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भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर BKS का संतुलित रुख: किसान हित में हो तो स्वागत, वरना विरोध

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भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर BKS का संतुलित रुख: किसान हित में हो तो स्वागत, वरना विरोध

सारांश

भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर पंजाब-हरियाणा के किसान संगठनों के विरोध के बीच BKS ने संतुलित रुख अपनाया है — किसान हित में हो तो स्वागत, वरना विरोध। महासचिव रमेश पटेल ने राष्ट्रहित को सर्वोपरि बताते हुए कहा कि आधिकारिक जानकारी आने तक कोई कार्यक्रम नहीं दिया जाएगा।

मुख्य बातें

भारतीय किसान संघ (BKS) ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर संतुलित रुख अपनाया — किसान हित में होने पर स्वागत, विरोध में होने पर विरोध।
BKS महासचिव रमेश पटेल ने गांधीनगर से कहा कि राष्ट्रहित सर्वोपरि है और यही संघ का मूल सिद्धांत है।
ट्रेड डील की आधिकारिक शर्तें सार्वजनिक न होने तक BKS कोई आंदोलन कार्यक्रम नहीं देगा।
BKS ने पहले ही सरकार को आगाह किया था, जिसके बाद से डील पर चर्चा रुकी हुई बताई जा रही है।
पंजाब और हरियाणा के किसान संगठनों के विरोध पर BKS ने कहा — हर संगठन की रीति-नीति अलग होती है।

भारतीय किसान संघ (BKS) ने 17 अगस्त को भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर अपना स्पष्ट रुख रखते हुए कहा कि यदि यह समझौता किसानों के हित में है तो संघ इसका स्वागत करेगा, अन्यथा पूरी ताकत से विरोध भी करेगा। पंजाब और हरियाणा के किसान संगठनों द्वारा इस डील के खिलाफ मोर्चा खोले जाने के बीच BKS ने राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की अपनी नीति दोहराई।

BKS का स्पष्ट रुख

गांधीनगर से BKS के महासचिव रमेश पटेल ने कहा, 'भारतीय किसान संघ के लिए हमेशा राष्ट्रहित सर्वोपरि रहा है। कल भी था, आज भी है और आने वाले दिनों में भी रहेगा। राष्ट्रहित की चौखट पर किसान का हित — यह भारतीय किसान संघ का स्लोगन है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि जहाँ किसानों का हित है, वहाँ किसान संघ खड़ा है और जहाँ किसानों का अहित है, उसके सामने भी किसान संघ खड़ा रहता है।

आधिकारिक जानकारी के अभाव में कोई कार्यक्रम नहीं

रमेश पटेल ने बताया कि अमेरिका के साथ प्रस्तावित ट्रेड डील के बारे में अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है। इसी कारण संगठन बिना ठोस जानकारी के कोई कार्यक्रम घोषित नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि किसान संघ जो भी कदम उठाता है, वह अपनी सुनिश्चित रीति-नीति के आधार पर उठाता है।

BKS की पूर्व चेतावनी और डील की स्थिति

रमेश पटेल ने बताया कि भारतीय किसान संघ ने पहले ही सरकार को इस मुद्दे पर आगाह किया था, जिसके बाद से ट्रेड डील पर चर्चा रुकी हुई बताई जा रही है। उन्होंने कहा, 'अगर यह डील किसानों के हित में है तो किसान संघ उसका स्वागत करेगा। अगर यह डील किसानों के विरोध में रहेगी तो भारतीय किसान संघ अपने दम-खम के आधार पर उसका विरोध करेगा।'

पंजाब-हरियाणा के संगठनों से मतभेद नहीं, लेकिन नीति अलग

पंजाब और हरियाणा के किसान संगठनों द्वारा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने के सवाल पर रमेश पटेल ने कहा, 'हर संगठन की अलग रीति-नीति होती है। उनके आधार पर वे अपनी बात रख रहे हैं, यह उनकी सोच है।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि BKS देश का वफादार स्वयंसेवक संगठन है और कोई भी निर्णय देश तथा किसान दोनों के हित को ध्यान में रखकर लिया जाएगा।

आगे क्या होगा

भारत-अमेरिका ट्रेड डील की शर्तें अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई हैं, इसलिए किसान संगठनों का अंतिम रुख इन शर्तों के सामने आने के बाद ही तय होगा। BKS ने संकेत दिया है कि डील के विवरण सामने आते ही वह अपनी प्रतिक्रिया देगा। यह ऐसे समय में आया है जब कृषि क्षेत्र से जुड़े व्यापार समझौतों पर देशभर में बहस तेज हो रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें एक अंतर्निहित तनाव भी है — जब तक डील की शर्तें सार्वजनिक होंगी, तब तक वार्ता की दिशा काफी हद तक तय हो चुकी होगी। पंजाब-हरियाणा के किसान संगठनों का अग्रिम विरोध और BKS की मध्यमार्गी नीति यह दर्शाती है कि भारतीय किसान आंदोलन एकजुट नहीं है — जो सरकार के लिए सुविधाजनक हो सकता है। असली सवाल यह है कि जब डील के विवरण सामने आएंगे, तो BKS की 'राष्ट्रहित सर्वोपरि' की कसौटी पर किसान हित को कौन परिभाषित करेगा — संगठन या सरकार।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारतीय किसान संघ (BKS) का भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर क्या रुख है?
BKS ने संतुलित रुख अपनाया है — यदि ट्रेड डील किसानों के हित में है तो संघ उसका स्वागत करेगा, और यदि किसानों के विरोध में है तो पूरी ताकत से विरोध करेगा। महासचिव रमेश पटेल ने कहा कि राष्ट्रहित सर्वोपरि है और यही संघ का मूल सिद्धांत है।
BKS ने अभी तक कोई आंदोलन क्यों नहीं किया?
BKS के अनुसार अमेरिका के साथ प्रस्तावित ट्रेड डील की आधिकारिक शर्तें अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई हैं। संगठन बिना ठोस जानकारी के कोई कार्यक्रम नहीं देता — यह उसकी स्थापित रीति-नीति है।
पंजाब और हरियाणा के किसान संगठनों के विरोध पर BKS का क्या कहना है?
BKS महासचिव रमेश पटेल ने कहा कि हर संगठन की अलग रीति-नीति होती है और वे उसी आधार पर अपनी बात रख रहे हैं। BKS की अपनी नीति राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए किसान हित की रक्षा करना है।
क्या BKS ने पहले भी सरकार को ट्रेड डील पर आगाह किया था?
हाँ, रमेश पटेल के अनुसार BKS ने पहले ही सरकार को इस मुद्दे पर सतर्क किया था, जिसके बाद से ट्रेड डील पर चर्चा रुकी हुई बताई जा रही है। हालाँकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील का किसानों पर क्या असर पड़ सकता है?
डील की आधिकारिक शर्तें अभी सार्वजनिक नहीं हुई हैं, इसलिए सटीक प्रभाव का आकलन संभव नहीं है। किसान संगठनों की चिंता मुख्यतः कृषि आयात-निर्यात नीतियों और घरेलू किसानों की आय पर संभावित असर को लेकर है।
राष्ट्र प्रेस
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