9 अगस्त 2026
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त्रिपुरा विलेज कमेटी चुनाव: भाजपा ने टीएमपी और आईपीएफटी से गठबंधन वार्ता फिर शुरू की

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त्रिपुरा विलेज कमेटी चुनाव: भाजपा ने टीएमपी और आईपीएफटी से गठबंधन वार्ता फिर शुरू की

सारांश

TTAADC चुनावों में केवल 4 सीटें जीतने के बाद भाजपा ने सबक लिया है। अब विलेज कमेटी चुनावों से पहले TMP और IPFT के साथ गठबंधन की कोशिश फिर शुरू हुई है — CM माणिक साहा की दिल्ली बैठक इस रणनीतिक पुनर्गठन की पहली कड़ी है।

मुख्य बातें

भाजपा ने TTAADC के अंतर्गत 587 विलेज कमेटियों के चुनाव के लिए TMP और IPFT के साथ गठबंधन वार्ता फिर शुरू की।
CM माणिक साहा रविवार को नई दिल्ली पहुँचे, जहाँ केंद्रीय भाजपा नेताओं की उपस्थिति में TMP नेताओं से बैठक होनी है।
12 अप्रैल के TTAADC चुनावों में TMP ने 28 में से 24 सीटें जीतीं; भाजपा केवल 4 सीटों पर सिमटी।
6 अगस्त को दिल्ली में हुई बैठक में भाजपा के 14 वरिष्ठ नेता , नितिन नवीन , बी.एल.
संतोष और संबित पात्रा शामिल हुए।
TMP 2021 से TTAADC का संचालन कर रही है, जो त्रिपुरा में विधानसभा के बाद दूसरा सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्थान है।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने त्रिपुरा ट्राइबल एरियाज ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल (TTAADC) के अंतर्गत आगामी ग्राम समिति (विलेज कमेटी) चुनावों में संयुक्त मोर्चा बनाने के लिए अपने आदिवासी सहयोगी दलों — टिपरा मोथा पार्टी (TMP) और इंडिजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (IPFT) — के साथ बातचीत फिर से शुरू कर दी है। 9 अगस्त को मिली जानकारी के अनुसार, भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर राज्य के नेता इस चुनावी रणनीति पर काम कर रहे हैं।

दिल्ली में होगी अहम बैठक

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा रविवार शाम नई दिल्ली रवाना हुए, जहाँ केंद्रीय भाजपा नेताओं की उपस्थिति में TMP नेताओं के साथ बैठक होनी है। यह बैठक रविवार रात या सोमवार को हो सकती है। TMP प्रमुख प्रद्योत बिक्रम माणिक्य देबबर्मा सहित पार्टी के अन्य नेता इस समय दिल्ली में ही हैं।

मुख्यमंत्री साहा ने रविवार को पत्रकारों से कहा, 'हम अपने केंद्रीय नेताओं की मौजूदगी में TMP नेताओं से आगामी विलेज कमेटी चुनावों के बारे में बात करेंगे। फिलहाल मैं बैठकों या चुनावों में संभावित संयुक्त मुकाबले के बारे में जानकारी नहीं दे सकता।'

चुनावी पृष्ठभूमि: भाजपा की कमज़ोर स्थिति

TTAADC के अंतर्गत 587 विलेज कमेटियों और 20 से अधिक शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव इसी वर्ष होने हैं। गौरतलब है कि 12 अप्रैल को हुए TTAADC चुनावों में तीनों दल अलग-अलग लड़े थे — आपसी समझौता न हो पाने के कारण। उस चुनाव में TMP ने 28 में से 24 सीटें जीतकर भारी बहुमत हासिल किया, जबकि भाजपा केवल 4 सीटों पर सिमट गई। 2021 से TMP इस परिषद का संचालन कर रही है, जो त्रिपुरा में राज्य विधानसभा के बाद दूसरा सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्थान माना जाता है।

केंद्रीय नेतृत्व का हस्तक्षेप

6 अगस्त को नई दिल्ली में हुई एक अहम बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बी.एल. संतोष, नॉर्थ-ईस्ट कोऑर्डिनेटर संबित पात्रा और त्रिपुरा के लिए पार्टी के ऑब्जर्वर राजदीप रॉय (सिलचर से विधायक एवं दक्षिणी असम के पूर्व लोकसभा सांसद) शामिल हुए। इस बैठक में त्रिपुरा से भाजपा के 14 वरिष्ठ नेता और पार्टी की कोर कमेटी के सभी सदस्य उपस्थित थे।

