अग्निवीर सेवा अवधि 6 साल: विपक्ष ने बताया चुनावी जुमला, RJD-कांग्रेस-JMM का BJP पर हमला
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार के अग्निवीरों की सेवा अवधि चार साल से बढ़ाकर छह साल करने के फैसले पर 5 नवंबर 2026 को विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD), भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के नेताओं ने इसे चुनावी प्रलोभन और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करार दिया। विपक्ष का आरोप है कि मात्र दो साल का विस्तार अग्निवीर योजना की बुनियादी खामियों को दूर नहीं करता।
मुख्य घटनाक्रम
पटना में RJD के राज्यसभा सदस्य मनोज झा ने फैसले को सीधे खारिज करते हुए कहा, 'यह चार और छह साल का क्या चक्कर है? यह पेड इंटर्नशिप प्रोग्राम भारतीय सेना की वीरता को कमज़ोर करता है। मेरा मानना है कि कोई भी समझदार व्यक्ति इस तरह के जल्दबाजी में किए गए बदलावों का समर्थन नहीं कर सकता।' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आगामी पंजाब और उत्तराखंड चुनावों को ध्यान में रखकर यह निर्णय लिया गया है।
रांची में कांग्रेस प्रवक्ता राकेश सिन्हा ने कहा कि यह अग्निवीरों को 'दीपावली की सौगात' नहीं है। उन्होंने कहा, 'एक सैनिक देश के लिए जान कुर्बान करता है, शहीद होता है — तो केंद्र सरकार उन्हें क्या लाभ दे रही है? लाभ के नाम पर शून्य मिल रहा है।' सिन्हा ने इस कदम को महज 'लीपापोती' बताया।
युवाओं के भविष्य पर सवाल
लखनऊ में कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने तर्क दिया कि पहले 17 साल की उम्र में भर्ती होने वाला युवा चार साल की सेवा के बाद 21 साल में सेवानिवृत्त होता था, अब वही 23 साल में रिटायर होगा। उनका कहना है कि सेवानिवृत्ति के बाद ये युवा बहुराष्ट्रीय कंपनियों और बड़े उद्योगपतियों की सुरक्षा एजेंसियों में गार्ड बनने को मजबूर होंगे।
राजपूत ने आगे कहा कि यदि किसी सैनिक को अपनी सेवा की सुरक्षा और अपने परिवार की भलाई का भरोसा नहीं होगा, तो वह देश के लिए जान की बाजी लगाने में हिचकिचाएगा। उन्होंने इसे 'देश के युवाओं, सेना और सैनिकों के साथ अक्षम्य अपराध' बताया।
JMM का चुनावी कोण
झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के नेता मनोज पांडेय ने फैसले को 'छलावा और जुमला' बताते हुए कहा कि सेवा को स्थायी नहीं किया गया — केवल दो साल की अवधि बढ़ाई गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश चुनाव नज़दीक होने के कारण भाजपा (BJP) सरकार को आभास हो गया है कि सत्ता खिसकने वाली है, इसलिए युवाओं को प्रलोभन दिया जा रहा है।
गौरतलब है कि अग्निपथ योजना की घोषणा के बाद से ही यह देशभर में विरोध और राजनीतिक विवाद का केंद्र रही है। यह ऐसे समय में आया है जब कई राज्यों में युवाओं की बेरोज़गारी और सैन्य भर्ती को लेकर बहस तेज है।
सरकार की स्थिति
केंद्र सरकार की ओर से अभी तक विपक्षी आलोचनाओं पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) सूत्रों के अनुसार, सेवा अवधि विस्तार का फैसला अग्निवीरों को अधिक कौशल विकास का अवसर देने के उद्देश्य से लिया गया है।
आगे क्या होगा
विपक्षी दलों ने संसद और राज्यों में इस मुद्दे को उठाने का संकेत दिया है। अग्निपथ योजना में सुधार की माँग को लेकर पहले से ही याचिकाएँ न्यायालयों में लंबित हैं। आने वाले हफ्तों में यह मुद्दा चुनावी राज्यों में राजनीतिक बहस का केंद्र बनने की पूरी संभावना है।