बुद्ध के शिष्यों के पवित्र अवशेष लेकर मंगोलिया जाएंगे असम के राज्यपाल, 9 जून तक चलेगी प्रदर्शनी
सारांश
मुख्य बातें
असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य भगवान बुद्ध के दो प्रमुख शिष्यों — अरहंत सारिपुत्र और अरहंत मौद्गल्यायन — के पवित्र अवशेषों के साथ एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए 30 मई 2026 को मंगोलिया के लिए रवाना होंगे। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित यह आध्यात्मिक प्रदर्शनी 9 जून 2026 तक चलेगी और इसे भारत-मंगोलिया के बीच बौद्ध विरासत पर आधारित एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है।
किन अवशेषों को ले जाया जाएगा
ये पवित्र अवशेष मध्य प्रदेश स्थित सांची स्तूप परिसर के सांची विहार चैत्य में संरक्षित हैं। सांची स्तूप यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है और बौद्ध धर्म के सर्वाधिक पूजनीय केंद्रों में गिना जाता है। अवशेषों को पूरे धार्मिक सम्मान और रीति-रिवाजों के साथ मंगोलिया ले जाया जाएगा।
पहल की पृष्ठभूमि
राजभवन द्वारा जारी बयान के अनुसार, यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विशेष प्रेरणा पर की जा रही है। इसका उद्देश्य बौद्ध जगत में भारत के 'आध्यात्मिक पड़ोसी' कहे जाने वाले मंगोलिया के साथ भारत के सदियों पुराने सभ्यतागत संबंधों को और प्रगाढ़ बनाना है। गौरतलब है कि मंगोलिया में बौद्ध धर्म की गहरी जड़ें हैं और दोनों देशों के बीच यह साझा विरासत कूटनीतिक संबंधों का एक सशक्त आधार रही है।
प्रदर्शनी का स्वरूप और श्रद्धालुओं की भागीदारी
आयोजकों के अनुसार, 9 जून 2026 तक चलने वाली इस प्रदर्शनी में मंगोलिया भर से हज़ारों श्रद्धालु, बौद्ध भिक्षु, शोधकर्ता और धर्म अनुयायी पवित्र अवशेषों के दर्शन कर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। यह आयोजन दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क और सांस्कृतिक सहयोग को नई ऊर्जा देगा।
राज्यपाल का कार्यक्रम
राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य 30 मई को प्रतिनिधिमंडल के साथ मंगोलिया रवाना होंगे और 3 जून 2026 को भारत लौट आएंगे। हालांकि भगवान बुद्ध के शिष्यों के पवित्र अवशेष 9 जून तक मंगोलिया में आध्यात्मिक प्रदर्शनी का हिस्सा बने रहेंगे। यह प्रदर्शनी भारत-मंगोलिया मित्रता और बौद्ध धर्म के माध्यम से जुड़ी साझा सांस्कृतिक चेतना का जीवंत प्रमाण बनेगी।