5 नवंबर 2026
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अग्निवीर की समयावधि बढ़ाने पर बृजभूषण शरण सिंह बोले — भारत के हर युवा को मिले 3-4 साल की सैन्य ट्रेनिंग

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अग्निवीर की समयावधि बढ़ाने पर बृजभूषण शरण सिंह बोले — भारत के हर युवा को मिले 3-4 साल की सैन्य ट्रेनिंग

सारांश

भाजपा नेता बृजभूषण शरण सिंह ने अग्निवीर की बढ़ी हुई कार्यावधि को 'स्वागतयोग्य' बताते हुए एक कदम आगे जाकर रूस की तर्ज पर भारत में हर युवा के लिए 3-4 साल की अनिवार्य सैन्य ट्रेनिंग की वकालत की। साथ ही जनसंख्या नीति में जातीय संतुलन के सवाल को सार्वजनिक बहस में लाकर नई बहस छेड़ दी।

मुख्य बातें

बृजभूषण शरण सिंह ने 5 नवंबर 2026 को गोंडा में अग्निवीर योजना की 2 साल बढ़ाई गई कार्यावधि का स्वागत किया।
उन्होंने रूस सहित कई देशों का उदाहरण देते हुए भारत में भी प्रत्येक युवा को 3-4 साल की अनिवार्य सैन्य ट्रेनिंग देने की वकालत की।
उनके अनुसार योजना में 'नौकरी देने' का प्रावधान जोड़े जाने से अंतर्विरोध उत्पन्न हुआ।
जनसंख्या नियंत्रण नीति पर उन्होंने कहा कि दो या तीन बच्चों की सीमा लागू करते समय सामाजिक और जातिगत संतुलन का ध्यान रखना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल टिकट वितरण में जनसंख्या नियंत्रण नहीं, बल्कि संख्या बल को प्राथमिकता देते हैं।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता बृजभूषण शरण सिंह ने 5 नवंबर 2026 को गोंडा में अग्निवीर योजना की कार्यावधि बढ़ाने के सरकार के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि रूस सहित कई देशों की तर्ज पर भारत में भी इंटरमीडिएट पास करने के बाद प्रत्येक युवा को 3 से 4 साल की अनिवार्य सैन्य प्रशिक्षण मिलनी चाहिए, ताकि देश का हर नागरिक शारीरिक रूप से स्वस्थ और सैन्य दृष्टि से तैयार हो सके।

अग्निवीर पर बृजभूषण का पक्ष

सिंह ने कहा, 'अग्निवीर की जो मंशा है, जैसे मैंने रूस और कई अन्य देशों में देखा है कि जब बच्चा इंटर तक पहुंचता है, तो उसके परिवार और स्कूल को एक नोटिस आता है। सरकार उन्हें 3 या 4 साल के लिए सेना की पूरी ट्रेनिंग देती है। उसके बाद वे बच्चे लौट आते हैं — जिसको मेडिकल की पढ़ाई करनी हो, वह मेडिकल करे; जिसको इंजीनियरिंग करनी हो, वह इंजीनियरिंग करे।' उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे देशों में कोई विशेष सुविधा नहीं दी जाती, परंतु सैन्य प्रशिक्षण अनिवार्य रहता है।

बृजभूषण ने यह भी कहा कि योजना के निर्माताओं के मन में शायद यही भावना रही होगी कि देश का प्रत्येक व्यक्ति सैनिक के रूप में स्वयं को तैयार करे, जिसके लिए दो से तीन साल की ट्रेनिंग आवश्यक है।

नौकरी के प्रावधान से उपजे विवाद पर टिप्पणी

भाजपा नेता ने माना कि जब योजना में 'नौकरी देने' का प्रावधान जोड़ा गया, तभी से अंतर्विरोध बढ़ा। उन्होंने कहा कि आज सेना की ज़रूरत, युद्ध की परिस्थितियाँ और युवाओं की आकांक्षाओं को देखते हुए सरकार ने जो दो साल का कार्यकाल बढ़ाया है, वह 'अत्यंत स्वागतयोग्य' कदम है। उनके अनुसार इससे बड़ी संख्या में युवा अग्निवीर की तैयारी करेंगे, स्वास्थ्य के प्रति सजग होंगे और धीरे-धीरे देश भी स्वस्थ बनेगा।

जनसंख्या नियंत्रण और जातीय संतुलन

इस अवसर पर बृजभूषण शरण सिंह ने जनसंख्या नियंत्रण के मुद्दे पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि देश का एक जागरूक वर्ग — चाहे वह किसी भी जाति या पेशे का हो — जनसंख्या नियंत्रण का पालन करता है, जबकि कुछ लोग इसका अनुसरण नहीं करते। उनका कहना था कि यदि सरकार दो या तीन बच्चों की सीमा निर्धारित करे, तो सीमा पार करने वालों पर गंभीरता से विचार करना होगा।

