भारत-अमेरिका ट्रेड डील विरोध: शंभू-कुंडली-खनौरी बॉर्डर सील, किसानों ने कहा — 'टकराव नहीं, संवाद चाहिए'
सारांश
मुख्य बातें
भारत-अमेरिका प्रस्तावित ट्रेड डील के खिलाफ पंजाब से हजारों किसान मंगलवार, 21 जुलाई की सुबह दिल्ली कूच पर निकले, लेकिन उन्हें शंभू, कुंडली और खनौरी बॉर्डर पर भारी बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया गया। हरियाणा पुलिस ने तीनों सीमा बिंदुओं को सील कर दिया, जबकि किसान मजदूर मोर्चा के नेताओं ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा और वे किसी भी बैरिकेड को तोड़ने का इरादा नहीं रखते।
मुख्य घटनाक्रम
किसान मजदूर मोर्चा के नेता सरवन सिंह पंधेर ने बताया कि 'देश बचाओ मोर्चा' के तहत पहले ही यह निर्णय लिया जा चुका था कि किसान किसी भी बैरिकेड को तोड़कर आगे नहीं बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि आंदोलन की रणनीति में टकराव का कोई स्थान नहीं है — केवल शांतिपूर्ण संवाद ही उनका हथियार है।
पंधेर ने यह भी स्पष्ट किया कि शंभू बॉर्डर को किसानों ने नहीं, बल्कि हरियाणा सरकार ने बैरिकेड लगाकर बंद किया है। उन्होंने प्रशासन से आधिकारिक आदेश या अधिसूचना माँगी, लेकिन कोई सार्वजनिक दस्तावेज़ प्रस्तुत नहीं किया गया।
गिरफ्तारी और किसानों की नाराज़गी
किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी की गिरफ्तारी और दिल्ली में कई किसानों को हिरासत में लिए जाने के बाद आंदोलनकारियों में तीखी नाराज़गी है। पंधेर ने कहा कि उनकी पहली और प्राथमिक माँग गिरफ्तार किसानों की तत्काल रिहाई है।
किसान नेता मनजीत सिंह घुम्मन ने भी चढ़ूनी की गिरफ्तारी का विरोध करते हुए उनकी रिहाई की माँग की। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन के अधिकारियों से बातचीत की संभावना है, लेकिन फिलहाल किसानों को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जा रही।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
पंधेर ने बताया कि अंबाला के पुलिस अधीक्षक (एसपी) से उनकी बातचीत हुई, जिसमें अधिकारियों ने कहा कि उन्हें ऊपर से निर्देश हैं कि किसानों को आगे नहीं जाने दिया जाएगा। शंभू बॉर्डर पर किसान नेताओं और प्रशासन के बीच हुई बैठक में अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि किसानों की माँगें वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुँचाई जाएँगी।
उधर, हरियाणा के करनाल में बस्ताड़ा टोल प्लाज़ा पर भी दिल्ली जाने वाले किसानों के वाहनों को रोक दिया गया। पहले ट्रैक्टरों को रोका गया, फिर निजी कारों को भी आगे नहीं जाने दिया गया, जिसके बाद कई किसानों ने पैदल दिल्ली कूच का निर्णय लिया।
आम किसान पर असर और ट्रेड डील की चिंता
एक किसान ने बताया कि विदेशी बीज और कृषि उत्पाद भारतीय भूमि और जलवायु के अनुकूल नहीं होते। उन्होंने पहले विदेशी कपास के बीजों के उपयोग के बाद कई क्षेत्रों में आई गंभीर समस्याओं का हवाला दिया। किसानों का आरोप है कि यदि आयात पर शुल्क कम या समाप्त हुआ तो विदेशी कंपनियाँ पहले सस्ते दामों पर बाज़ार पर कब्ज़ा करेंगी और बाद में मनमानी कीमतें तय करेंगी।
किसानों का कहना है कि ओडिशा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और पंजाब समेत कई राज्यों के हजारों किसान दिल्ली के भीतर पहले से पहुँच चुके हैं, जिनमें से कई को हिरासत में लिया गया है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता अपने निर्णायक दौर में बताई जा रही है।
आगे क्या होगा
किसान नेताओं ने कहा है कि वे प्रशासन के साथ बातचीत के नतीजे का इंतज़ार करेंगे और उसके बाद ही अगला कदम तय होगा। पंधेर ने स्पष्ट किया कि यदि कृषि मंत्री या केंद्र सरकार का कोई प्रतिनिधि बातचीत के लिए तैयार होता है, तो किसान भी पूरी गंभीरता से उसमें शामिल होंगे। गौरतलब है कि यह आंदोलन 2020-21 के किसान आंदोलन के बाद किसानों की एक और बड़ी सामूहिक गोलबंदी है, जो इस बार व्यापार नीति को केंद्र में रखकर उठ खड़ी हुई है।