एक वरिष्ठ भाजपा नेता के अनुसार, 'केंद्रीय नेताओं ने राज्य के नेताओं से कहा है कि वे विलेज कमेटी और शहरी स्थानीय निकायों के अहम चुनावों से पहले पार्टी को और सक्रिय करें और संगठन को मजबूत बनाएं।' केंद्रीय नेताओं ने राज्य संगठन की स्थिति पर फीडबैक भी लिया।

आत्मसमर्पित उग्रवादियों के मुद्दे पर सरकार का रुख

मुख्यमंत्री साहा ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी सरकार आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों की समस्याओं और माँगों पर बातचीत के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, 'मैं व्यक्तिगत रूप से भी आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादी नेताओं से बात करने के लिए तैयार हूँ। हमारे अधिकारी उनके संपर्क में हैं।'

आगे क्या होगा

दिल्ली में होने वाली बैठक के नतीजे तय करेंगे कि भाजपा, TMP और IPFT तीनों मिलकर विलेज कमेटी चुनाव लड़ेंगे या नहीं। TTAADC चुनावों में मिली करारी हार के बाद भाजपा के लिए यह गठबंधन रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह ऐसे समय में आया है जब त्रिपुरा की आदिवासी राजनीति में TMP का प्रभाव तेज़ी से बढ़ रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि मजबूरी की राजनीति है। असली सवाल यह है कि जब TMP पहले से ही TTAADC पर काबिज है, तो वह भाजपा के साथ गठबंधन में क्या खोएगी और क्या पाएगी — और क्या देबबर्मा केंद्र की शर्तों पर राज़ी होंगे। यदि बातचीत एक बार फिर विफल हुई, तो भाजपा के लिए त्रिपुरा की आदिवासी पट्टी में पकड़ बनाना और भी मुश्किल हो जाएगा।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

त्रिपुरा विलेज कमेटी चुनाव क्या हैं और ये कब होंगे?
TTAADC के अंतर्गत 587 विलेज कमेटियों और 20 से अधिक शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव 2026 में ही होने हैं। ये विलेज कमेटियाँ ग्राम पंचायतों के समकक्ष हैं और आदिवासी क्षेत्रों की स्थानीय शासन व्यवस्था की बुनियाद हैं।
भाजपा TMP और IPFT के साथ गठबंधन क्यों चाहती है?
12 अप्रैल के TTAADC चुनावों में भाजपा केवल 4 सीटें जीत पाई, जबकि TMP ने 28 में से 24 सीटें हासिल कीं। इस हार के बाद भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व चाहता है कि विलेज कमेटी चुनावों में वोट बँटने से बचा जाए और आदिवासी इलाकों में संयुक्त मोर्चे से बेहतर नतीजे मिलें।
TMP प्रमुख प्रद्योत बिक्रम माणिक्य देबबर्मा कौन हैं?
प्रद्योत बिक्रम माणिक्य देबबर्मा टिपरा मोथा पार्टी के प्रमुख हैं, जो 2021 से TTAADC का संचालन कर रही है। वे त्रिपुरा के शाही परिवार से ताल्लुक रखते हैं और आदिवासी अधिकारों के प्रमुख पैरोकार माने जाते हैं।
6 अगस्त की दिल्ली बैठक में क्या हुआ?
6 अगस्त को भाजपा मुख्यालय में हुई बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, महासचिव बी.एल. संतोष, नॉर्थ-ईस्ट कोऑर्डिनेटर संबित पात्रा और ऑब्जर्वर राजदीप रॉय ने त्रिपुरा के 14 वरिष्ठ भाजपा नेताओं से संगठन की स्थिति और चुनावी तैयारियों पर फीडबैक लिया।
TTAADC त्रिपुरा में कितना महत्वपूर्ण है?
TTAADC को त्रिपुरा में राज्य विधानसभा के बाद दूसरा सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक और राजनीतिक संस्थान माना जाता है। यह राज्य के आदिवासी क्षेत्रों की स्वायत्त शासन व्यवस्था का केंद्र है और 2021 से TMP इसका नेतृत्व कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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