14 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

बुद्ध के शिष्यों के पवित्र अवशेष लेकर मंगोलिया जाएंगे असम के राज्यपाल, 9 जून तक चलेगी प्रदर्शनी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
बुद्ध के शिष्यों के पवित्र अवशेष लेकर मंगोलिया जाएंगे असम के राज्यपाल, 9 जून तक चलेगी प्रदर्शनी

सारांश

भारत की बौद्ध कूटनीति एक नई ऊँचाई पर — असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य 30 मई को सांची स्तूप से बुद्ध के दो प्रमुख शिष्यों के पवित्र अवशेष लेकर मंगोलिया जाएंगे। प्रधानमंत्री मोदी की प्रेरणा से आयोजित यह प्रदर्शनी 9 जून तक चलेगी और दोनों देशों के सदियों पुराने आध्यात्मिक रिश्ते को नई धार देगी।

मुख्य बातें

असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य 30 मई 2026 को भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए मंगोलिया रवाना होंगे।
यात्रा का उद्देश्य अरहंत सारिपुत्र और अरहंत मौद्गल्यायन के पवित्र अवशेषों की विशेष प्रदर्शनी आयोजित करना है।
अवशेष यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल सांची स्तूप , मध्य प्रदेश से लाए जा रहे हैं।
यह पहल भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विशेष प्रेरणा पर आयोजित की जा रही है।
राज्यपाल 3 जून को भारत लौटेंगे; अवशेष 9 जून 2026 तक मंगोलिया में रहेंगे।

असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य 30 मई 2026 को भगवान बुद्ध के दो प्रमुख शिष्यों — अरहंत सारिपुत्र और अरहंत मौद्गल्यायन — के पवित्र अवशेषों के साथ भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए मंगोलिया के लिए रवाना होंगे। यह विशेष आध्यात्मिक प्रदर्शनी 9 जून 2026 तक चलेगी और भारत-मंगोलिया के बीच सदियों पुराने बौद्ध सांस्कृतिक संबंधों को नई ऊर्जा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल मानी जा रही है।

अवशेषों का स्रोत और महत्त्व

ये पवित्र अवशेष मध्य प्रदेश स्थित सांची स्तूप परिसर के सांची विहार चैत्य में संरक्षित हैं। सांची स्तूप एक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है और बौद्ध धर्म के सबसे पूजनीय केंद्रों में से एक माना जाता है। राजभवन द्वारा जारी बयान के अनुसार, इन अवशेषों को पूरे सम्मान और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ मंगोलिया ले जाया जाएगा।

प्रधानमंत्री मोदी की विशेष प्रेरणा

राजभवन के बयान के अनुसार यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विशेष प्रेरणा पर की जा रही है। इसका उद्देश्य बौद्ध जगत में भारत के 'आध्यात्मिक पड़ोसी' माने जाने वाले मंगोलिया के साथ भारत के ऐतिहासिक और सभ्यतागत संबंधों को और प्रगाढ़ बनाना है। यह आयोजन भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के तत्वावधान में हो रहा है।

मंगोलिया में क्या होगा

प्रदर्शनी के दौरान मंगोलिया भर से हज़ारों श्रद्धालु, बौद्ध भिक्षु, शोधकर्ता और धर्म अनुयायी इन पवित्र अवशेषों के दर्शन कर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। आयोजकों के अनुसार यह आयोजन दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क और सहयोग को नई मज़बूती देगा।

कार्यक्रम की समय-सारणी

राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य 3 जून 2026 को भारत लौट आएंगे, जबकि भगवान बुद्ध के शिष्यों के पवित्र अवशेष 9 जून 2026 तक मंगोलिया में आयोजित विशेष आध्यात्मिक प्रदर्शनी का हिस्सा बने रहेंगे। यह पहल भारत की 'बौद्ध कूटनीति' को एशिया में और विस्तार देने की व्यापक रणनीति का हिस्सा प्रतीत होती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारत की उस 'बौद्ध कूटनीति' का विस्तार है जिसे मोदी सरकार ने श्रीलंका, थाईलैंड और म्यांमार के साथ पहले भी आज़माया है। मंगोलिया, जहाँ तिब्बती बौद्ध धर्म की गहरी जड़ें हैं और चीन का भूराजनीतिक प्रभाव भी है, वहाँ यह पहल रणनीतिक दृष्टि से भी महत्त्वपूर्ण है। सांची के अवशेषों को राजनयिक माध्यम के रूप में उपयोग करना भारत की 'सॉफ्ट पावर' की परिपक्वता को दर्शाता है — लेकिन यह भी देखना होगा कि क्या इस आध्यात्मिक जुड़ाव को संस्थागत सहयोग में बदला जा सकता है।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम के राज्यपाल मंगोलिया क्यों जा रहे हैं?
असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य भगवान बुद्ध के शिष्यों अरहंत सारिपुत्र और अरहंत मौद्गल्यायन के पवित्र अवशेषों के साथ भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने के लिए मंगोलिया जा रहे हैं। यह यात्रा भारत-मंगोलिया के बौद्ध सांस्कृतिक संबंधों को मज़बूत करने की कूटनीतिक पहल का हिस्सा है।
ये पवित्र अवशेष कहाँ से लाए जा रहे हैं?
ये अवशेष मध्य प्रदेश स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल सांची स्तूप परिसर के सांची विहार चैत्य में संरक्षित हैं। सांची स्तूप बौद्ध धर्म के सबसे पूजनीय केंद्रों में से एक माना जाता है।
मंगोलिया में यह प्रदर्शनी कब तक चलेगी?
यह विशेष आध्यात्मिक प्रदर्शनी 9 जून 2026 तक चलेगी। राज्यपाल आचार्य 3 जून को भारत लौट आएंगे, जबकि अवशेष 9 जून तक मंगोलिया में रहेंगे।
इस पहल के पीछे किसकी प्रेरणा है?
राजभवन के बयान के अनुसार यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विशेष प्रेरणा पर की जा रही है। इसे भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है।
इस प्रदर्शनी से भारत-मंगोलिया संबंधों पर क्या असर पड़ेगा?
आयोजकों के अनुसार यह आयोजन दोनों देशों के बीच बौद्ध धर्म के माध्यम से स्थापित सांस्कृतिक संबंधों और मित्रता का प्रतीक बनेगा। इससे दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क और सहयोग को नई मज़बूती मिलने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले