21 जुलाई 2026
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भारत-अमेरिका ट्रेड डील से किसान सुरक्षित, कृषि उत्पाद बाहर रहेंगे: पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों

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भारत-अमेरिका ट्रेड डील से किसान सुरक्षित, कृषि उत्पाद बाहर रहेंगे: पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों

सारांश

भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर किसानों की बेचैनी के बीच पंजाब भाजपा अध्यक्ष ढिल्लों ने आश्वासन दिया कि धान-गेहूं-दूध समझौते से बाहर रहेंगे। उसी दिन हजारों किसान दिल्ली कूच पर निकले लेकिन शंभू बॉर्डर पर रोके गए। किसान नेता पंढेर ने कहा — 8-10 दिन में केंद्रीय कृषि मंत्री से बातचीत का रास्ता खुलेगा।

मुख्य बातें

पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने 21 जुलाई को कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से किसानों के हितों पर कोई आँच नहीं आएगी।
धान, गेहूं, दलहन, दूध सहित प्रमुख कृषि उत्पादों को प्रस्तावित समझौते के दायरे से पूरी तरह बाहर रखने का आश्वासन दिया गया।
पंजाब से हजारों किसान दिल्ली कूच पर निकले; शंभू, कुंडली और खनौरी बॉर्डर पर पुलिस ने भारी बैरिकेडिंग से रोका।
किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के नेता सरवन सिंह पंढेर ने कहा — 8 से 10 दिन में केंद्रीय कृषि मंत्री से बातचीत का पत्र मिलेगा।
ढिल्लों ने AAP और कांग्रेस पर किसानों के नाम पर भ्रामक प्रचार फैलाने का आरोप लगाया।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर किसानों में फैली आशंकाओं के बीच पंजाब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने मंगलवार, 21 जुलाई को चंडीगढ़ में स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं यह आश्वासन दिया है कि किसानों और पशुपालकों के हितों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं होगा। उन्होंने कहा कि धान, गेहूं, दलहन, दूध और अन्य प्रमुख कृषि उत्पादों को प्रस्तावित व्यापार समझौते के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा जाएगा।

मुख्य घटनाक्रम

ढिल्लों ने यह भी रेखांकित किया कि अभी तक कोई समझौता अंतिम रूप नहीं ले चुका है और फिलहाल केवल बातचीत का दौर जारी है। उनके अनुसार, केंद्र सरकार इस मुद्दे पर कई बार अपना रुख स्पष्ट कर चुकी है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे अफवाहों और भ्रामक प्रचार से सतर्क रहें।

इसी दिन पंजाब से हजारों किसान भारत-अमेरिका प्रस्तावित व्यापार समझौते के विरोध में दिल्ली की ओर कूच के लिए निकले। हालाँकि, उन्हें शंभू, कुंडली और खनौरी बॉर्डर पर पुलिस ने भारी बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया। किसानों ने स्पष्ट किया कि वे शांतिपूर्वक अपनी माँगें सरकार तक पहुँचाना चाहते हैं और किसी भी बैरिकेड को तोड़ने का उनका इरादा नहीं है।

विपक्ष पर निशाना

ढिल्लों ने आम आदमी पार्टी (AAP) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) पर आरोप लगाया कि इन दलों ने हमेशा किसानों के नाम पर राजनीति की है और झूठा प्रचार फैलाया है। उन्होंने दावा किया कि इसके विपरीत भाजपा सदैव किसानों के साथ मजबूती से खड़ी रही है।

यह ऐसे समय में आया है जब कृषि संगठन प्रस्तावित व्यापार समझौते में डेयरी और अनाज क्षेत्र पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर लंबे समय से सरकार पर दबाव बना रहे हैं। गौरतलब है कि 2020-21 के किसान आंदोलन के बाद से पंजाब में केंद्र और किसान संगठनों के बीच संवाद की स्थिति संवेदनशील बनी हुई है।

