भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष तवांग पहुंचे, मंत्री शेखावत और CM पेमा खांडू ने किए दर्शन
सारांश
मुख्य बातें
भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष 31 अक्टूबर 2026 को अरुणाचल प्रदेश के तवांग पहुंचे, जहाँ सैकड़ों श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों ने उनके स्वागत में उत्साहपूर्वक भाग लिया। केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू इस ऐतिहासिक अवसर पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहे। गौरतलब है कि यह पवित्र अवशेष 13 वर्ष के अंतराल के बाद अरुणाचल प्रदेश लौटे हैं।
यात्रा का मार्ग और धार्मिक महत्व
इस पवित्र यात्रा के अंतर्गत बुद्ध के अवशेषों को पहले पश्चिमी अरुणाचल प्रदेश के तवांग और बोमडिला ले जाया जाएगा, और इसके पश्चात मध्य क्षेत्र के नामसाई में कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। राज्य के तीन जिलों में इस अवसर पर धार्मिक आयोजन रखे गए हैं। बौद्ध समुदाय के लिए यह यात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक महोत्सव है।
मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने कहा, 'आज का दिन काफी महत्वपूर्ण है। अरुणाचल प्रदेश की ओर से मैं प्रधानमंत्री और संस्कृति मंत्री को धन्यवाद देता हूँ। हम बौद्ध लोगों का मानना है कि स्वयं भगवान बुद्ध हम लोगों के प्रदेश में पधारे हुए हैं। हम प्रार्थना करते हैं कि जो भी कार्यक्रम में शामिल हों, उसका जीवन खुशमय रहे। बुद्ध की परंपरा केवल धर्म नहीं, यह जीवन जीने की पद्धति है।'
मंत्री शेखावत की प्रतिक्रिया
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा, 'बौद्ध आध्यात्मिकता के सबसे सम्मानित केंद्रों में से एक, ऐतिहासिक तवांग मठ में भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष के दर्शन करने का सौभाग्य मिला। मैंने प्रार्थना की और सभी के लिए शांति, सद्भाव और कल्याण का आशीर्वाद माँगा। भारत की समृद्ध सभ्यतागत विरासत और उसकी चिरंतन परंपराओं के बीच यह एक अत्यंत विनम्र और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध करने वाला अनुभव रहा।'
शेखावत ने आगे कहा, 'अरुणाचल प्रदेश के लोगों के लिए आज का दिन अत्यंत सौभाग्य का है। भगवान बुद्ध के अस्थि अवशेषों का यहाँ पहुँचना और अधिक प्रासंगिक और महत्वपूर्ण हो गया है। मान्यता है कि भगवान बुद्ध स्वर्ग से धरती पर लौटते हैं।'
अन्य गणमान्यों की उपस्थिति
केंद्रीय राज्यमंत्री सुरेश गोपी ने इस अवसर पर कहा, 'जब भी आप पूर्वोत्तर जाते हैं, तो आपको हमेशा कुछ नया अनुभव मिलता है। अगर हम ईश्वर की तुलना प्रकृति के उन तत्वों से करें जो हमारे और हमारी आने वाली पीढ़ियों के जीवन को बनाए रखने में मदद करते हैं, तो 'प्रकृति माँ' को हमारा साथ देना ही होगा।' मेघालय के मंत्री टिमोथी डी. शिरा भी तवांग मठ पहुँचे और कहा कि लद्दाख और सिक्किम के मठ देखने के बाद तवांग का यह अनुभव विशेष रहा।
आम जनता और बौद्ध समुदाय पर असर
तवांग मठ बौद्ध आस्था के सबसे प्रतिष्ठित केंद्रों में से एक है और यह 13 वर्षों में पहली बार है जब अवशेष यहाँ लाए गए हैं। स्थानीय बौद्ध समुदाय के लिए यह केवल आस्था का क्षण नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सभ्यतागत गौरव का अवसर भी है। यह आयोजन अरुणाचल प्रदेश को धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर और अधिक उभारने का काम भी करेगा।
यह यात्रा राज्य के तीनों आयोजन स्थलों पर अपने कार्यक्रम पूरे करने के पश्चात संपन्न होगी और बौद्ध परंपरा के अनुरूप समापन समारोह आयोजित किया जाएगा।