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बुद्ध के शिष्यों के पवित्र अवशेष वापसी के लिए भारतीय प्रतिनिधिमंडल उलानबटार पहुँचा

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बुद्ध के शिष्यों के पवित्र अवशेष वापसी के लिए भारतीय प्रतिनिधिमंडल उलानबटार पहुँचा

सारांश

भारत और मंगोलिया के बीच आध्यात्मिक सेतु एक बार फिर जीवंत हुआ — भगवान बुद्ध के दो प्रमुख शिष्यों के पवित्र अवशेषों की दस दिवसीय प्रदर्शनी के बाद उन्हें वापस लाने के लिए उच्चस्तरीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल उलानबटार पहुँचा, जो दोनों देशों के बौद्ध सांस्कृतिक बंधन को नई गहराई दे रहा है।

मुख्य बातें

लद्दाख के उपराज्यपाल विनय सक्सेना के नेतृत्व में भारतीय प्रतिनिधिमंडल 8 जून 2026 को उलानबटार पहुँचा।
अरहंत सारिपुत्र और अरहंत मौद्गल्यायन के पवित्र अवशेष 31 मई से 9 जून तक गंडनटेगचेनलिंग मठ में प्रदर्शित किए गए।
अवशेषों को राष्ट्राध्यक्ष स्तर की सुरक्षा और प्रोटोकॉल प्रदान किया गया; IAF की विशेष उड़ान से लाया गया था।
लगभग 45 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में भारत-श्रीलंका के अधिकारी, भिक्षु और IBC के प्रतिनिधि शामिल थे।
इससे पहले जून 2022 में बुद्ध के चार कपिलवस्तु अवशेष 29 वर्षों में पहली बार मंगोलिया ले जाए गए थे।
लद्दाख और अरखांगई के बीच अक्टूबर 2025 में सांस्कृतिक, व्यापार सहित कई क्षेत्रों में MoU पर हस्ताक्षर हुए।

लद्दाख के उपराज्यपाल विनय सक्सेना के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल 8 जून 2026 को मंगोलिया की राजधानी उलानबटार पहुँचा, जिसका उद्देश्य भगवान बुद्ध के दो प्रमुख शिष्यों — अरहंत सारिपुत्र और अरहंत मौद्गल्यायन — के पवित्र अवशेषों को भारत वापस लाना है। ये अवशेष 31 मई से 9 जून तक गंडनटेगचेनलिंग मठ में आयोजित दस दिवसीय प्रदर्शनी के लिए मंगोलिया लाए गए थे।

मुख्य घटनाक्रम

मंगोलिया में भारतीय दूतावास ने एक्स पर पोस्ट कर जानकारी दी कि प्रतिनिधिमंडल एक विशेष भारतीय वायुसेना उड़ान से उलानबटार पहुँचा। हवाई अड्डे पर मंगोलिया के अरखांगई प्रांत के गवर्नर त्सेरेनदमिद ब्यामबाडू, भारतीय राजदूत अतुल मल्हारी गोत्सुर्वे और गंडन मठ के वरिष्ठ भिक्षुओं ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया।

गौरतलब है कि इन पवित्र अवशेषों को राष्ट्राध्यक्ष स्तर की सुरक्षा और प्रोटोकॉल प्रदान किया गया था। अवशेषों को नई दिल्ली से भारतीय वायु सेना (IAF) की विशेष उड़ान से मंगोलिया लाया गया था, और उस समय असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय दल भी साथ था।

प्रतिनिधिमंडल की संरचना

लगभग 45 सदस्यों वाले इस प्रतिनिधिमंडल में भारत और श्रीलंका के वरिष्ठ अधिकारी एवं著名 बौद्ध भिक्षु शामिल थे। इंटरनेशनल बुद्धिस्ट कॉन्फेडरेशन (IBC) भी इस आयोजन में सक्रिय भूमिका में था। यह प्रदर्शनी गंडन तेगचेनलिंग मठ के अनुरोध पर आयोजित की गई थी, जिसमें श्रीलंका की महाबोधि सोसाइटी, संस्कृति मंत्रालय के अधीन भारत के राष्ट्रीय संग्रहालय और मध्य प्रदेश सरकार का सहयोग रहा।

राज्यपाल आचार्य का संदेश

राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने इस अवसर पर कहा, "जब हम भगवान बुद्ध के दो मुख्य शिष्यों, अरहंत सारिपुत्र और अरहंत मौद्गल्यायन, के पवित्र शरीर के अवशेषों को भारत की धरती से मंगोलिया की खूबसूरत धरती पर ले जा रहे हैं, तो हम सिर्फ ऐतिहासिक पुरानी चीजें ही नहीं ले जा रहे हैं, बल्कि हम ज्ञान की एक जीती-जागती चिंगारी, शांति का एक वैश्विक संदेश और तथागत के सबसे करीबी साथियों की हमेशा रहने वाली आध्यात्मिक ऊर्जा भी ले जा रहे हैं।"

