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सांची के पवित्र अस्थि अवशेष मंगोलिया रवाना, बौद्ध धर्मगुरु बोले — 'आध्यात्मिक वैभव का अनुपम खजाना'

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सांची के पवित्र अस्थि अवशेष मंगोलिया रवाना, बौद्ध धर्मगुरु बोले — 'आध्यात्मिक वैभव का अनुपम खजाना'

सारांश

भगवान बुद्ध के परम शिष्यों सारिपुत्र और महामौद्गल्यायन के पवित्र अस्थि अवशेष मंगोलिया विहार यात्रा पर रवाना हुए। भोपाल के राजा भोज विमानतल पर आयोजित गरिमामयी विदाई समारोह में बौद्ध धर्मगुरु ने सांची को 'आध्यात्मिक वैभव का अनुपम खजाना' बताया — यह भारत की सांस्कृतिक कूटनीति का एक महत्त्वपूर्ण अध्याय है।

मुख्य बातें

भगवान बुद्ध के शिष्यों सारिपुत्र एवं महामौद्गल्यायन के पवित्र अस्थि अवशेष 28 मई 2025 को मंगोलिया विहार यात्रा पर रवाना हुए।
विदाई समारोह भोपाल के राजा भोज विमानतल पर पूर्ण धार्मिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ।
बौद्ध धर्मगुरु बानगल उपतिस्स नायक थेरी ने सांची को 'आध्यात्मिक वैभव का अनुपम खजाना' बताया।
पूर्व की थाईलैंड यात्रा में लगभग 55 लाख श्रद्धालुओं ने इन अवशेषों के दर्शन किए थे।
इन अवशेषों का संरक्षण विश्व में केवल भारत , श्रीलंका और म्यांमार में है।
मंत्री प्रहलाद पटेल ने इसे भारत-मंगोलिया के प्राचीन सांस्कृतिक संबंधों को सुदृढ़ करने वाला कदम बताया।

बौद्ध धर्मगुरु बानगल उपतिस्स नायक थेरी ने 28 मई 2025 को भोपाल के राजा भोज विमानतल पर आयोजित विदाई समारोह में कहा कि सांची केवल एक ऐतिहासिक धरोहर नहीं, बल्कि आध्यात्मिक वैभव का अनुपम खजाना है। यह अवसर था भगवान बुद्ध के परम शिष्यों सारिपुत्र एवं महामौद्गल्यायन के पवित्र अस्थि अवशेषों की मंगोलिया विहार यात्रा के लिए गरिमामयी विदाई का, जो पूर्ण धार्मिक विधि-विधान और मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुई।

मुख्य घटनाक्रम

राजा भोज विमानतल, भोपाल पर आयोजित इस भव्य समारोह में बौद्ध परंपरा के अनुसार पूर्ण धार्मिक अनुष्ठान किए गए। थेरी ने कहा कि बौद्ध जगत में इन पवित्र अवशेषों का स्थान सर्वोच्च है और सांची जैसी पावन धरा का संरक्षक बनना जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य है। उन्होंने यह भी स्मरण कराया कि जब ये अवशेष पूर्व में थाईलैंड यात्रा पर गए थे, तब लगभग 55 लाख श्रद्धालुओं ने इनके दर्शन एवं पूजा-अर्चना की थी।

सरकार की प्रतिक्रिया

मध्य प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि यह दिन भारत और मध्य प्रदेश के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के समान है। उन्होंने रेखांकित किया कि इन पवित्र अवशेषों का संरक्षण संपूर्ण विश्व में केवल भारत, श्रीलंका और म्यांमार में ही है — जो देश और प्रदेश के लिए अत्यंत गौरव का विषय है।

पटेल ने अपने पूर्व संस्कृति मंत्री कार्यकाल का उल्लेख करते हुए बताया कि सांची आने वाले विदेशी पर्यटकों की सुविधा के लिए स्थानीय भाषाओं में साइनबोर्ड स्थापित करने की नीति बनाई गई थी। श्रीलंका से आने वाले बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को ध्यान में रखते हुए सांची में उनकी भाषा में भी संकेतक लगाए गए, जिससे उन्हें आत्मीयता का अनुभव होता है।

सांची की वैश्विक महत्ता

पटेल ने कहा कि सांची केवल अपने भव्य स्तूपों के कारण विश्व धरोहर स्थल नहीं है, बल्कि इन चैतन्य अस्थि अवशेषों की पावन उपस्थिति के कारण विश्वभर की श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। उन्होंने कहा कि मंगोलिया के साथ भारत के सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक संबंध अत्यंत प्राचीन हैं और यह यात्रा उन संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करेगी।

प्रशासन का संकल्प

कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने कहा कि भगवान बुद्ध की यह विरासत विश्व बंधुत्व की अमूल्य धरोहर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मूल मंत्र 'विकास भी, विरासत भी' का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रशासन इस संकल्प को पूरी निष्ठा के साथ धरातल पर उतारने के लिए प्रतिबद्ध है। उनके अनुसार, ऐसे अंतरराष्ट्रीय एवं आध्यात्मिक आयोजन विश्व समुदाय को यह संदेश देते हैं कि भारत प्राचीन काल से विश्वगुरु रहा है।

आगे की राह

यह मंगोलिया विहार यात्रा भारत-मंगोलिया के बीच बौद्ध धर्म की साझा विरासत को नई ऊँचाई देने का अवसर है। गौरतलब है कि थाईलैंड यात्रा के दौरान 55 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के दर्शन के बाद यह दूसरी बड़ी अंतरराष्ट्रीय यात्रा है, जो भारत की सांस्कृतिक कूटनीति को नई दिशा देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारत की 'सांस्कृतिक कूटनीति' की बढ़ती महत्वाकांक्षा का प्रतीक है। थाईलैंड में 55 लाख श्रद्धालुओं की भागीदारी यह दर्शाती है कि बौद्ध विरासत की सॉफ्ट पावर कितनी व्यापक है। प्रश्न यह है कि क्या ये यात्राएँ दीर्घकालिक द्विपक्षीय ढाँचे में तब्दील होती हैं, या केवल प्रतीकात्मक आयोजन बनकर रह जाती हैं। सांची की विरासत की वास्तविक परीक्षा स्थानीय संरक्षण, पर्यटन अवसंरचना और शोध निवेश में होगी — सिर्फ विदेश यात्राओं की संख्या में नहीं।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सारिपुत्र और महामौद्गल्यायन के अस्थि अवशेष कहाँ संरक्षित हैं?
ये पवित्र अस्थि अवशेष मध्य प्रदेश के सांची में संरक्षित हैं। विश्वभर में इन अवशेषों का संरक्षण केवल भारत, श्रीलंका और म्यांमार में ही है।
मंगोलिया विहार यात्रा क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
मंगोलिया विहार यात्रा भगवान बुद्ध के शिष्यों के पवित्र अस्थि अवशेषों को धार्मिक दर्शन हेतु मंगोलिया ले जाने की यात्रा है। यह भारत और मंगोलिया के बीच प्राचीन बौद्ध सांस्कृतिक संबंधों को और सुदृढ़ करने का प्रयास है।
पहले इन अवशेषों की थाईलैंड यात्रा का क्या परिणाम रहा?
थाईलैंड यात्रा के दौरान लगभग 55 लाख श्रद्धालुओं ने इन पवित्र अवशेषों के दर्शन एवं पूजा-अर्चना की थी। यह आँकड़ा इन अवशेषों की बौद्ध जगत में असाधारण आध्यात्मिक महत्ता को रेखांकित करता है।
सांची को विश्व धरोहर स्थल क्यों माना जाता है?
सांची अपने भव्य बौद्ध स्तूपों के कारण यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है, किंतु इसकी विशिष्टता इसलिए भी है क्योंकि यहाँ भगवान बुद्ध के परम शिष्यों के चैतन्य अस्थि अवशेष विद्यमान हैं, जो इसे वैश्विक बौद्ध श्रद्धा का केंद्र बनाते हैं।
इस समारोह में कौन-कौन से प्रमुख अधिकारी उपस्थित थे?
समारोह में मध्य प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल, कलेक्टर प्रियंक मिश्रा तथा बौद्ध धर्मगुरु बानगल उपतिस्स नायक थेरी सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
राष्ट्र प्रेस
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