अग्निवीर की समयावधि बढ़ाने पर बृजभूषण शरण सिंह बोले — भारत के हर युवा को मिले 3-4 साल की सैन्य ट्रेनिंग
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता बृजभूषण शरण सिंह ने 5 नवंबर 2026 को गोंडा में अग्निवीर योजना की कार्यावधि बढ़ाने के सरकार के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि रूस सहित कई देशों की तर्ज पर भारत में भी इंटरमीडिएट पास करने के बाद प्रत्येक युवा को 3 से 4 साल की अनिवार्य सैन्य प्रशिक्षण मिलनी चाहिए, ताकि देश का हर नागरिक शारीरिक रूप से स्वस्थ और सैन्य दृष्टि से तैयार हो सके।
अग्निवीर पर बृजभूषण का पक्ष
सिंह ने कहा, 'अग्निवीर की जो मंशा है, जैसे मैंने रूस और कई अन्य देशों में देखा है कि जब बच्चा इंटर तक पहुंचता है, तो उसके परिवार और स्कूल को एक नोटिस आता है। सरकार उन्हें 3 या 4 साल के लिए सेना की पूरी ट्रेनिंग देती है। उसके बाद वे बच्चे लौट आते हैं — जिसको मेडिकल की पढ़ाई करनी हो, वह मेडिकल करे; जिसको इंजीनियरिंग करनी हो, वह इंजीनियरिंग करे।' उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे देशों में कोई विशेष सुविधा नहीं दी जाती, परंतु सैन्य प्रशिक्षण अनिवार्य रहता है।
बृजभूषण ने यह भी कहा कि योजना के निर्माताओं के मन में शायद यही भावना रही होगी कि देश का प्रत्येक व्यक्ति सैनिक के रूप में स्वयं को तैयार करे, जिसके लिए दो से तीन साल की ट्रेनिंग आवश्यक है।
नौकरी के प्रावधान से उपजे विवाद पर टिप्पणी
भाजपा नेता ने माना कि जब योजना में 'नौकरी देने' का प्रावधान जोड़ा गया, तभी से अंतर्विरोध बढ़ा। उन्होंने कहा कि आज सेना की ज़रूरत, युद्ध की परिस्थितियाँ और युवाओं की आकांक्षाओं को देखते हुए सरकार ने जो दो साल का कार्यकाल बढ़ाया है, वह 'अत्यंत स्वागतयोग्य' कदम है। उनके अनुसार इससे बड़ी संख्या में युवा अग्निवीर की तैयारी करेंगे, स्वास्थ्य के प्रति सजग होंगे और धीरे-धीरे देश भी स्वस्थ बनेगा।
जनसंख्या नियंत्रण और जातीय संतुलन
इस अवसर पर बृजभूषण शरण सिंह ने जनसंख्या नियंत्रण के मुद्दे पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि देश का एक जागरूक वर्ग — चाहे वह किसी भी जाति या पेशे का हो — जनसंख्या नियंत्रण का पालन करता है, जबकि कुछ लोग इसका अनुसरण नहीं करते। उनका कहना था कि यदि सरकार दो या तीन बच्चों की सीमा निर्धारित करे, तो सीमा पार करने वालों पर गंभीरता से विचार करना होगा।
हालांकि, उन्होंने साथ ही यह भी जोड़ा कि जनसंख्या नियंत्रण नीति बनाते समय सामाजिक और जातिगत संतुलन का भी ध्यान रखना अनिवार्य है। उन्होंने चेताया कि ऐसा न हो कि कठोर नीति के कारण किसी समुदाय का अस्तित्व ही संकट में पड़ जाए।
राजनीति और जनसंख्या का अंतर्संबंध
सिंह ने यह भी रेखांकित किया कि राजनीतिक दल चुनावी टिकट देते समय यह नहीं देखते कि उम्मीदवार ने जनसंख्या नियंत्रण कानून का पालन किया या नहीं — वहाँ 'बहुमत की संख्या' को प्राथमिकता मिलती है। उनके अनुसार, 'मंत्री पद भी उसी हिसाब से बँटते हैं।' इस विषमता और दृष्टिकोण की भिन्नता पर ध्यान दिए बिना कोई भी जनसंख्या नीति व्यावहारिक नहीं होगी।
आगे की दिशा
बृजभूषण शरण सिंह के ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब अग्निवीर योजना में कार्यावधि विस्तार को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों और पूर्व सैन्य अधिकारियों में बहस जारी है। गौरतलब है कि विपक्ष योजना को लेकर सरकार पर लगातार सवाल उठाता रहा है। आने वाले दिनों में सरकार की ओर से संशोधित अग्निवीर नीति के विस्तृत दिशानिर्देश अपेक्षित हैं, जिन पर सभी पक्षों की नज़र बनी रहेगी।