क्या सिलीगुड़ी में भाजपा विधायक शंकर घोष की भूख हड़ताल ने विपक्ष के अधिकारों की रक्षा की?
सारांश
Key Takeaways
- विपक्षी अधिकारों की रक्षा के लिए भूख हड़ताल का आयोजन।
- विकास निधि में बाधाएं उत्पन्न करने के आरोप।
- मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया गया, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।
- नेताजी को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
- भूख हड़ताल का उद्देश्य विकास कार्यों को सुनिश्चित करना।
सिलीगुड़ी, 23 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भाजपा विधायक शंकर घोष ने सिलीगुड़ी के हाथी मोड़ पर अपनी एक दिवसीय भूख हड़ताल का समापन कर दिया। यह हड़ताल उन्होंने पश्चिम बंगाल में विपक्षी विधायकों के संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा और विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एमएलएएलएडी) की प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग को लेकर शुरू की थी।
भूख हड़ताल के समाप्ति के अवसर पर शंकर घोष ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "नेताजी ने अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया था, लेकिन आज हम देख रहे हैं कि पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी पार्टी के नेता विपक्षी नेताओं पर दबाव बना रहे हैं और अत्याचार कर रहे हैं। इसी के खिलाफ हमने यह भूख हड़ताल की थी।"
भाजपा विधायक ने राज्य सरकार और सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वे विपक्ष के जनप्रतिनिधियों को परेशान कर रहे हैं और उनके विकास कार्यों में जानबूझकर रुकावट डाल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जब से वह निर्वाचित हुए हैं, तब से ही उन्होंने देखा है कि सरकार और सत्ताधारी दल अपने अधिकारों का दुरुपयोग कर रहे हैं।
शंकर घोष के अनुसार, विपक्षी विधायकों के संवैधानिक अधिकारों को सीमित किया जा रहा है और उनके निर्वाचन क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए मिलने वाली निधियों के उपयोग में राजनीतिक बाधाएं आ रही हैं। उन्होंने कहा कि विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास योजना के तहत मिलने वाली राशि पहले से ही सीमित होती है और यदि उस पर भी रोक लगाई जाती है, तो आम जनता के लिए विकास कार्य प्रभावित होते हैं।
शंकर घोष ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को इस मामले में ज्ञापन सौंपा था, लेकिन अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके अलावा, उन्होंने मुख्य सचिव और विधानसभा अध्यक्ष को भी पत्र लिखा और सिलीगुड़ी नगर निगम के मेयर से चर्चा के लिए मिलने का अनुरोध किया, लेकिन वहां से भी उन्हें सहयोग नहीं मिला।
उन्होंने जिला प्रशासन पर भी आरोप लगाया कि विकास निधि के वितरण में जानबूझकर देरी और अड़चनें डाली जा रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी से टकराव करना नहीं है, बल्कि विपक्षी विधायकों के अधिकारों की रक्षा करना और अपने क्षेत्र के लोगों के लिए विकास कार्यों को सुनिश्चित करना है।