हालांकि, उन्होंने साथ ही यह भी जोड़ा कि जनसंख्या नियंत्रण नीति बनाते समय सामाजिक और जातिगत संतुलन का भी ध्यान रखना अनिवार्य है। उन्होंने चेताया कि ऐसा न हो कि कठोर नीति के कारण किसी समुदाय का अस्तित्व ही संकट में पड़ जाए।

राजनीति और जनसंख्या का अंतर्संबंध

सिंह ने यह भी रेखांकित किया कि राजनीतिक दल चुनावी टिकट देते समय यह नहीं देखते कि उम्मीदवार ने जनसंख्या नियंत्रण कानून का पालन किया या नहीं — वहाँ 'बहुमत की संख्या' को प्राथमिकता मिलती है। उनके अनुसार, 'मंत्री पद भी उसी हिसाब से बँटते हैं।' इस विषमता और दृष्टिकोण की भिन्नता पर ध्यान दिए बिना कोई भी जनसंख्या नीति व्यावहारिक नहीं होगी।

आगे की दिशा

बृजभूषण शरण सिंह के ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब अग्निवीर योजना में कार्यावधि विस्तार को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों और पूर्व सैन्य अधिकारियों में बहस जारी है। गौरतलब है कि विपक्ष योजना को लेकर सरकार पर लगातार सवाल उठाता रहा है। आने वाले दिनों में सरकार की ओर से संशोधित अग्निवीर नीति के विस्तृत दिशानिर्देश अपेक्षित हैं, जिन पर सभी पक्षों की नज़र बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन गहराई में यह योजना की मूल संरचना — 'सेना बनाम प्रशिक्षण' की दुविधा — को उजागर करता है। उनकी 'अनिवार्य सैन्य प्रशिक्षण' की वकालत भर्ती मॉडल को नागरिक कर्तव्य के ढाँचे में ले जाती है, जो मौजूदा अग्निवीर की सोच से कहीं आगे की बात है। जनसंख्या नीति पर जातीय संतुलन का तर्क राजनीतिक रूप से संवेदनशील है — यह स्वीकार करता है कि जनगणना-आधारित प्रतिनिधित्व की राजनीति किसी भी समान नागरिक संहिता को जटिल बनाती है। मुख्यधारा की रिपोर्टिंग अक्सर इस विरोधाभास को चूक जाती है।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बृजभूषण शरण सिंह ने अग्निवीर योजना पर क्या कहा?
उन्होंने अग्निवीर की कार्यावधि 2 साल बढ़ाने के सरकार के फैसले का स्वागत किया और कहा कि रूस जैसे देशों की तरह भारत में भी इंटरमीडिएट के बाद हर युवा को 3-4 साल की अनिवार्य सैन्य ट्रेनिंग मिलनी चाहिए। उनके अनुसार इससे देश का हर नागरिक शारीरिक रूप से स्वस्थ और सैन्य दृष्टि से तैयार होगा।
अग्निवीर योजना की कार्यावधि कितनी बढ़ाई गई है?
सरकार ने अग्निवीर योजना की कार्यावधि में 2 साल की वृद्धि की है। बृजभूषण शरण सिंह ने इसे सेना की ज़रूरत और युवाओं की तैयारी को ध्यान में रखते हुए उचित कदम बताया है।
बृजभूषण ने जनसंख्या नियंत्रण पर क्या राय दी?
उन्होंने कहा कि यदि सरकार दो या तीन बच्चों की सीमा तय करे तो उल्लंघन करने वालों पर गंभीरता से विचार होना चाहिए, परंतु जनसंख्या नीति में सामाजिक और जातिगत संतुलन का भी ध्यान रखना अनिवार्य है। उन्होंने चेताया कि किसी समुदाय का अस्तित्व संकट में न पड़े।
अग्निवीर योजना में 'नौकरी' के प्रावधान पर उनका क्या मत है?
बृजभूषण शरण सिंह के अनुसार अग्निवीर की मूल भावना नागरिक सैन्य प्रशिक्षण की थी, परंतु जब इसमें नौकरी देने का प्रावधान जोड़ा गया, तभी से योजना में अंतर्विरोध उत्पन्न हुआ। उन्होंने संकेत दिया कि अनिवार्य प्रशिक्षण और नौकरी की गारंटी दो अलग उद्देश्य हैं।
राजनीति और जनसंख्या नीति के बीच क्या संबंध बताया उन्होंने?
उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल टिकट और मंत्री पद बँटवारे में जनसंख्या नियंत्रण कानून के पालन को नहीं, बल्कि समुदाय की संख्या (बहुमत) को प्राथमिकता देते हैं। इस विषमता को नज़रअंदाज़ करके कोई भी जनसंख्या नीति व्यावहारिक नहीं होगी।
राष्ट्र प्रेस
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