बुद्ध के शिष्यों के पवित्र अवशेष वापसी के लिए भारतीय प्रतिनिधिमंडल उलानबटार पहुँचा
सारांश
मुख्य बातें
लद्दाख के उपराज्यपाल विनय सक्सेना के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल 8 जून 2026 को मंगोलिया की राजधानी उलानबटार पहुँचा, जिसका उद्देश्य भगवान बुद्ध के दो प्रमुख शिष्यों — अरहंत सारिपुत्र और अरहंत मौद्गल्यायन — के पवित्र अवशेषों को भारत वापस लाना है। ये अवशेष 31 मई से 9 जून तक गंडनटेगचेनलिंग मठ में आयोजित दस दिवसीय प्रदर्शनी के लिए मंगोलिया लाए गए थे।
मुख्य घटनाक्रम
मंगोलिया में भारतीय दूतावास ने एक्स पर पोस्ट कर जानकारी दी कि प्रतिनिधिमंडल एक विशेष भारतीय वायुसेना उड़ान से उलानबटार पहुँचा। हवाई अड्डे पर मंगोलिया के अरखांगई प्रांत के गवर्नर त्सेरेनदमिद ब्यामबाडू, भारतीय राजदूत अतुल मल्हारी गोत्सुर्वे और गंडन मठ के वरिष्ठ भिक्षुओं ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया।
गौरतलब है कि इन पवित्र अवशेषों को राष्ट्राध्यक्ष स्तर की सुरक्षा और प्रोटोकॉल प्रदान किया गया था। अवशेषों को नई दिल्ली से भारतीय वायु सेना (IAF) की विशेष उड़ान से मंगोलिया लाया गया था, और उस समय असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय दल भी साथ था।
प्रतिनिधिमंडल की संरचना
लगभग 45 सदस्यों वाले इस प्रतिनिधिमंडल में भारत और श्रीलंका के वरिष्ठ अधिकारी एवं著名 बौद्ध भिक्षु शामिल थे। इंटरनेशनल बुद्धिस्ट कॉन्फेडरेशन (IBC) भी इस आयोजन में सक्रिय भूमिका में था। यह प्रदर्शनी गंडन तेगचेनलिंग मठ के अनुरोध पर आयोजित की गई थी, जिसमें श्रीलंका की महाबोधि सोसाइटी, संस्कृति मंत्रालय के अधीन भारत के राष्ट्रीय संग्रहालय और मध्य प्रदेश सरकार का सहयोग रहा।
राज्यपाल आचार्य का संदेश
राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने इस अवसर पर कहा, "जब हम भगवान बुद्ध के दो मुख्य शिष्यों, अरहंत सारिपुत्र और अरहंत मौद्गल्यायन, के पवित्र शरीर के अवशेषों को भारत की धरती से मंगोलिया की खूबसूरत धरती पर ले जा रहे हैं, तो हम सिर्फ ऐतिहासिक पुरानी चीजें ही नहीं ले जा रहे हैं, बल्कि हम ज्ञान की एक जीती-जागती चिंगारी, शांति का एक वैश्विक संदेश और तथागत के सबसे करीबी साथियों की हमेशा रहने वाली आध्यात्मिक ऊर्जा भी ले जा रहे हैं।"
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और ऐतिहासिक संदर्भ
उलानबटार में प्रदर्शनी के दौरान भक्त प्रतिदिन सुबह से ही गंडनटेगचेनलिंग मठ में पवित्र अवशेषों के दर्शन के लिए लंबी कतारों में खड़े रहे। यह ऐसे समय में आया है जब भारत-मंगोलिया बौद्ध सांस्कृतिक संबंध लगातार गहरे हो रहे हैं। इससे पहले जून 2022 में बुद्ध के चार कपिलवस्तु अवशेष भारत के राष्ट्रीय संग्रहालय से 11 दिन की प्रदर्शनी के लिए मंगोलिया ले जाए गए थे, जो 29 वर्षों में पहली ऐसी यात्रा थी।
द्विपक्षीय सहयोग का विस्तार
दूतावास के अनुसार, लद्दाख और अरखांगई ने अक्टूबर 2025 में एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए, जिसमें सांस्कृतिक आदान-प्रदान, पर्यटन, व्यापार, शिक्षा, पशुपालन, कृषि, बागवानी, खगोलभौतिकी और खेल जैसे क्षेत्रों में सहयोग शामिल है। यह धार्मिक आयोजन उस व्यापक द्विपक्षीय ढाँचे का हिस्सा है जो भारत और मंगोलिया के बीच 'आध्यात्मिक पड़ोसी' संबंधों को नई ऊर्जा दे रहा है।