किसान नेता का बयान

किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के नेता सरवन सिंह पंढेर ने पत्रकारों को बताया कि हरियाणा के एक मंत्री की ओर से यह आश्वासन मिला है कि आगामी दिनों में उनकी बातचीत केंद्रीय कृषि मंत्री से कराई जाएगी। पंढेर के अनुसार, 8 से 10 दिन के भीतर इस संबंध में एक पत्र सौंपा जाएगा, जिसके बाद संवाद का मार्ग प्रशस्त होगा। उन्होंने कहा कि आगामी बातचीत में यह तय किया जाएगा कि आगे क्या कदम उठाने होंगे।

सरकार का रुख और आगे की राह

ढिल्लों ने कहा कि यदि किसी किसान संगठन को कोई शंका या चिंता है, तो वह सरकार के साथ सीधे संवाद कर सकता है। उन्होंने दोहराया कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार किसानों से हर मुद्दे पर बातचीत के लिए तैयार है। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी का एकमात्र उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना और उन्हें आर्थिक रूप से समृद्ध बनाना है — क्योंकि जब किसान समृद्ध होगा, तभी पंजाब और भारत वास्तव में समृद्ध होगा। अब सभी की निगाहें केंद्रीय कृषि मंत्री के साथ प्रस्तावित बैठक पर टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 'बातचीत जारी है' और 'कृषि उत्पाद बाहर रहेंगे' — ये दोनों दावे एक साथ तब तक अधूरे हैं जब तक लिखित प्रतिबद्धता सामने न आए। 2020-21 के किसान आंदोलन के बाद भी मौखिक आश्वासनों का दौर चला था, जो अंततः कानून वापसी तक खिंचा। शंभू बॉर्डर पर एक बार फिर बैरिकेड लगाना और साथ ही संवाद का निमंत्रण देना — यह विरोधाभास सरकार की रणनीति पर सवाल खड़े करता है। असली कसौटी यह होगी कि 8-10 दिन में प्रस्तावित केंद्रीय कृषि मंत्री की बैठक होती है या नहीं, और उसमें कृषि क्षेत्र की छूट को लिखित दर्जा मिलता है या नहीं।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-अमेरिका ट्रेड डील से पंजाब के किसानों को क्या खतरा बताया जा रहा है?
किसान संगठनों को आशंका है कि प्रस्तावित व्यापार समझौते के तहत अमेरिकी डेयरी उत्पाद, अनाज और कृषि वस्तुएँ कम शुल्क पर भारत में आ सकती हैं, जिससे घरेलू किसानों को नुकसान होगा। हालाँकि सरकार ने अभी तक समझौते का अंतिम मसौदा सार्वजनिक नहीं किया है।
पंजाब भाजपा अध्यक्ष ढिल्लों ने किसानों को क्या आश्वासन दिया?
केवल सिंह ढिल्लों ने 21 जुलाई को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं आश्वस्त किया है कि किसानों और पशुपालकों के हितों से कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि धान, गेहूं, दलहन और दूध जैसे उत्पाद प्रस्तावित समझौते से बाहर रहेंगे।
21 जुलाई को शंभू बॉर्डर पर क्या हुआ?
पंजाब से हजारों किसान भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में दिल्ली कूच पर निकले, लेकिन पुलिस ने शंभू, कुंडली और खनौरी बॉर्डर पर भारी बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया। किसानों ने कहा कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुँचाना चाहते हैं।
किसान नेता सरवन सिंह पंढेर ने वार्ता को लेकर क्या कहा?
किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के नेता सरवन सिंह पंढेर ने बताया कि हरियाणा के एक मंत्री ने आश्वासन दिया है कि 8 से 10 दिन के भीतर केंद्रीय कृषि मंत्री से बातचीत के लिए पत्र सौंपा जाएगा। इसके बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी।
भाजपा ने AAP और कांग्रेस पर क्या आरोप लगाए?
ढिल्लों ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने हमेशा किसानों के नाम पर राजनीति की है और भ्रामक प्रचार फैलाया है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे इन दलों की गलत सूचनाओं से सतर्क रहें।
राष्ट्र प्रेस
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