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और ऐतिहासिक संदर्भ

उलानबटार में प्रदर्शनी के दौरान भक्त प्रतिदिन सुबह से ही गंडनटेगचेनलिंग मठ में पवित्र अवशेषों के दर्शन के लिए लंबी कतारों में खड़े रहे। यह ऐसे समय में आया है जब भारत-मंगोलिया बौद्ध सांस्कृतिक संबंध लगातार गहरे हो रहे हैं। इससे पहले जून 2022 में बुद्ध के चार कपिलवस्तु अवशेष भारत के राष्ट्रीय संग्रहालय से 11 दिन की प्रदर्शनी के लिए मंगोलिया ले जाए गए थे, जो 29 वर्षों में पहली ऐसी यात्रा थी।

द्विपक्षीय सहयोग का विस्तार

दूतावास के अनुसार, लद्दाख और अरखांगई ने अक्टूबर 2025 में एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए, जिसमें सांस्कृतिक आदान-प्रदान, पर्यटन, व्यापार, शिक्षा, पशुपालन, कृषि, बागवानी, खगोलभौतिकी और खेल जैसे क्षेत्रों में सहयोग शामिल है। यह धार्मिक आयोजन उस व्यापक द्विपक्षीय ढाँचे का हिस्सा है जो भारत और मंगोलिया के बीच 'आध्यात्मिक पड़ोसी' संबंधों को नई ऊर्जा दे रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे नई दिल्ली दक्षिण-पूर्व और मध्य एशिया में नरम शक्ति के रूप में तेजी से भुना रही है। मंगोलिया, जहाँ तिब्बती बौद्ध धर्म गहरी जड़ें रखता है, चीन और रूस के बीच भू-राजनीतिक दबाव में है — ऐसे में भारत का यह आध्यात्मिक संपर्क रणनीतिक महत्व भी रखता है। राष्ट्राध्यक्ष स्तर की सुरक्षा और IAF उड़ान का उपयोग यह संकेत देता है कि सरकार इसे सांस्कृतिक नहीं, बल्कि राजनयिक प्राथमिकता मानती है। मुख्यधारा की कवरेज इस धार्मिक आयोजन के भू-राजनीतिक आयाम को अक्सर नज़रअंदाज़ करती है।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अरहंत सारिपुत्र और अरहंत मौद्गल्यायन के पवित्र अवशेष क्या हैं?
ये भगवान बुद्ध के दो प्रमुख शिष्यों के शारीरिक अवशेष हैं, जो भारत के राष्ट्रीय संग्रहालय में संरक्षित हैं। इन्हें बौद्ध धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है और इन्हें राष्ट्राध्यक्ष स्तर का प्रोटोकॉल दिया जाता है।
ये अवशेष मंगोलिया क्यों ले जाए गए थे?
गंडन तेगचेनलिंग मठ के अनुरोध पर इन्हें 31 मई से 9 जून 2026 तक उलानबटार में दस दिवसीय सार्वजनिक प्रदर्शनी के लिए लाया गया था। प्रदर्शनी के दौरान भक्त प्रतिदिन सुबह से दर्शन के लिए कतार में लगते रहे।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल में कौन शामिल थे?
लगभग 45 सदस्यीय इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व लद्दाख के उपराज्यपाल विनय सक्सेना ने किया। इसमें भारत और श्रीलंका के वरिष्ठ अधिकारी, प्रमुख बौद्ध भिक्षु और इंटरनेशनल बुद्धिस्ट कॉन्फेडरेशन (IBC) के प्रतिनिधि शामिल थे।
क्या इससे पहले भी बुद्ध के अवशेष मंगोलिया ले जाए गए हैं?
हाँ, जून 2022 में बुद्ध के चार कपिलवस्तु अवशेष 11 दिन की प्रदर्शनी के लिए मंगोलिया ले जाए गए थे, जो 29 वर्षों में पहली ऐसी यात्रा थी। वर्तमान यात्रा उसी परंपरा को आगे बढ़ाती है।
भारत और मंगोलिया के बीच हाल में कौन-से द्विपक्षीय समझौते हुए हैं?
अक्टूबर 2025 में लद्दाख और मंगोलिया के अरखांगई प्रांत के बीच एक MoU पर हस्ताक्षर हुए, जिसमें सांस्कृतिक आदान-प्रदान, पर्यटन, व्यापार, शिक्षा, कृषि, खगोलभौतिकी और खेल जैसे क्षेत्र शामिल हैं। यह धार्मिक आयोजन उसी व्यापक द्विपक्षीय ढाँचे का हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
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