सोनम वांगचुक की 26 दिन की भूख हड़ताल समाप्त, PM मोदी ने X पर की स्वास्थ्य लाभ की कामना
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार, 24 जुलाई को लद्दाखी एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक से अपील की कि वे 26 दिनों की भूख हड़ताल समाप्त करने के बाद डॉक्टरों के निर्देशों का पालन करें और शीघ्र स्वास्थ्य लाभ करें। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी शुभकामनाएँ व्यक्त कीं, जो वांगचुक के अनशन तोड़ने के कुछ घंटों बाद आईं।
मुख्य घटनाक्रम
वांगचुक ने एक निजी अस्पताल में अपना अनशन समाप्त किया, जहाँ केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और जितेंद्र सिंह, लेह-लद्दाख एपेक्स बॉडी के वरिष्ठ नेता, चिकित्सक और परिवार के सदस्य उपस्थित थे। इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर लिखा: 'मैं सोनम जी से आग्रह करता हूं कि वह अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में डॉक्टरों की सलाह मानें और जल्द से जल्द अपना पुराना वजन वापस पाएं। मैं ईश्वर से उनके अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करता हूं।'
भूख हड़ताल का व्यापक असर
वांगचुक की 26 दिनों की भूख हड़ताल ने राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक ध्यान आकर्षित किया। वांगचुक ने स्वयं बताया कि संसद के 65 सदस्यों ने या तो उनसे मुलाकात की या उन्हें अनशन समाप्त करने के लिए पत्र लिखे, जिनमें संभावित अशांति को लेकर चिंता व्यक्त की गई थी। अनेक राजनीतिक दलों और सिविल सोसायटी संगठनों के नेताओं ने भी उनसे उपवास खत्म करने की अपील की थी।
पेपर लीक पर सरकार की कार्रवाई
इसी दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि केंद्र सरकार ने पेपर लीक मामलों के लिए कड़े प्रावधानों और दंड के साथ एक व्यापक मसौदा विधेयक तैयार किया है। इस प्रस्ताव पर शुक्रवार को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में चर्चा होनी थी और अपेक्षा थी कि इसे अगले सप्ताह संसद के चल रहे सत्र में पेश एवं पारित किया जाएगा।
गुरुवार को एक्स पर अपनी पोस्ट में प्रधानमंत्री ने कहा था: 'देश के युवाओं का हित और उनका भविष्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। पेपर लीक के सभी मामलों में दोषियों को जल्द से जल्द कठोर दंड देने के लिए, केस के त्वरित निस्तारण के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाएगा। युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।'
आगे क्या
वांगचुक के स्वास्थ्य लाभ की प्रक्रिया चिकित्सकों की देखरेख में जारी है। पेपर लीक विधेयक के संसद में पेश होने की स्थिति में इसे लेकर व्यापक राजनीतिक चर्चा की संभावना है। यह देखना अहम होगा कि लद्दाख से जुड़े मुद्दों पर केंद्र और एपेक्स बॉडी के बीच संवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है।