिकृत प्रत्याशी के विरुद्ध काम किया, जिससे कांग्रेस को जीत का मार्ग मिला। यह बयान उस समय आया जब BJP की प्रदेश इकाई पहले से ही चुनाव अभियान के दौरान उभरे आंतरिक मतभेदों को लेकर सवालों के घेरे में थी।
गौरतलब है कि पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को पार्टी ने इस सीट पर टिकट नहीं दिया था। अशुतोष तिवारी की उम्मीदवारी घोषित होने के बाद मिश्रा के कुछ समर्थकों ने विरोध में राष्ट्रीय राजमार्ग-44 जाम कर दिया था। हालांकि, नरोत्तम मिश्रा ने नाराजगी की खबरों को सार्वजनिक रूप से खारिज किया और बाद में तिवारी के पक्ष में प्रचार भी किया।
अनुशासनात्मक कार्रवाई की संभावना
यह घटनाक्रम प्रदेश BJP अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के उस बयान के ठीक एक दिन बाद सामने आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि हार की समीक्षा की जाएगी और पार्टी-विरोधी गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। माना जा रहा है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर यदि किसी नेता या कार्यकर्ता की पार्टी-विरोधी भूमिका सिद्ध होती है, तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कदम उठाए जा सकते हैं।
आगे की राह
दतिया उपचुनाव को दोनों प्रमुख दलों के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई माना जा रहा था और दोनों ओर के वरिष्ठ नेताओं ने प्रचार में पूरी ताकत लगाई थी। यह ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश में BJP सरकार अपने कार्यकाल के बीच में है और आंतरिक एकजुटता बनाए रखना पार्टी नेतृत्व की प्राथमिकता है। जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि पार्टी संगठन आगामी चुनावी रणनीति में क्या बदलाव करती है।